जोशीमठ महाविद्यालय में श्रीमाँ का 148वाँ जन्मोत्सव श्रद्धा व उल्लास के साथ मनाया गया

ज्योतिर्मठ, 25 फरवरी।राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय जोशीमठ के एडुसैट सभागार में आध्यात्मिक विभूति एवं श्रीअरविन्द आश्रम, पांडिचेरी की अधिष्ठात्री श्रीमाँ का 148वाँ जन्मोत्सव श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर श्रीमाताजी : जीवन और संदेश विषय पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया।
उल्लेखनीय है कि श्रीअरविन्द सोसाइटी, पांडिचेरी और राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय जोशीमठ के बीच शोध एवं भारतीय ज्ञान परंपरा के संवर्धन हेतु दस वर्षों के लिए एक अकादमिक समझौता (एमओयू) भी संपन्न हुआ है।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि एवं महाविद्यालय की प्राचार्य प्रोफेसर प्रीति कुमारी ने प्रोफेसर सत्यनारायण राव और डॉ. गोपालकृष्ण सेमवाल के साथ श्रीमाँ के चित्र पर दीप प्रज्वलित कर किया। इतिहासकार डॉ. रणजीत सिंह मर्तोलिया ने श्रीमाँ का संक्षिप्त एवं सारगर्भित जीवन परिचय प्रस्तुत किया। राजनैतिक विश्लेषक डॉ. राजेन्द्र सिंह राणा ने श्रीअरविन्द के आध्यात्मिक दर्शन को समाज के धरातल पर उतारने में श्रीमाँ की भूमिका पर उपयोगी व्याख्यान दिया।
बीज व्याख्यान में डॉ. चरणसिंह केदारखंडी ने कहा कि ज्ञान और कला की भूमि फ्रांस में 21 फरवरी 1878 को जन्मीं श्रीमाँ जन्मजात सिद्ध योगिनी थीं। उन्होंने बीसवीं सदी के दूसरे दशक से लेकर 1973 तक अपनी तपस्या और तितिक्षा से श्रीअरविन्द के योगकर्म को जीवन का प्रत्येक क्षण समर्पित किया। उनके मार्गदर्शन में श्रीअरविन्द आश्रम, श्रीअरविन्द सोसाइटी, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक पत्रिका ‘आर्य’, श्रीअरविन्द अंतरराष्ट्रीय शिक्षा केंद्र तथा ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के आदर्श पर आधारित ऑरोविल जैसी संस्थाओं की स्थापना हुई। उन्होंने कहा कि युवा शक्ति, नारी शक्ति, जीवन प्रबंधन, भारत की आध्यात्मिक नियति, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे विषयों पर श्रीमाँ के विचार आज भी अत्यंत प्रासंगिक हैं।
मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए प्राचार्य प्रोफेसर प्रीति कुमारी ने कहा कि श्रीमाँ जैसी विभूति का जन्म सदियों में एक बार होता है। आतंकवाद, युद्ध, शरणार्थी संकट और बढ़ती कट्टरता के इस अंधकारमय दौर में श्रीमाँ का जीवन और योग मानवता, प्रेम और समन्वय के उजाले की आशा है। उन्होंने यह भी बताया कि 21 फरवरी को उनका स्वयं का जन्मदिन भी है, जिससे यह अवसर उनके लिए विशेष रूप से स्मरणीय बन गया।
डॉ. नवीन पंत के कुशल मंच संचालन में आयोजित इस विचार गोष्ठी में महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापक, कर्मचारी, छात्रसंघ पदाधिकारी तथा छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। इस अवसर पर सभी ने प्राचार्य प्रोफेसर प्रीति कुमारी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए उनके नेतृत्व में महाविद्यालय के निरंतर प्रगति पथ पर अग्रसर रहने की मंगलकामना की।
