टॉक्सिकोलॉजी रिपोर्ट केवल दस्तावेज़ नहीं,बल्कि न्याय के लिए स्ट्रांग आधार
तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ पैरामेडिकल साइंसेज़ में फॉरेंसिक साइंस विभाग के गेस्ट लेक्चर में प्रतिष्ठित फोरेंसिक टॉक्सिकोलॉजिस्ट प्रो.आरके सरीन ने की शिरकत
मुरादाबाद, 1 जनवरी। राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान यूनिवर्सिटी, दिल्ली कैंपस के प्रोफेसर और प्रतिष्ठित फोरेंसिक टॉक्सिकोलॉजिस्ट प्रो. आरके सरीन ने फोरेंसिक विशेषज्ञों की नैतिक जिम्मेदारियों पर बल देते हुए कहा, टॉक्सिकोलॉजी रिपोर्ट सिर्फ एक दस्तावेज़ नहीं, बल्कि न्याय का स्ट्रांग आधार होती है। एक छोटी सी चूक, लापरवाही या पक्षपात पूरे केस को गलत दिशा में ले जा सकता है। प्रो. सरीन बोले, एक फोरेंसिक वैज्ञानिक को हमेशा निष्पक्ष, सावधान, वैज्ञानिक साक्ष्यों और नैतिकता के उच्चतम मानकों का पालन करने वाला होना चाहिए, क्योंकि उनकी रिपोर्टें न्यायालयों में निर्णायक मानी जाती हैं। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया, विशेषज्ञ गवाह के रूप में अदालत में प्रस्तुत होना केवल ज्ञान का नहीं, बल्कि सत्यनिष्ठा और जिम्मेदारी का भी परीक्षण होता है। प्रो. सरीन तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के कॉलेज ऑफ पैरामेडिकल साइंसेज़ के फॉरेंसिक साइंस विभाग की ओर से अपराध जांच और न्यायिक प्रक्रियाओं में फोरेंसिक टॉक्सिकोलॉजी की भूमिका पर आयोजित गेस्ट लेक्चर में बतौर मुख्य वक्ता बोल रहे थे।
इससे पूर्व मुख्य वक्ता प्रो. सरीन के संग पैरामेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. नवनीत कुमार, एमएलटी की एचओडी डॉ. रूचि कांत, फॉरेंसिक के एचओडी श्री रवि कुमार आदि ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्जवलित करके गेस्ट लेक्चर का शुभारम्भ किया। इस मौके पर मुख्य वक्ता को पौधा भेंट करके स्वागत, जबकि स्मृति-चिह्न देकर सम्मानित किया गया। डॉ. सरीन ने टॉक्सिकोलॉजी के विविध पहलुओं समझाते हुए बताया, फोरेंसिक टॉक्सिकोलॉजी केवल विषाक्त पदार्थों की पहचान मात्र नहीं है, बल्कि अपराध जांच, मृत्यु के कारणों की व्याख्या, न्यायिक प्रक्रियाओं में वैज्ञानिक साक्ष्य की प्रस्तुति और केस के पुनर्निर्माण में इसकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। टॉक्सिकोलॉजिकल साक्ष्य किसी आपराधिक मामले को नई दिशा प्रदान कर सकते हैं। कई मामलों में विष के प्रकार, मात्रा, अवशोषण की अवधि, मेटाबोलिज़्म और शरीर पर उसके प्रभाव की वैज्ञानिक व्याख्या, मृत्यु के समय और कारण के निर्धारण में निर्णायक भूमिका निभाती है। उन्होंने विविध केसों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया, कभी-कभी मामूली प्रतीत होने वाले रासायनिक अवशेष या शरीर के द्रवों में पाए गए सूक्ष्म घटक भी अपराध का पूरा घटनाक्रम उजागर करने में सक्षम होते हैं। अंत में छात्रों ने विष विश्लेषण, विषों के शरीर में वितरण, लैब में प्रयोग किए जाने वाले प्रोटोकॉल, रिपोर्ट व्याख्या और विशेषज्ञ गवाही की प्रक्रिया से संबंधित सवाल पूछे। गेस्ट लेक्चर के दौरान समन्वयक श्री योगेश कुमार, फैकल्टीज़- सुश्री अंशिका श्रीवास्तव, सुश्री जयश्री, श्री अजय प्रताप सिंह के संग-संग फॉरेंसिक के छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
