मधुमेह का बढ़ता वैश्विक संकट: जागरूकता, रोकथाम और भारत की पहल
-BY- JYOTI RAWAT-
दुनिया भर में मधुमेह तेजी से बढ़ता स्वास्थ्य संकट बन चुका है। हर बीतते वर्ष के साथ इसकी चुनौती और गंभीर होती जा रही है, क्योंकि अधिक लोग इसकी जटिलताओं का सामना कर रहे हैं। लाखों मरीज रोज़मर्रा के काम—घर, ऑफिस और स्कूल—तक पहुँचने में भी कठिनाइयों से गुजरते हैं। अक्सर मधुमेह देखभाल केवल रक्त शर्करा नियंत्रण पर टिक जाती है, जिससे मरीजों को मानसिक व शारीरिक बोझ उठाना पड़ता है। वर्ष 2023 में प्रकाशित आईसीएमआर–आईएनडीआईएबी अध्ययन के अनुसार, देश में मधुमेह के रोगियों की संख्या 10.1 करोड़ तक पहुंच चुकी है।
हर साल 14 नवंबर को दुनिया विश्व मधुमेह दिवस मनाती है—एक ऐसा मंच जो मधुमेह से जुड़े बढ़ते वैश्विक खतरे और इससे निपटने के लिए आवश्यक सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर देता है। यह दिन हमें रोकथाम, त्वरित निदान और प्रभावी प्रबंधन के महत्व की याद दिलाता है।
विश्व मधुमेह दिवस की शुरुआत 1991 में अंतर्राष्ट्रीय मधुमेह संघ और विश्व स्वास्थ्य संगठन ने की थी। बाद में 2006 में इसे संयुक्त राष्ट्र दिवस का दर्जा मिला। यह दिन इंसुलिन के सह-आविष्कारक डॉ. फ्रेडरिक बैटिंग के जन्मदिवस पर मनाया जाता है, ताकि वैज्ञानिक समुदाय के इस ऐतिहासिक योगदान को सम्मान दिया जा सके। आज यह मधुमेह के प्रति जागरूकता फैलाने वाला दुनिया का सबसे बड़ा अभियान बन चुका है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के मुताबिक, 1980 में जहां दुनिया में मधुमेह के 108 मिलियन मरीज थे, वहीं 2014 तक यह संख्या बढ़कर 422 मिलियन हो गई। इस अवधि में मधुमेह का प्रसार 4.7% से बढ़कर 8.5% तक पहुंच गया, जो मोटापा और अस्वस्थ जीवनशैली जैसे कारकों में तेजी से बढ़ोतरी का संकेत देता है। विशेष रूप से निम्न और मध्यम आय वाले देशों में यह संकट अधिक तेजी से फैल रहा है।
मधुमेह एक दीर्घकालिक बीमारी है जो तब उत्पन्न होती है जब अग्न्याशय पर्याप्त इंसुलिन नहीं बनाता या शरीर उसकी कार्यक्षमता का सही उपयोग नहीं कर पाता। इससे ग्लूकोज लंबे समय तक रक्त में बना रहता है और हाइपरग्लाइसेमिया जैसी स्थिति पैदा होती है। समय पर उपचार न मिलने पर यह तंत्रिका तंत्र और रक्त वाहिकाओं को क्षति पहुंचा सकती है।
मधुमेह के बढ़ते मामलों को देखते हुए जागरूकता और रोकथाम अत्यंत आवश्यक है। इस वर्ष विश्व मधुमेह दिवस की थीम ‘ब्रेकिंग बैरियर्स, ब्रिजिंग गैप्स’ मधुमेह देखभाल में मौजूद बाधाओं को हटाने और सभी रोगियों को किफायती, उच्च गुणवत्ता वाले उपचार तक समान पहुंच सुनिश्चित करने पर बल देती है। विश्वभर में आयोजित कार्यक्रम, जागरूकता अभियान और सामुदायिक गतिविधियाँ लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और बीमारी को प्रारंभिक अवस्था में पहचानने के लिए प्रेरित करती हैं।
स्वस्थ आहार, नियमित व्यायाम, संतुलित वजन और तंबाकू से दूरी—ये सभी टाइप-2 मधुमेह की शुरुआत को रोकने या देर करने में सहायक हैं। सही आहार, दवा, नियमित जांच और जटिलताओं के समय पर उपचार से मधुमेह को नियंत्रित किया जा सकता है।
भारत सरकार भी मधुमेह रोकथाम के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। एनपी-एनसीडी और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के माध्यम से राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों को तकनीकी और वित्तीय सहायता दी जाती है। देशभर में 743 जिला एनसीडी क्लिनिक और 6,237 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एनसीडी क्लिनिक स्थापित किए गए हैं, जो स्थानीय स्तर पर जांच और उपचार की सुविधाएँ उपलब्ध कराते हैं।
इसके अलावा, 30 वर्ष से अधिक आयु की जनसंख्या के लिए मधुमेह, उच्च रक्तचाप और सामान्य कैंसर की स्क्रीनिंग की व्यापक योजना लागू की गई है, जो आयुष्मान भारत–स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों के माध्यम से संचालित होती है। इन केंद्रों में न केवल जांच बल्कि जागरूकता, परामर्श और समय पर उपचार की सुविधाएं भी उपलब्ध हैं, जिससे मधुमेह सहित अन्य गैर-संचारी रोगों की रोकथाम को मजबूत किया जा सके।
मधुमेह आज दुनिया के सामने खड़ा सबसे बड़ा स्वास्थ्य संकट है, लेकिन जागरूकता, जीवनशैली में सुधार और समय पर चिकित्सा से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। सामूहिक प्रयास ही इस बढ़ती चुनौती पर विजय पाने का एकमात्र मार्ग है।



























