उत्तराखण्ड में चुनाव से पहले कांग्रेस के बागियों को गले लगाने की तैयारी शुरू

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  • मगर सतपाल महाराज जैसे दिग्गज को मुख्यमंत्री बनाये जाने के लायक भाजपा का बफादार नहीं माना गया।
  • पुराने नेताओं की वापसी के लिये समिति का गठन किया जाना भाजपा में उमेश शर्मा काऊ तथा कैबिनेट मंत्री के ताजा बयानों के आलोक में देखा जा सकता है
  • हरक सिंह रावत को मुख्यमंत्री बनाना तो रहा दूर त्रिवेन्द्र सिंह रावत द्वारा अपमानित किया जाता रहा

उत्तराखण्ड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गणेश गोदियाल द्वारा पूर्व में विभिन्न कारणों से पार्टी से निष्कासित कांग्रेसजनों की पार्टी में वापसी पर विचार हेतु वरिष्ठ नेता हरीश कुमार सिंह की अध्यक्षता में 4 सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। प्रदेश महामंत्री गोविन्द सिंह बिष्ट, प्रदेश सचिव शांन्ति प्रसाद भट्ट एवं विजय सिजवाली कमेटी के सदस्य हैं।

कांग्रेस में 18 मार्च 2016 को कैबिनेट मंत्री हरकसिंह रावत सहित 10 विधायकों ने विद्रोह कर दिया था। सवाल उठ रहा है कि क्या भाजपा में शामिल कांग्रेस के इन बागियों को भी वापस लेने का आधार तैयार किया जा रहा है? यद्यपि इस बारे में  नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह और पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस चुनाव संचालन समिति के मुखिया हरीश रावत के विरोधाभासी बयान चलते रहे हैं। ऐसा माना जाता है कि हरीश रावत विरोधी खेमा इन बागियों की वापसी के लिये जोर लगा रहा है ताकि हरीश रावत के उत्तराखण्ड कांग्रेस पर एकाधिकार को चुनौती दी जा सके। फिर भी कांग्रेस द्वारा निकाले गये पुराने नेताओं की वापसी के लिये समिति का गठन किया जाना भाजपा में उमेश शर्मा काऊ तथा कैबिनेट मंत्री के ताजा बयानों के आलोक में देखा जा सकता है। स्वयं हरक सिंह रावत पूर्व में कह चुके हैं कि राजनीति में कोई स्थाई शत्रु और स्थाई मित्र नहीं होता।

प्रदेश कांग्रेस महामंत्री संगठन मथुरादत्त जोशी के अनुसार  प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष श्री गणेश गोदियाल ने पूर्व में विभिन्न कारणों से पार्टी से निष्कासित कांग्रेसजनों के आवेदन पर विचार हेतु कमेटी का गठन करते हुए कमेटी को 15 दिन में अपनी आख्या प्रदेश कांग्रेस कमेटी को सौंपने के निर्देश दिये हैं। मथुरादत्त जोशी के अनुसार पार्टी में लम्बे समय तक संगठन की सेवा करने वाले लोगों जो कतिपय कारणों से पार्टी से निष्कासित किये गये हैं तथा उन्होंने किसी अन्य दल की सदस्यता नहीं ली है उनकी घर वापसी पर पार्टी स्तर पर विचार किया जायेगा। उन्होंने यह भी कहा कि कई वरिष्ठ कांग्रेसजनों जो पार्टी में लम्बे समय से रहे हैं ने प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल से व्यक्तिगत सम्पर्क कर पार्टी की सदस्यता ग्रहण करने की इच्छा व्यक्त की है ऐसे लोगों के आवेदनों पर कमेटी विचार करेगी तथा गुणदोष के आधार पर विस्तृत छानबीन के उपरान्त वरिष्ठ कांग्रेसजनों से विचार-विमर्श के उपरान्त प्रदेश नेतृत्व को सौंपेगी जिस पर अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व द्वारा लिया जायेगा।

गौरतलब है कि भाजपा ने कांग्रेस के इन इन सभी 10 बागियों को 2017 के चुनाव में टिकट दे दिये थे जिनमें से शैला रानी रावत और डा0 शैलेन्द्र मोहन सिंघल चुनाव हार गये थे जबकि श्रीमती अमृता रावत स्वयं ही चुनाव नहीं लड़ीं थीं। उनके स्थान पर उनके पति सतपाल महाराज को चौबटाखाल से टिकट दिया गया था। इन पुराने कांग्रेसियों में से भी सतपाल महाराज, हरकसिंह रावत, यशपाल आर्य, सुबोध उनियाल और रेखा आर्य को मंत्रिमण्डल में तो ले लिया गया मगर सतपाल महाराज जैसे दिग्गज को मुख्यमंत्री बनाये जाने के लायक भाजपा का बफादार नहीं माना गया। यही नहीं उन्हें कई बार त्रिवेन्द्र सरकार में अपमानित होना पड़ा है। एक नौसिखिये पुष्कर धामी के अधीन उन्हें मंत्री के तौर पा रखा जाना भी उनकी शान में गुस्ताखी जैसा ही है। हरक सिंह रावत भी उत्तर प्रदेश के जमाने से मंत्री हैं और राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रह चुके हैं। उन्हें भी मुख्यमंत्री बनाना तो रहा दूर त्रिवेन्द्र सिंह रावत द्वारा अपमानित किया जाता रहा । इसी प्रकार यशपाल आर्य के राजनीतिक कद और अनुभव को भी पूरा सम्मान नहीं मिल सका। ये सभी पुराने कांग्रेसी भाजपा में घुट रहे हैं। मूल भाजपाई अब भी इन पर भरोसा नहीं करते। लेकिन हरीश रावत को इनकी कांग्रेस में वापसी के लिये सबसे बड़ा रोड़ा माना जा रहा है। वजह यह कि हरीश रावत मार्च 2016 के उस विद्रोह को नहीं भूल पा रहे हैं। उस समय इन बागियों ने तो हरीश की सरकार लगभग गिरा ही दी थी अगर हाइकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट बीच में न आते। इतिहास में पहली बार अदालत ने राष्ट्रपति शासन को असंवैधानिक तरीके से लागू किया गया माना था और स्वयं अपनी देखरेख में प्रदेश विधानसभा में हरीश रावत का शक्ति परीक्षण कराया था। उस समय विधानसभा अध्यक्ष हरीश गुट के गाविन्द सिंह कुंजवाल थे, इसलिये भी सरकार बच गयी थी और बागी विधायकों का खेल पर पानी फिर गया था। जिस कारण हरीश रावत सरकार बच गयी। यही नहीं इन बागियों ने स्टिंग आपरेशन करा कर हरीश रावत को फंसा दिया था जिसका केस अब भी अदालत में चल रहा है। हरीश रावत के ये अत्यंत कड़ुवे घूंट इन बागियों की वापसी में आड़े आ सकते हैं।

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