वैश्विक तापमान बढ़ने से घट रही है श्रमिकों की क्षमता :डब्ल्यूएचओ डब्ल्यूएचओ रिपोर्ट
जेनेवा। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की संयुक्त रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि लगातार बढ़ता वैश्विक तापमान मजदूरों के स्वास्थ्य और उत्पादकता पर गंभीर असर डाल रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, जैसे-जैसे गर्मी की लहरों की आवृत्ति और तीव्रता बढ़ रही है, मजदूरों को हीट स्ट्रोक, निर्जलीकरण, किडनी की खराबी और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ता जा रहा है।
डब्ल्यूएमओ का कहना है कि बीता वर्ष अब तक का सबसे गर्म साल था। अब दिन के समय 40 डिग्री सेल्सियस और यहाँ तक कि 50 डिग्री सेल्सियस तापमान भी सामान्य होता जा रहा है। बढ़ती गर्मी मजदूरों की उत्पादकता को सीधे प्रभावित कर रही है। शोध में बताया गया कि 20°C से ऊपर हर एक डिग्री तापमान वृद्धि पर मजदूरों की उत्पादकता 2 से 3 प्रतिशत तक घट जाती है।
डब्ल्यूएमओ के उप-महासचिव को. बैरेट ने कहा, “अत्यधिक गर्मी से मजदूरों की सुरक्षा केवल स्वास्थ्य का मुद्दा नहीं, बल्कि आर्थिक आवश्यकता भी है।”
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि यह खतरा केवल भूमध्यरेखा के नजदीक देशों तक सीमित नहीं है। अब आधी वैश्विक आबादी जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों का सामना कर रही है। निर्माण, कृषि, मत्स्य पालन जैसी बाहरी कार्यों में लगे मैनुअल मजदूर सबसे अधिक प्रभावित हैं।
रिपोर्ट के मुख्य संपादक एंड्रियास फ्लोरिस ने कहा कि मजदूर गर्म मौसम में धीमे काम करते हैं और अधिक गलतियाँ करते हैं। “स्वास्थ्य, समाज और अर्थव्यवस्था पर गर्मी के नकारात्मक असर पहले से ही स्पष्ट हैं। यह शोध बताता है कि खतरे लगातार बढ़ रहे हैं,” उन्होंने कहा।
समाधान के तौर पर रिपोर्ट में काम के घंटों में बदलाव कर दोपहर की धूप से बचाव का सुझाव दिया गया है। ब्रिटिश सेफ्टी काउंसिल ने भी कर्मचारियों को लचीले समय में काम करने का विकल्प देने की अपील की है। फ्लोरिस का कहना है कि यूरोप में आने वाले समय में दोपहर के समय आराम करने वाली “सिएस्टा संस्कृति” आम हो सकती है।
अटलांटिक काउंसिल की 2021 की रिपोर्ट में अनुमान जताया गया था कि केवल अमेरिका में ही “गर्मी से प्रेरित श्रम उत्पादकता हानि” के कारण हर साल औसतन 100 अरब डॉलर का नुकसान हो सकता है।
ठंडी जगहों पर छुट्टियों की बढ़ती बुकिंग
लगातार बढ़ती गर्मी की लहरें, भीषण जंगल की आग और दमघोंटू आर्द्रता अब बड़ी संख्या में यात्रियों को ठंडी जलवायु वाले स्थानों की ओर आकर्षित कर रही हैं। यूरोप में इस गर्मी एथेंस के एक्रोपोलिस और पेरिस के एफिल टॉवर जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों को बंद करना पड़ा।
यूरोपीय संघ (EU) के अध्ययन के अनुसार, जलवायु परिवर्तन के कारण पर्यटन में असमानता बढ़ने का अनुमान है। उत्तरी तटीय क्षेत्रों में गर्मियों में पर्यटकों की संख्या 5% तक बढ़ सकती है, जबकि दक्षिणी हिस्सों में यह संख्या लगभग 10% तक घट सकती है।
खतरनाक रूप से अधिक तापमान ने टोक्यो डिज़्नी रिसॉर्ट जैसे बड़े आकर्षण स्थलों पर भी आगंतुकों की संख्या कम कर दी है। अमेरिकी थीम पार्क कंपनी “सिक्स फ्लैग्स एंटरटेनमेंट” के अनुसार, गंभीर मौसम के कारण उसे दूसरी तिमाही में करीब 100 मिलियन डॉलर का नुकसान हुआ।
इसके विपरीत, अंटार्कटिका, नॉर्वे और आइसलैंड जैसे ठंडे स्थानों की लोकप्रियता में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है।
