राजनीति

पंचायत चुनावों में धांधली का आरोप, राजयपाल से निर्वाचन आयुक्त को बर्खास्त करने की मांग

 

देहरादून, 17 अगस्त। उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस का एक वृहद प्रतिनिधिमंडल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष करण माहरा के नेतृत्व में मंगलवार को राजभवन पहुँचा और राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में संपन्न त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में हुई धांधलियों, हिंसा और सरकारी संरक्षण में सत्ताधारी दल द्वारा की गई कथित गुंडागर्दी की शिकायत की।

कांग्रेस नेताओं ने राज्यपाल को बताया कि पंचायत चुनावों में देरी कराई गई ताकि नगर निकायों के मतदाता भी इन चुनावों में शामिल हो सकें। साथ ही, जिला पंचायत सदस्य और क्षेत्र पंचायत सदस्य पदों के आरक्षण में नियमों की खुलेआम अनदेखी की गई। नैनीताल, बेतालघाट और रुद्रप्रयाग की घटनाओं का हवाला देते हुए कांग्रेस ने कहा कि चुनाव के दौरान अपहरण, गोलीबारी जैसी घटनाएँ हुईं और प्रशासन मूकदर्शक बना रहा।

पूर्व अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने आरोप लगाया कि जिला पंचायत अध्यक्ष पद के आरक्षण में नियमों की धज्जियां उड़ाई गईं। विधायक काज़ी निजामुद्दीन ने कहा कि राज्यपाल संवैधानिक संस्थाओं के संरक्षक हैं, इसलिए उन्हें सरकार को सख्त संदेश देना चाहिए। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने आरोप लगाया कि राज्य निर्वाचन आयोग सरकार की कठपुतली बनकर काम करता रहा। उन्होंने कहा कि आयोग ने पंचायती राज कानून के खिलाफ आदेश जारी किए और उच्च न्यायालय के निर्देशों तक की अवहेलना की।

प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष संगठन सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि विपक्ष जनता की अपेक्षाओं को लेकर राज्यपाल से मिलने आता है, लेकिन कई बार राजभवन सचिवालय प्रतिनिधिमंडल को समय देने में टालमटोल करता है, जो उचित नहीं है।

राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि वे उठाए गए मुद्दों पर गंभीरता से विचार करेंगे और सरकार को आवश्यक संदेश देंगे। साथ ही उन्होंने भरोसा दिलाया कि भविष्य में विपक्षी दलों के प्रतिनिधिमंडल को समय देने में कोई बाधा नहीं होगी।

प्रतिनिधिमंडल में करण माहरा के साथ पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, पूर्व अध्यक्ष प्रीतम सिंह, विधायक काज़ी निजामुद्दीन, ममता राकेश, विक्रम सिंह, फुरकान अहमद, रवि बहादुर, अनुपमा रावत, पूर्व विधायक राजकुमार, सूर्यकांत धस्माना, जिला पंचायत उपाध्यक्ष अभिषेक सिंह, ज्योति रौतेला, मदन लाल, अमरजीत सिंह और डॉ. जसविंदर सिंह गोगी शामिल रहे।

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