आईटीबीपी 8वीं वाहिनी ने धूमधाम से मनाया 64वां स्थापना दिवस

गौचर, 24 अक्टूबर (गुसाईं)।भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल (आईटीबीपी) की 8वीं वाहिनी ने बल का 64वां स्थापना दिवस हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया। इस अवसर पर वाहिनी के सेनानी विरेन्द्र सिंह रावत ने ध्वजारोहण किया, जिसके बाद बल की सैन्य टुकड़ी ने बल ध्वज को सलामी अर्पित की।
अपने संदेश में सेनानी रावत ने सभी अधिकारियों और जवानों को स्थापना दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल की स्थापना 24 अक्टूबर 1962 को भारत की उत्तरी सीमाओं की सुरक्षा एवं निगरानी को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से की गई थी। पिछले 63 वर्षों में आईटीबीपी ने अपनी कर्तव्यनिष्ठा, अनुशासन और पराक्रम के बल पर अनेक महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल की हैं। इसी समर्पण के कारण यह बल आज देश के प्रमुख अर्द्धसैनिक बलों में अग्रणी स्थान रखता है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में आईटीबीपी के जवान अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की सुरक्षा और देश की आंतरिक शांति बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। सीमांत क्षेत्रों में कठिन परिस्थितियों के बीच सतत् चौकसी के साथ ही आपदा और संकट के समय बचाव एवं राहत कार्यों में भी यह बल सदैव अग्रिम पंक्ति में खड़ा दिखाई देता है, जो हम सबके लिए गर्व का विषय है।
सेनानी रावत ने बताया कि 8वीं वाहिनी हिमालयी सीमाओं की सुरक्षा के साथ-साथ उत्तराखण्ड के महत्वपूर्ण धार्मिक और पर्यटन स्थलों पर आने वाले लाखों देश-विदेशी श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों की सुरक्षा का दायित्व भी सफलतापूर्वक निभा रही है। विशेष रूप से दुर्घटनाओं के समय बचाव व राहत कार्यों में इस वाहिनी ने उत्कृष्ट कार्य किया है, जो इसकी कुशलता और सेवा-भाव को दर्शाता है।
कार्यक्रम में वाहिनी के अधिकारी, जवान तथा उनके परिजन उपस्थित रहे।
