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छिपकली एवं सांप के प्राप्त जीवाश्म से उत्तरार्धकाल के मियोसीन होमिनिड इलाके की जलवायु का संकेत

 

. वरानस प्रजाति की कशेरुकाओं के दृश्य- अग्रभाग (ए, एफ, के, पी), पृष्ठभाग (बी, जी, एल, क्यू), पृष्ठीय (डोर्सल) (सी, एच, एम, आर), उदरभाग (वेंट्रल) (डी, आई, एन, एस), और पार्श्व (ई, जे, ओ, टी)। स्केल बार : 1 मिमी।

 

The overall Haritalyangar squamate fauna, which is dominated by both large and small semi-aquatic and terrestrial taxa, indicates a seasonally wet sub-humid to semi-arid climate in the area during the Late Miocene, 9.1 Ma. Moreover, the mean annual temperature must have been high in the region at that time (not less than 15–18.6°C, similar to the mean annual temperature in this area today), indicated by the occurrence of important thermophilic elements such as Varanus and Python.

  • BY -USHA RAWAT

हिमाचल प्रदेश के हरितल्यांगर में उत्तरार्धकाल के मियोसीन होमिनिड इलाके में 91 लाख वर्ष पुराने छिपकलियों और सांपों के जीवाश्म अवशेषों को खोजा गया है जो इस क्षेत्र में लगभग 15-18.6 डिग्री सेल्सियस के औसत वार्षिक तापमान के साथ क्षेत्र में एक मौसमी आर्द्र उप-शुष्क जलवायु का संकेत देते हैं। अब भी इस इलाके में कुछ ऐसा ही हाल है।

 

छिपकली और सांप ठंडे रक्त के शल्क-वाले सरीसृप (रेप्टाइल्स) अर्थात स्क्वामेट हैं जिनका क्षेत्र में वितरण, प्रचुरता और विविधता, तापमान एवं जलवायु जन्य परिस्थितियों पर अत्यधिक निर्भर है। इस कारण से, शल्क-वाले सरीसृप  (रेप्टाइल्स) अर्थात स्क्वामेट को व्यापक रूप से पिछली जलवायु, विशेष रूप से परिवेश के तापमान के उत्कृष्ट संकेतक के रूप में चिन्हित किया जाता है।

      Python sp. Trunk vertebra in anterior (A), posterior (B), dorsal (C), ventral (D) and lateral (E) views. Scale bar: 1 mm

विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी, भारत सरकार) के एक स्वायत्त संस्थान वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी (डब्ल्यूआईएचजी), देहरादून, पंजाब विश्वविद्यालय (पीयू) चंडीगढ़, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रोपड़ (आईआईटी रोपड़) रूपनगर, पंजाब और  ब्रातिस्लावा में कोमेनियस विश्वविद्यालय, स्लोवाकिया के शोधकर्ताओं के सहयोग से पहली बार इस क्षेत्र से टैक्सा– वरानस, पायथन, एक अहानिकर (कोलब्रिड) और एक नैट्रिकिड सर्प का दस्तावेजीकरण किया गया है।

 

हरितल्यांगर में टैक्सा वरानुस की उपस्थिति इसके पिछले जैव विविधता के संबंध में महत्वपूर्ण है क्योंकि एशिया में वैरनाइड्स का एक सीमित जीवाश्म रिकॉर्ड है। इसके अलावा, पाकिस्तान (तिथिक्रम लगभग 18 एमए) और कच्छ, गुजरात (तिथिक्रम लगभग 14-10 एमए) के शुरुआती रिकॉर्ड को छोड़कर, दक्षिण एशिया से जीवाश्म अजगर (पायथन) की उपलब्धि खराब बनी हुई है। दो प्रतिष्ठित स्क्वामेट्स- वरानस और पायथन के सह-अस्तित्व ने इस दक्षिणी एशियाई क्षेत्र में इस जीवशाखा (क्लैड) के व्यापक वितरण का पता चला है।

 

समग्र  हरितल्यांगर में व्याप्त शल्क-वाले सरीसृप (रेप्टाइल्स) अर्थात स्क्वामेट जीव, जिसमें बड़े और छोटे अर्ध-जलीय और स्थलीय टैक्सा दोनों का वर्चस्व है, मियोसीन उत्तरार्ध, 9.1 एमए के दौरान क्षेत्र में मौसमी रूप से आर्द्र उप-आर्द्र जलवायु का संकेत मिलता है। इसके अलावा, औसत वार्षिक तापमान भी उस समय इस क्षेत्र में उच्च रहा होगा (15-18.6 डिग्री सेल्सियस से कम नहीं था। आज भी इस क्षेत्र में औसत वार्षिक तापमान के समान), वरानस और अजगर जैसे महत्वपूर्ण थर्मोफिलिक तत्वों की बहुलता से यही संकेत मिलता है।

 

डॉ. निंगथौजम प्रेमजीत सिंह ने वाडिया इंस्टीटयूट ऑफ़ हिमालयन जियोलॉजी (डब्ल्यूआईएचजी) के  डॉ. रमेश कुमार सहगल और श्री अभिषेक प्रताप सिंह, पंजाब विश्वविद्यालय (पीयू) से डॉ. राजीव पटनायक, डॉ. केवल कृष्ण और शुभम दीप, आई.आई.टी. रोपड से डॉ. नवीन कुमार, श्री पीयूष उनियाल एवं श्री सरोज कुमार और कोमेनियस विश्वविद्यालय से डॉ. आंद्रेज सेरनस्की के साथ इस अध्ययन का नेतृत्व किया। इसे नवंबर 2022 में जियोबिओस जर्नल में प्रकाशित किया गया।

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