भारत में चेचक, पोलियो और टेटनस का हुआ उन्मूलन
मुख्य बिंदु
- भारत ने टीकाकरण के माध्यम से चेचक, पोलियो तथा माताओं और नवजात शिशुओं में टेटनस का उन्मूलन किया है और अपने टीकाकरण कार्यक्रम का विस्तार जारी रखा है। इसके अंतर्गत हाल ही में 2026 में एचपीवी और स्वदेशी टीडी टीके लॉन्च किए गए हैं।
- सबके लिए टीकाकरण (यूआईपी) विश्व के सबसे बड़े टीकाकरण कार्यक्रमों में से एक है जो प्रति वर्ष 2.9 करोड़ गर्भवती महिलाओं और 2.54 करोड़ नवजात शिशुओं के लिए निःशुल्क है।
- पूर्ण टीकाकरण कवरेज जो 2015 में 62 प्रतिशत था वह बढ़कर जनवरी 2026 में 98.4 प्रतिशत हो गया है।
- कुल जनसंख्या में ऐसे बच्चों का प्रतिशत 2023 के 0.11 प्रतिशत से घटकर 2024 में 0.06 प्रतिशत हो गया जिन्हें टीके की खुराक नहीं मिली।

-A PIB Feature-
टीके लगाकर और इसके माध्यम से बीमारियों के संपर्क में आने के जोखिम को घटाकर प्रति वर्ष करोड़ों लोगों की जान बचाई जाती है। यह बीमारियों से बचाव के लिए लोगों में प्राकृतिक सुरक्षा तंत्र का निर्माण करते हैं। भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार पर टीकों का जबरदस्त प्रभाव पड़ा है। भारत में पोलियो के अतिरिक्त टीकों ने चेचक, याव्स तथा माताओं और नवजात शिशुओं में टेटनस का उन्मूलन कर दिया है। उनके उपयोग ने बाल मृत्यु दर, खसरा-रूबेला और तपेदिक को घटा दिया है। कोविड-19 के दौरान विश्व की फार्मेसी के रूप में भारत ने 200 करोड़ से अधिक कोविड-19 वैक्सीन की खुराक की आपूर्ति की जिसमें भारत में निर्मित और स्वदेशी रूप से विकसित तथा लाइसेंस प्राप्त टीके शामिल हैं। 2026 में भारत सरकार ने सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए 14 वर्ष की आयु की लड़कियों के लिए राष्ट्रव्यापी एचपीवी टीकाकरण अभियान और स्वदेश में निर्मित टेटनस-डिप्थीरिया (टीडी) टीका लगाने का कार्यक्रम शुरू किया।
भारत में चलाए जा रहे सशक्त सबके लिए टीकाकरण कार्यक्रम (यूआईपी), सार्वजनिक रूप से वित्त पोषित स्वास्थ्य केंद्रों, कर्मियों और कोल्ड-चेन अवसंरचना के व्यापक नेटवर्क तथा शक्तिशाली डिजिटल नेटवर्क के सार्थक परिणाम मिले हैं।
भारत में पूर्ण टीकाकरण कवरेज 2015 में 62 प्रतिशत था जो जनवरी 2026 तक बढ़कर 98.4 प्रतिशत हो गया है। देश की कुल जनसंख्या में ऐसे बच्चों का प्रतिशत 2023 के 0.11 प्रतिशत से घटकर 2024 में 0.06 प्रतिशत हो गया है जिन्हें टीके की खुराक नहीं लगी। भारत में टीकाकरण को प्राथमिकता देने का लंबा इतिहास रहा है और देश में सबके लिए टीकाकरण कार्यक्रम के माध्यम से सार्वजनिक स्वास्थ्य को और बेहतर बनाने के लिए उच्च टीकाकरण दरों पर बल देना जारी रखा गया है।

भारत में प्रति वर्ष 16 मार्च को राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस 1995 में शुरू किए गए पल्स पोलियो कार्यक्रम के अंतर्गत नागरिकों को उसी वर्ष दी गई ओरल पोलियो टीके की पहली खुराक के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।
1995 में शुरू किए गए इस कार्यक्रम ने भारत में पोलियो का सफलतापूर्वक उन्मूलन कर दिया। भारत में इससे पीड़ित अंतिम रोगी 13 जनवरी, 2011 को पश्चिम बंगाल के हावड़ा में पाया गया था।
सबके लिए टीकाकरण कार्यक्रम
अपने बच्चों को पैदा होने पर माताएं रोगनिरोधी एंटीबॉडी प्रदान करती हैं। हालांकि, गर्भावस्था और स्तनपान के माध्यम से मां से बच्चे में स्थानांतरित होने वाले ये एंटीबॉडी केवल नवजात शिशु के जीवन के प्रारंभिक कुछ महीनों के लिए रोगों से बचाव और सुरक्षा प्रदान करते हैं।
शिशुओं और बच्चों को रोगाणुओं-कीटाणुओं और यहां तक कि जानलेवा बीमारियों से बचाने के लिए टीके महत्वपूर्ण हैं। बीमारियों के संपर्क में आने से पहले ही आदर्श रूप से जीवन के प्रारंभिक 12 से 18 महीनों के भीतर ही बच्चों को टीके देना सबसे अच्छा होता है।
1985 में शुरू किए गए और स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से चलाए जा रहे सबके लिए टीकाकरण कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों और गर्भवती महिलाओं को विभिन्न बीमारियों से बचाव के लिए निःशुल्क टीके लगाना है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत प्रति वर्ष लगभग 2.9 करोड़ गर्भवती महिलाओं और 2.54 करोड़ नवजात शिशुओं को टीके लगाए जाते हैं।
सबके लिए टीकाकरण कार्यक्रम (यूआईपी) के उद्देश्य हैं:
- टीकाकरण का दायरा बढ़ाना
- सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार करना
- स्वास्थ्य सुविधा स्तर के अनुरूप विश्वसनीय कोल्ड चेन प्रणाली की स्थापना
- प्रदर्शन की निगरानी
- वैक्सीन उत्पादन में आत्मनिर्भरता प्राप्त करना
सबके लिए टीकाकरण कार्यक्रम के अंतर्गत नवजात शिशुओं, बच्चों, किशोरों और गर्भवती महिलाओं को 12 बीमारियों से बचाव के लिए टीके लगाए जाते हैं। जापानी इन्सेफलाइटिस का टीका केवल विशेष क्षेत्रों में प्रभावित जिलों के लोगों को प्रदान किया जाता है और बाकी राष्ट्रीय स्तर पर लगाए जाते हैं।
पिछले एक दशक में इस कार्यक्रम में विभिन्न नए टीके जोड़े गए जिनमें शामिल हैं – निष्क्रिय पोलियो वैक्सीन (आईपीवी) (2015), रोटावायरस वैक्सीन (आरवीवी) (2016), खसरा-रूबेला (एमआर) वैक्सीन (2017) और न्यूमोकोकल कंजुगेट वैक्सीन (पीसीवी) (2017)। सबके लिए टीकाकरण कार्यक्रम के अंतर्गत दिए जाने वाले टीके हैं:
- बैसिलस कैलमेट-गुएरिन (बीसीजी)
- डिप्थीरिया, पर्टुसिस (काली खांसी) और टेटनस (डीपीटी)
- टेटनस और वयस्क डिप्थीरिया (टीडी)
- बाई वैलेंट ओरल पोलियो वैक्सीन (बीओपीवी)
- खसरा-रूबेला (एमआर) का टीका
- हेपेटाइटिस बी (हेप बी)
- पेंटावैलेंट – डीपीटी + हेपेटाइटिस बी + हीमोफिलस इन्फ्लुएंजा टाइप बी (डीपीटी + हेप बी + हिब)
- रोटावायरस वैक्सीन (आरवीवी)
- न्यूमोकोकल कंजुगेट वैक्सीन (पीसीवी)
- जापानी इंसेफलाइटिस (जेई) वैक्सीन
ये टीके जानलेवा बीमारियों से बचाते हैं।
| # | रोग | रोग का विवरण |
| 1 | क्षय रोग (बचपन में गंभीर रूप) | फेफड़ों को प्रभावित करने वाला जीवाणु संक्रमण, मस्तिष्क और कई अंगों में फैल सकता है |
| 2 | डिप्थीरिया | गले को प्रभावित करने वाला जीवाणु संक्रमण, हृदय और नसों को नुकसान पहुंचा सकता है |
| 3 | पर्टुसिस (काली खांसी) | अत्यधिक संक्रामक खांसी की बीमारी, शिशुओं के लिए खतरनाक |
| 4 | टेटनस | दूषित घावों से जीवाणु संक्रमण जिससे मांसपेशियों में अकड़न होती है |
| 5 | पोलियो | वायरल संक्रमण जो तंत्रिका तंत्र पर आक्रमण करता है, स्थायी पक्षाघात या मृत्यु का कारण बन सकता है |
| 6 | खसरा | अत्यधिक संक्रामक वायरल रोग, बुखार और दाने का कारण बनता है |
| 7 | रूबेला | बुखार और दाने के साथ हल्की वायरल बीमारी, खांसने और छींकने से फैलती है |
| 8 | हेपेटाइटिस बी | लीवर का वायरल संक्रमण जो पुराना हो सकता है और लीवर को नुकसान पहुंचा सकता है |
| 9 | मेनिनजाइटिस और निमोनिया (एचआईबी) | मेनिनजाइटिस – मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी के आसपास की झिल्लियों का संक्रमण और सूजन
निमोनिया – फेफड़ों का संक्रमण और सूजन |
| 10 | रोटावायरस डायरिया | वायरल संक्रमण के कारण शिशुओं में गंभीर दस्त |
| 11 | न्यूमोकोकल निमोनिया | फेफड़ों में जीवाणु संक्रमण के कारण बुखार और सांस लेने में कठिनाई होती है |
| 12 | जापानी इन्सेफलाइटिस | मच्छर जनित वायरल रोग पैदा करने वाली मस्तिष्क की सूजन |
राष्ट्रीय टीकाकरण सारणी
जानलेवा बीमारियों से सुरक्षा के लिए समय पर टीके लगवाना महत्वपूर्ण है। यहां गर्भवती महिलाओं, शिशुओं और बच्चों के लिए सबके लिए टीकाकरण (यूआईपी) के अंतर्गत निर्धारित सारणी दी गई है।
| गर्भवती महिलाएं |
| • टीडी -1: पहली एंटीनेटल विज़िट के दौरान जितनी जल्दी हो सके
• टीडी -2: पहले टीडी शॉट के 4 हफ़्ते बाद • टीडी -बूस्टर: अगर पिछले 3 सालों में पिछली प्रेग्नेंसी में दो टीडी डोज़ पहले ही लग चुकी हों • सभी डोज़ आमतौर पर 36 हफ़्ते से पहले दी जाती हैं — लेकिन लेबर के दौरान भी, अगर छूट जाए तो भी दी जाती हैं |
| शिशु और बच्चे |
जन्म के समय –
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पहले जन्मदिन तक –
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दूसरे जन्मदिन तक –
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पांचवें जन्मदिन के बाद –
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हाल ही में लॉन्च किए गए टीके और कार्यक्रम
इस विस्तार का सबसे ताज़ा अध्याय सबसे महत्वाकांक्षी भी है — इसमें 2026 की शुरूआत में हुए दो ऐतिहासिक लॉन्च शामिल हैं जो सबके लिए टीकाकरण कार्यक्रम की पहुंच का विस्तार करते हैं।
स्वदेशी टेटनस–डिप्थीरिया (टीडी) टीका लॉन्च (2026)
21 फरवरी 2026 को स्वदेशी रूप से निर्मित टेटनस और एडल्ट डिप्थीरिया (टीडी) टीका लॉन्च किया गया था। इस टीके का उत्पादन केंद्रीय अनुसंधान संस्थान (सीआरआई), कसौली में किया जाता है। अप्रैल 2026 तक सबके लिए टीकाकरण कार्यक्रम (यूआईपी) के लिए इस टीके की लगभग 55 लाख खुराक की आपूर्ति की जाएगी।
भारत की घरेलू टीका निर्माण क्षमता ही इस पूरी व्यवस्था का आधार है। भारत विश्व के सबसे बड़े टीका उत्पादक के तौर पर विश्व भर में टीके की लगभग 60% आपूर्ति करता है। वहीं, स्वदेशी रूप से निर्मित टीडी टीके को लॉन्च किया जाना इस क्षेत्र में देश की आत्मनिर्भरता की अभिव्यक्ति है।
राष्ट्रव्यापी एचपीवी टीकाकरण अभियान (2026)
28 फरवरी 2026 को राष्ट्रव्यापी ह्यूमन पैपिलोमावायरस (एचपीवी) टीकाकरण अभियान शुरू किया गया था। इस अभियान की शुरूआत प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने राजस्थान के अजमेर से की थी। इसका लक्ष्य 14 साल की लड़कियों को सर्वाइकल कैंसर से बचाना है। इसके अंतर्गत संपूर्ण भारत में लगभग 1.15 करोड़ लड़कियों को सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में मुफ्त टीका लगाए जाने की उम्मीद है।
मिशन इंद्रधनुष
सरकार ने 2015 में मिशन इंद्रधनुष कार्यक्रम शुरू किया जिसका लक्ष्य उन बच्चों और गर्भवती महिलाओं तक पहुंचना है जिनका टीकाकरण नहीं हुआ है या जिन्हें आंशिक रूप से टीका लगाया गया है। इसके बाद मंत्रालयों के बीच अधिक आपसी संपर्क के साथ गहन मिशन इंद्रधनुष मिशन (शहरी क्षेत्रों पर अधिक ध्यान देने के साथ) शुरु किया गया । इन मिशनों का उद्देश्य नियमित टीकाकरण सेवाओं को सशक्त बना कर और दुर्गम आबादी को लक्षित करके सबके लिए टीकाकरण अभियान के अंतर्गत 90 प्रतिशत से अधिक पूर्ण टीकाकरण कवरेज प्राप्त करना है।
2023 तक मिशन इंद्रधनुष के 12 चरण आयोजित किए जा चुके हैं जिसमें 765 जिलों में 5.46 करोड़ शिशुओं और 1.32 करोड़ गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण किया गया।
यूआईपी के कार्यान्वयन में सहयोग के लिए बुनियादी ढांचा
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और कार्यकर्ता
टीके कहां लगाए जाते हैं?
यूआईपी टीके सभी लाभार्थियों को प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों (पीएचसी), सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों और सरकारी अस्पतालों जैसे निर्धारित स्थलों पर, उप-केन्द्रों पर और आंगनवाड़ी केन्द्रों अथवा गांवों के भीतर अन्य चिन्हित स्थानों पर आयोजित आउटरीच सत्रों के माध्यम से निशुल्क लगाए जाते हैं। वर्ष 2005 से यूआईपी राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत है। इस मिशन के अंतर्गत शहरी मलिन बस्तियों में भी यूआईपी को लागू किया गया है।
अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य कार्यकर्ता – आशा (मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता), आंगनवाड़ी कार्यकर्ता (एडब्ल्यूडब्ल्यू) और लिंक कार्यकर्ता – लाभार्थियों को टीकाकरण के सत्र स्थलों पर लाने और यह सुनिश्चित करने में केंद्रीय भूमिका निभाते हैं कि कोई भी बच्चा या गर्भवती महिला छूट न जाए।
आदर्श टीकाकरण केंद्र
भारत सरकार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आदर्श टीकाकरण केंद्र स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करती है। वे उत्तर प्रदेश, बिहार और चंडीगढ़ और लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेशों में पहले से ही काम कर रहे हैं।
कोल्ड–चेन नेटवर्क
टीके जब तक निर्मित होते हैं तब से टीकाकरण के क्षण तक उन्हें लगातार सीमित तापमान सीमा के भीतर रखा जाना चाहिए। बहुत अधिक या बहुत कम तापमान टीके की शक्ति (बीमारी से बचाने की क्षमता) के क्षय का कारण बन सकता है और एक बार क्षय हो जाने के बाद उस शक्ति को पुनः प्राप्त या बहाल नहीं किया जा सकता है। इन निर्धारित शर्तों में टीकों के भंडारण और परिवहन की प्रणाली को कोल्ड चेन सिस्टम कहा जाता है। यह व्यापक वैक्सीन आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा है जिसे टीकाकरण कवरेज और पहुंच सुनिश्चित करने के लिए निर्बाध और कुशल होना चाहिए।
भारत की वैक्सीन कोल्ड चेन विश्व में सबसे बड़ी ऐसी शृंखलाओं में से एक है- यह राष्ट्रीय स्तर पर सरकारी चिकित्सा आपूर्ति डिपो से लेकर जिलों में निम्न स्तरों पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक, लगभग 30,000 कोल्ड चेन पॉइंट्स के रूप में फैली हुई है। अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं में यह भंडारण व्यवस्था 1.06 लाख से अधिक आइस–लाइन रेफ्रिजरेटर और डीप फ्रीजर और टीके के थोक भंडारण के लिए 432 वॉक–इन कूलर और वॉक–इन फ्रीजर से सुसज्जित हैं। इस नेटवर्क में यह सुनिश्चित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है कि वार्षिक 1.3 करोड़ से अधिक टीकाकरण सत्रों का आयोजन करने के दौरान प्रत्येक बिंदु पर तापमान में बदलाव या उतार-चढ़ाव न हो ताकि टीके उपयुक्त स्थिति में अंतिम लाभार्थी तक पहुंचें।
इस विशाल बुनियादी ढांचे को डिजिटल और सशक्त बनाने के लिए स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय मजबूत आईटी बुनियादी ढांचे और प्रशिक्षित पेशेवरों से लैस एक अत्याधुनिक सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म इलेक्ट्रॉनिक वैक्सीन इंटेलिजेंस नेटवर्क (ईवीआईएन) का उपयोग करता है जो देश भर में कई स्थानों पर वास्तविक समय में टीके के भंडार के स्तर और भंडारण के तापमान पर नज़र रखता है। ईवीआईएन ने देश भर में सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में विस्तार किया है। यह प्लेटफ़ॉर्म कोविड -19 महामारी के दौरान महत्वपूर्ण साबित हुआ जिससे कम समय में रिकॉर्ड संख्या में लोगों का टीकाकरण संभव हो सका।
डिजिटल पहल
भारत की टीकाकरण प्रबंधन प्रणाली को पंजीकरण, टीका लगवाने के लिए समय लेने और तय करने, वैक्सीन ट्रैकिंग और वास्तविक समय में निगरानी के लिए उपयुक्त प्लेटफॉर्म के साथ सशक्त डिजिटल अनुकूल परिवेश के माध्यम से उन्नत किया गया है।
यू–विन
यू-विन एक डिजिटल प्लेटफॉर्म और ऐप है जो लोगों को उनके निवास के पास टीकाकरण केंद्र की तलाश करने, स्वास्थ्य सुविधाओं में टीकाकरण के लिए समय निर्धारण के प्रबंधन और टीकाकरण का रिकॉर्ड बरकरार रखने में मदद करता है।
इसमें एक उपयोगकर्ता एक मोबाइल नंबर पर अधिकतम 10 लोगों का पंजीकरण कर सकता है, जिसमें नागरिक/अभिभावक, गर्भवती महिलाएं, शिशु (0-1 वर्ष), बच्चे (1-7 वर्ष) और किशोर (7-19 वर्ष) शामिल हैं। यू-विन को अक्टूबर 2024 में लॉन्च किया गया था और यह अंग्रेजी सहित 12 भाषाओं में उपलब्ध है।
कोविन
यू-विन की तरह कोविन स्वास्थ्य और अन्य केंद्रों पर कोविड-19 टीकाकरण पंजीकरण और टीके लगवाने के लिए समय लेने तथा रिकॉर्ड के प्रबंधन के लिए बनाया गया डिजिटल प्लेटफॉर्म है। इसे 16 जनवरी 2021 को लॉन्च किया गया था और तब से इसके माध्यम से टीकों की 220 करोड़ से अधिक खुराक दी जा चुकी हैं जिनमें से केवल 56.28 लाख कोविन के माध्यम से नहीं दी गई हैं।
प्रभाव
भारत में शिशु और गर्भवती महिलाओं की उत्तरजीविता दर में हुए व्यापक लाभ के पीछे पोषण, स्वच्छता, मातृ देखभाल और स्वास्थ्य देखभाल पहुंच में सुधार जैसे कई कारकों के साथ–साथ टीकाकरण भी एक है। बेहतर पोषित, बेहतर टीकाकरण वाली महिलाओं को गर्भावस्था और प्रसव के दौरान कम खतरे का सामना करना पड़ता है जबकि टीके देने वाली मजबूत स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली भी कुशल जन्म परिचारकों और आपातकालीन प्रसूति देखभाल तक पहुंच का विस्तार करती है जिससे मातृ मृत्यु दर कम हो जाती है।
नए टीके – रोटावायरस, पीसीवी, और खसरा–रूबेला – ने सीधे बाल मृत्यु के प्रमुख संक्रामक कारणों को लक्षित किया है। देश की जनसंख्या के मुकाबले उन बच्चों का प्रतिशत 2023 में 0.11प्रतिशत से घटकर 2024 में 0.06 प्रतिशत हो गया है जिन्हें टीके की एक भी खुराक नहीं लगी– इस उपलब्धि को बाल मृत्यु दर अनुमान के लिए संयुक्त राष्ट्र के अंतर–एजेंसी समूह (2024) ने स्वीकार किया है और भारत को बाल स्वास्थ्य में वैश्विक उदाहरण के रूप में स्थापित किया है।
टीकाकरण अभियान सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा से कहीं अधिक परिवारों पर बीमारी के वित्तीय बोझ को कम करते हैं, बच्चों को स्वस्थ रखते हैं और उन्हें पूर्ण, अधिक सार्थक जीवन जीने की अनुमति देते हैं। ये लाभ पीढ़ियों तक फैले हुए हैं: एक स्वस्थ बच्चा एक स्वस्थ वयस्क बन जाता है और एक स्वस्थ जनसंख्या कार्यबल में अधिक उत्पादक योगदान देती है जिससे व्यापक सामाजिक और आर्थिक प्रगति होती है।
निष्कर्ष
1977 में चेचक उन्मूलन से लेकर पोलियो और नवजात शिशुओं में टेटनस को खत्म करने, 200 करोड़ कोविड-19 खुराक देने और अब खसरा–रूबेला उन्मूलन का प्रयास करने तक– भारत की टीकाकरण यात्रा नई-नई ऐतिहासिक उपलब्धियों में से एक है, यह बात प्रमाणित हो चुकी है।
