कुमाऊं में सेना और नागरिक प्रशासन का संयुक्त सम्मेलन, सीमांत क्षेत्रों के विकास व सुरक्षा पर जोर

धारचूला, 22 अगस्त। कुमाऊं क्षेत्र में सामरिक और नागरिक समन्वय को नई दिशा देते हुए भारतीय सेना ने 22 अगस्त 2025 को धारचूला में एक दिवसीय मिलिट्री-सिविल फ्यूजन सम्मेलन का आयोजन किया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों के समग्र विकास और सुरक्षा के लिए सभी संबंधित हितधारकों को एक साझा मंच पर लाना रहा।
सम्मेलन में भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ पिथौरागढ़, चंपावत और धारचूला जिलों के नागरिक प्रशासन, पुलिस, केंद्रीय सशस्त्र बलों तथा विभिन्न सरकारी एजेंसियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। यह सहभागिता विभिन्न विभागों के बीच सहयोग और आपसी समन्वय को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम रही।

कार्यक्रम के दौरान भारतीय सेना ने क्षेत्र में बुनियादी ढांचे, संचार नेटवर्क, कनेक्टिविटी और खुफिया सूचनाओं से जुड़ी चुनौतियों पर विस्तृत प्रस्तुति दी। इसके बाद आयोजित ओपन हाउस डिस्कशन में प्रतिभागियों ने मौजूदा समस्याओं की समीक्षा की और उनके व्यावहारिक व दीर्घकालिक समाधान सुझाए।
भारत सरकार के वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के अंतर्गत सीमा क्षेत्रों के विकास के प्रयासों पर भी विशेष चर्चा हुई। सड़क, रेल और हवाई संपर्क, संचार व्यवस्था में सुधार तथा सूचना-साझा प्रणाली को सुदृढ़ बनाने जैसे मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श किया गया।
सम्मेलन में यह स्पष्ट किया गया कि सेना और नागरिक प्रशासन के बीच नियमित संवाद और बेहतर समन्वय सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास और सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है। अधिकारियों ने इस पहल को सकारात्मक बताते हुए कहा कि इससे सभी एजेंसियों के बीच आपसी समझ और संयुक्त प्रयासों को नई दिशा मिलेगी।
अंत में, सभी प्रतिभागियों ने सम्मेलन में सामने आए सुझावों और सहयोग की भावना को व्यावहारिक कार्यों में बदलने की प्रतिबद्धता जताई, जिससे भविष्य में और अधिक समन्वित व ठोस कदम उठाए जा सकें।
