धरती का बढ़ता बुखार: कोपर्निकस रिपोर्ट ने 2025 की भयावह सच्चाई उजागर की

According to the latest data from the European Union’s Copernicus Climate Change Service (C3S), 2025 ranks as the third warmest year in recorded history, trailing only 2024 (the hottest) and 2023 by a slim margin. The past 11 years (2015–2025) have been the 11 warmest on record, underscoring the rapid pace of climate change. In 2025, according to ERA5 , the global surface air temperature was 1.47°C above the pre-industrial level, following 1.60°C in 2024, the warmest year on record. Utilising several methods, the current level of long-term global warming is estimated to be around 1.4°C above the pre-industrial level. Based on the current rate of warming, the Paris Agreement’s limit of 1.5°C for long-term global warming could be reached by the end of this decade – over a decade earlier than predicted based on the rate of warming at the time the agreement was signed.

—जयसिंह रावत
यूरोपीय संघ की कोपर्निकस क्लाइमेट चेंज सर्विस (C3S) की नवीनतम रिपोर्ट ने एक बार फिर दुनिया को सचेत किया है कि जलवायु परिवर्तन अब भविष्य की आशंका नहीं, बल्कि वर्तमान की कठोर सच्चाई बन चुका है। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 वैश्विक तापमान के लिहाज से अब तक का तीसरा सबसे गर्म वर्ष दर्ज किया गया है। इससे पहले केवल 2024 और 2023 ही इससे अधिक गर्म रहे। खास बात यह है कि 2015 से 2025 तक के लगातार 11 वर्ष तापमान के रिकॉर्ड में सबसे गर्म रहे हैं, जो जलवायु परिवर्तन की तेज़ होती रफ्तार को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
तापमान के खतरनाक संकेत
कोपर्निकस के आंकड़ों के मुताबिक 2025 में वैश्विक औसत सतही वायु तापमान पूर्व-औद्योगिक काल (1850-1900) की तुलना में 1.47 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा। यह अंतर बेहद चिंताजनक है क्योंकि 2023, 2024 और 2025—इन तीन वर्षों का औसत तापमान पहली बार 1.5 डिग्री सेल्सियस की सीमा को पार कर गया है। पेरिस जलवायु समझौते में जिस सीमा को दीर्घकालिक खतरे की रेखा माना गया था, उसका इतने कम समय में पार हो जाना स्पष्ट चेतावनी है। वैज्ञानिकों का आकलन है कि यदि वर्तमान प्रवृत्ति जारी रही तो इस दशक के अंत तक वैश्विक तापमान स्थायी रूप से 1.5 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला जाएगा, जो पहले के अनुमानों से लगभग एक दशक पहले है।
क्षेत्रीय स्तर पर दिखते प्रभाव
वैश्विक औसत के साथ-साथ क्षेत्रीय स्तर पर भी तापमान के गंभीर प्रभाव सामने आए हैं। अंटार्कटिका में अब तक का सबसे गर्म वार्षिक तापमान दर्ज किया गया, जबकि आर्कटिक क्षेत्र के लिए 2025 दूसरा सबसे गर्म वर्ष रहा। उत्तरी-पश्चिमी और दक्षिण-पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र, उत्तर-पूर्वी अटलांटिक, पूर्वी और उत्तर-पश्चिमी यूरोप तथा मध्य एशिया में रिकॉर्ड स्तर की गर्मी देखी गई। इसके विपरीत उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में तापमान 2023 और 2024 की तुलना में कुछ कम रहा। इसका प्रमुख कारण ENSO की तटस्थ स्थिति या कमजोर ला नीना रहा, क्योंकि एल नीनो की अनुपस्थिति ने अस्थायी रूप से तापमान वृद्धि को थोड़ा थाम लिया। हालांकि, ग्रीनहाउस गैसों के लगातार बढ़ते स्तर ने समग्र गर्मी को बनाए रखा।
गर्मी के पीछे के कारण
विशेषज्ञों के अनुसार इस अभूतपूर्व गर्मी के पीछे कई कारण एक साथ काम कर रहे हैं। सबसे प्रमुख कारण ग्रीनहाउस गैसों का निरंतर संचय है, जो न केवल उत्सर्जन में कमी न होने का परिणाम है, बल्कि प्राकृतिक कार्बन सिंकों की घटती क्षमता को भी दर्शाता है। इसके अलावा समुद्री सतह के तापमान में असाधारण वृद्धि ने वैश्विक जलवायु तंत्र को और अस्थिर किया है। वायुमंडल में एरोसोल की मात्रा में बदलाव, बादलों की कम उपस्थिति और वायुमंडलीय परिसंचरण के पैटर्न भी इस गर्मी को और तीव्र बनाने में भूमिका निभा रहे हैं।
वैज्ञानिक चेतावनी और नीति की ज़रूरत
ECMWF के निदेशक-जनरल फ्लोरियन पापेनबर्गर ने इस रिपोर्ट को यूरोप और पूरी दुनिया के लिए सबसे गर्म दशक की पुष्टि बताया है। उनके अनुसार कोपर्निकस कार्यक्रम में यूरोपीय आयोग का निवेश इसलिए महत्वपूर्ण है ताकि विश्व-स्तरीय विज्ञान के आधार पर सरकारें और समाज जलवायु परिवर्तन के अनुकूलन के लिए ठोस निर्णय ले सकें। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि हर वर्ष और हर डिग्री मायने रखती है।
ERA5 डेटासेट पर आधारित यह रिपोर्ट NASA, NOAA, UK Met Office, Berkeley Earth और WMO जैसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ समन्वय में तैयार की गई है। यह स्पष्ट करती है कि जलवायु परिवर्तन अब आंकड़ों में दर्ज चेतावनी बन चुका है। समय की मांग है कि वैश्विक स्तर पर उत्सर्जन में त्वरित और प्रभावी कटौती की जाए तथा बदलते मौसम के अनुरूप अनुकूलन की रणनीतियों को प्राथमिकता दी जाए, क्योंकि आने वाले वर्ष केवल आंकड़े नहीं, बल्कि मानव सभ्यता की दिशा तय करेंगे। ( लेखक इस न्यूज़ पोर्टल के संपादक मंडल के मानद सदस्य हैं-Admin )
