अब मौसम की भविष्यवाणी होगी और भी सटीक, एआई और नई तकनीक से बड़ा बदलाव आने वाला
By-Usha Rawat
नयी दिल्ली, 23 अगस्त। भारत में मौसम की जानकारी को ज्यादा सटीक और समय पर लोगों तक पहुँचाने के लिए “मिशन मौसम” नाम की नई योजना पर काम शुरू हो चुका है। यह योजना अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन इसके पूरी तरह लागू होने के बाद मौसम की भविष्यवाणी की सटीकता 5 से 10 प्रतिशत तक बढ़ जाएगी। इसका मतलब है कि आने वाले समय में बारिश, तूफान और अन्य मौसम संबंधी घटनाओं के बारे में लोगों को पहले से और ज्यादा भरोसेमंद जानकारी मिलेगी।
🌧️ 6 घंटे तक पहले मिलेगा सही अलर्ट
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) इस योजना के तहत मौसम की भविष्यवाणी के लिए आधुनिक उपकरण और तकनीक अपना रहा है। इसमें रेडार, सैटेलाइट से मिलने वाले डेटा और ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन (AWS) जैसी सुविधाएँ शामिल हैं। इन तकनीकों की मदद से मौसम विभाग गरज-चमक, भारी बारिश और अचानक बाढ़ जैसी घटनाओं का 6 घंटे तक पहले सही अंदाजा लगा सकेगा।
आज दुनिया भर के देशों में मौसम की भविष्यवाणी के लिए बड़ी-बड़ी संख्यात्मक मॉडलिंग तकनीक (Numerical Weather Prediction Models) का इस्तेमाल होता है। भारत में भी अब ऐसे मॉडल्स का उपयोग और ज्यादा उन्नत तरीके से किया जाएगा। आईएमडी का दावा है कि भारत के पास पहले से ही सतह और ऊपरी हवा के डेटा, रडार और सैटेलाइट जैसी सुविधाओं का एक मजबूत नेटवर्क है, जिससे मौसम की जानकारी पहले से कहीं ज्यादा भरोसेमंद होगी।
🌐 दुनिया के बड़े देशों से साझेदारी
भारत मौसम पूर्वानुमान सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए अमेरिका, जापान, कोरिया, ब्रिटेन और यूरोप के देशों के वैज्ञानिकों के साथ लगातार जानकारी साझा कर रहा है। इसके तहत वैज्ञानिकों के आदान-प्रदान, तकनीकी शोध और प्रशिक्षण कार्यक्रम भी चल रहे हैं। इस सहयोग की वजह से भारत उष्णकटिबंधीय चक्रवात, गंभीर मौसम चेतावनी और जलवायु सेवाओं के क्षेत्र में एक प्रमुख केंद्र बन गया है।
🤖 एआई और मशीन लर्निंग से भविष्यवाणी और मजबूत
मिशन मौसम के तहत भारतीय मौसम विभाग (IMD) कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और मशीन लर्निंग (ML) तकनीक का भी बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करेगा।
- पुणे के भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) में एआई और डीप लर्निंग आधारित एप्लिकेशन सेंटर स्थापित किया गया है।
- मौसम विभाग ने GPU और CPU आधारित हाई-टेक कंप्यूटिंग सिस्टम लगाया है ताकि तेज और सटीक मौसम मॉडल बनाए जा सकें।
- आईआईटी, इसरो, डीआरडीओ और अन्य संस्थानों के साथ समझौता (MoU) किया गया है ताकि मौसम की भविष्यवाणी में नई तकनीकें लागू की जा सकें।
- मई 2024 में मौसम वैज्ञानिकों को एआई और मशीन लर्निंग की ट्रेनिंग देने के लिए विशेष कोर्स आयोजित किया गया।
- एआई-संवर्धित ड्वोरक तकनीक (AIDT) का इस्तेमाल करके उष्णकटिबंधीय चक्रवातों की ताकत का सही अंदाजा लगाया जाएगा।
- यूरोपियन सेंटर फॉर मीडियम-रेंज वेदर फोरकास्टिंग (ECMWF) के मॉडल का उपयोग कर तूफानों का मार्ग और ताकत पहले से बताई जाएगी।
🚨 समय पर चेतावनी से जान-माल का नुकसान कम होगा
भारत में हर साल अचानक होने वाली भारी बारिश, बाढ़ और चक्रवात से बड़े पैमाने पर नुकसान होता है। मिशन मौसम का मकसद है कि ऐसे खतरनाक हालात का पहले से सही अनुमान लगाया जा सके और लोगों को समय रहते चेतावनी दी जा सके। इससे आपदा प्रबंधन एजेंसियों को भी तैयारी का समय मिलेगा।
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा में बताया कि यह मिशन भारत को मौसम और जलवायु सेवाओं में विश्वस्तरीय तकनीक से लैस कर देगा। आने वाले समय में आम लोग भी मौसम की सही और त्वरित जानकारी मोबाइल ऐप और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए पा सकेंगे।
बेहद फायदेमंद होगी यह व्यवस्था
मिशन मौसम भारत के लिए एक गेम चेंजर साबित हो सकता है। इसमें वैज्ञानिक तकनीक और एआई की ताकत का इस्तेमाल करके देश में मौसम की सही भविष्यवाणी और आपदा चेतावनी व्यवस्था को पूरी तरह बदलने की तैयारी है। यह पहल किसानों, मछुआरों, आम जनता और आपदा प्रबंधन एजेंसियों के लिए बेहद फायदेमंद होगी।
