नागनाथ गढ़ी के राजराजेश्वरी मंदिर में चैत्र नवरात्र के नौ दिवसीय अनुष्ठान शुरू
पोखरी, 19 मार्च (राजेश्वरी राणा)। क्षेत्र की सुख-समृद्धि और रिद्धि-सिद्धि की कामना के साथ चैत्र नवरात्र के पावन अवसर पर क्षेत्र के देवी मंदिरों में गुरुवार से नौ दिवसीय अनुष्ठान विधिवत शुरू हो गए हैं। नागनाथ गढ़ी स्थित प्राचीन राजराजेश्वरी देवी मंदिर, ऊमा देवी मंदिर, दुख थंबेश्वरी देवी मंदिर तथा बगथल सहित विभिन्न देवी स्थलों पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।
मंदिरों को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। विद्वान ब्राह्मणों द्वारा विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर जौ बोकर हरियाली डाली गई तथा नौ दिवसीय पाठ का शुभारंभ किया गया। नागनाथ गढ़ी के राजराजेश्वरी मंदिर में देवस्थान और देवर गांव के ग्रामीणों ने आयोजन समिति के अध्यक्ष धीरेन्द्र सिंह रावत, कोषाध्यक्ष त्रिलोचन प्रसाद सती, उपाध्यक्ष जितेंद्र सती और सचिव शशि नेगी के नेतृत्व में अनुष्ठान का शुभारंभ किया।
मंदिर के पुजारी पंडित विनोद सती सहित विद्वान ब्राह्मणों ने मां भगवती की प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा कर उसे मंदिर में स्थापित किया। इसके बाद जौ बोकर हरियाली डाली गई। आगामी नौ दिनों तक देवी के नौ स्वरूपों की पूजा की जाएगी। दिन में विशेष पूजा-अर्चना और रात्रि में भजन-कीर्तन एवं जागरण का आयोजन होगा। अनुष्ठान का समापन 27 मार्च को किया जाएगा।
इस अवसर पर ग्रामीणों ने मां भगवती की डोली को गाजे-बाजे और जयकारों के साथ मंदिर तक पहुंचाया। दिनभर मंदिर परिसर भक्ति गीतों और जयकारों से गूंजता रहा। नागनाथ स्वामी मंदिर से करीब दो किलोमीटर की कठिन चढ़ाई पार कर श्रद्धालु गढ़ी स्थित मंदिर तक पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं के लिए ग्रामीणों द्वारा बिजली, पानी, टेंट तथा रहने-खाने की समुचित व्यवस्था की गई है।
समुद्र तल से लगभग 5500 फीट की ऊंचाई पर पुष्कर पर्वत पर स्थित यह मंदिर गढ़वाल की 52 गढ़ियों में नागपुर नागनाथ गढ़ी के रूप में प्रसिद्ध है। मान्यता है कि प्राचीन काल में यहां कत्यूरी राजवंश का शासन था और एक दुर्ग भी मौजूद था, जिसके अवशेष आज भी देखे जा सकते हैं। गोरखा आक्रमण के दौरान यह क्षेत्र प्रभावित हुआ, जिसके बाद लंबे समय तक यह स्थल उपेक्षित रहा। वर्तमान में वन विभाग के सहयोग से मंदिर का पुनर्निर्माण किया गया है।
मंदिर परिसर के चारों ओर प्राचीन दुर्ग के अवशेष, समतल भूमि और बांज-बुरांश के घने जंगल इसकी प्राकृतिक सुंदरता को और आकर्षक बनाते हैं। यहां से हिमालय की बर्फ से ढकी चोटियों, गौचर के मैदानी क्षेत्र और पोखरी बाजार का विहंगम दृश्य श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध करता है।
आयोजन समिति ने सभी श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर अनुष्ठान में भाग लेने और मां राजराजेश्वरी देवी का आशीर्वाद प्राप्त करने का आह्वान किया है।
