उत्तराखंड के 51 सीमांत गांवों में वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम ; बैठक में केंद्रीय गृह सचिव ने प्रगति की समीक्षा की

Select villages in blocks abutting the northern border in Kinnaur and Lahul & Spiti districts of Himachal Pradesh have been covered under VVP. Select villages in blocks abutting the northern border in Chamoli, Uttarkashi, and Rudraprayag districts have also been covered under VVP.

–By Usha Rawat-
देहरादून, 16 अक्टूबर । अपर मुख्य सचिव गृह श्रीमती राधा रतूड़ी ने वर्चुअल माध्यम से गृह सचिव भारत सरकार श्री अजय कुमार भल्ला की अध्यक्षता में भारत सरकार की अति महत्वपूर्ण योजना ‘‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’’ की समीक्षा बैठक में गृह सचिव ने उत्तराखण्ड राज्य को 51 सीमान्त ग्रामों का विलेज एक्शन प्लान अति शीघ्र बनाकर भारत सरकार को प्रेषित करने के निर्देश दिए हैं। इस बैठक में चार राज्यों तथा समस्त केन्द्रीय मंत्रालयों ने प्रतिभाग किया।
बैठक में अपर मुख्य सचिव गृह विभाग उत्तराखण्ड श्रीमती राधा रतूड़ी ने जानकारी दी कि विलेज एक्शन प्लान 23 अक्टूबर तक प्रेषित कर दिए जाएंगे। उन्होंने भारत सरकार से अनुरोध किया कि राज्य सरकार को भी वीवीपी (वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम) के पोर्टल को देखने का अधिकार दिया जाए ताकि शीघ्र अनुपालन हो सके। एसीएस ने आग्रह किया कि चीन सीमा पर स्थित ग्रामों से आईटीबीपी एवं आर्मी द्वारा लोकल प्रोक्योरमेंट किया जाए इससे आजीविका के साधन बढ़ेगें एवं पलायन को रोका जा सकेगा। उक्त अनुरोधों पर गृह सचिव भारत सरकार द्वारा राज्य सरकार को सकारात्मक आश्वासन दिया गया।
उत्तराखंड के सीमांत गांव में अब तक 51 गांवों का चिन्हीकरण किया गया है। यह 51 गांव उत्तराखंड के 3 जनपदों उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ से चिन्हित किए गए हैं। उत्तरकाशी के भटवाड़ी, चमोली के जोशीमठ और पिथौरागढ़ के मुनस्यारी, धारचूला कनालीछीना ब्लॉक में से गांवों को चिन्हित किया गया है।
उल्लेखनीय है कि वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत व्यापक विकास के लिए अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख की उत्तरी सीमा से सटे 19 जिलों के 46 ब्लॉकों में 2967 गांवो की पहचान की गई है। पहले चरण में प्राथमिकता के आधार पर 662 गांव की पहचान की गई है, जिनमें अरुणाचल प्रदेश के 455 गांव, हिमाचल प्रदेश के 75, लद्दाख के 35, सिक्किम के 46 और उत्तराखंड के 51 सीमावर्ती गांवों को शामिल किया गया है। उपयुक्त मुद्दों पर गत 7 अक्टूबर को केंद्रीय गृह मंत्री एवं मुख्यमंत्री की बैठक पर भी चर्चा की गई थी।
‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ को 15 फरवरी 2023 को मंजूरी दी गई थी, जिसमें वित्तीय वर्ष 2022-23 से लेकर वित्तीय वर्ष 2025-26 की अवधि के लिए 4800 करोड़ रुपये का केन्द्रीय योगदान शामिल था। इस केन्द्रीय योगदान में विशेष रूप से सड़क कनेक्टिविटी के लिए 2500 करोड़ रुपये के प्रावधान शामिल थे।इसमें सीमांत गांवों में पानी, बिजली, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार जैसी मूलभूत सुविधाओं के विस्तार और आजीविका विकास पर मुख्य रूप से जोर दिया गया है। राज्य की 675 किलोमीटर सीमा चीन और नेपाल से सटी है।
विदित है कि वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के अन्तर्गत भारत सरकार सीमावर्ती गांवों को सशक्त बनाने का काम कर रही है। इन गांवों में सरकार रोड कनेक्टिविटी, पेयजल, सौर और पवन ऊर्जा सहित बिजली, मोबाइल और इंटरनेट कनेक्टिविटी, पर्यटन केन्द्र, बहुउददेशीय केंद्र और स्वास्थ्य संबंधी बुनियादी ढांचा और स्वास्थ्य कल्याण केंद्रो से जोड़ना चाहती है। देश के पर्वतीय एवं सीमान्त राज्यों से इसकी शुरूआत की जा रही है।
