उत्तराखंड हाईकोर्ट ने नगर पलिका नैनीताल के कसाईखाने में बकरा बलि की अनुमति दी
लेकिन नैना देवी मंदिर परिसर के अंदर त्योहार के दौरान वध पर प्रतिबंध जारी
नैनीताल, 30 अगस्त। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने नैनीताल के नैना देवी मंदिर में होने वाले नंदा देवी महोत्सव के दौरान पशु बलि के लिए अस्थायी कसाईखाना स्थापित करने की मांग से जुड़े सार्वजनिक हित याचिका (PIL) की सुनवाई करते हुए शुक्रवार को नगर पालिका के कसाईखाने में बकरों के वध की अनुमति दे दी, लेकिन मंदिर परिसर के अंदर पशु वध पर लगा प्रतिबंध बरकरार रखा।
झील-नगरी में यह महोत्सव 29 अगस्त से शुरू हो गया और यह 5 सितंबर तक चलेगा। धार्मिक रीतियों का एक हिस्सा होने के नाते पशु बलि की परंपरा भी है। हाईकोर्ट ने 2011 में मंदिर के अंदर वध पर प्रतिबंध लगाया था, जिसे 2015 में भी दोहराया और बनाए रखा गया। वर्ष 2016 में अदालत ने नैना देवी मंदिर के भीतर बलिदानी बकरों के प्रवेश की अनुमति तो दी थी, परंतु मंदिर परिसर में वध पर प्रतिबंध जारी रखा गया था।
शुक्रवार को सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट बेंच, जिसमें मुख्य न्यायाधीश जी नारेंदर और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय शामिल थे, ने नगर पालिका को कसाईखाने में वध के लिए स्थान नामित करने के निर्देश दिए और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PCB) से नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी) जारी करने को कहा। बकरों को पुलिस सुरक्षा में मंदिर परिसर तक पहुंचाया जाएगा और अनुष्ठानों के बाद उन्हें कसाईखाने में वध के लिए ले जाया जाएगा। नैनीताल नगर पालिका के कार्यकारी अधिकारी रोहिताश शर्मा ने बताया कि तल्लीताल-हरिनगर के कसाईखाने में 2022 से कई समस्याएं थीं—खून निकालने/नाली व्यवस्था का अभाव, बिजली और अपशिष्ट निपटान की समस्याएं—जिन्हें अब ठीक कर दिया गया है। अब कसाईखाने में पशु बलियाँ कराना संभव है।
हाईकोर्ट ने बलि के दौरान जाँच करने के लिए खाद्य निरीक्षक को भी तैनात करने और सभी नियमों के कड़ाई से पालन को अनिवार्य करने का आदेश दिया। स्थानीय निवासी पवन जाटव और अन्य ने यह याचिका दायर की थी और कहा था कि नंदा देवी महोत्सव के दौरान बलि की परंपरा ‘सदियों से’ चली आ रही है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि मंदिर में पशु बलि पर प्रतिबंध भक्तों की भावनाओं को आहत करता है। याचिका में त्योहार के समय धार्मिक आस्थाओं का सम्मान करते हुए अस्थायी कसाईखाना लगाने की अनुमति मांगी गई थी।
जाटव ने हाईकोर्ट से नगर पालिका को निर्देश देने का अनुरोध किया था कि वह कसाईखाने में बलि की अनुमति दे—जो कि PCB की एनओसी न होने के कारण बंद पड़ा हुआ था। PCB के वकील ने अदालत को बताया कि संचालन अनुमत नहीं था क्योंकि ईटीपी (द्रव अपशिष्ट शोधन संयंत्र) काम नहीं कर रहा था। इस पर नगर पालिका ने कहा कि अब ईटीपी काम कर रहा है और PCB को इसकी जानकारी दे दी गई है।
हाईकोर्ट ने निरीक्षण के बाद गतिविधियों की पुनरारंभ की अनुमति देने के लिए PCB को निर्देशित किया। अदालत ने कहा कि “यह प्रकार का अंतरिम आदेश इस तथ्य को ध्यान में रखकर पारित किया गया है कि महोत्सव आज (शुक्रवार) से शुरू हो रहा है, और माननीय वरिष्ठ स्टैंडिंग काउंसल ने कहा कि यदि देवता को अर्पित होने वाली बलि रोकी जाती है तो इससे कानून-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न हो सकती है। अतः यदि ईटीपी कार्यरत पाया जाता है तो PCB कसाईखाने के उपयोग की अनुमति दे सकता है।”
पशु अधिकार कार्यकर्ताओं ने इस कदम का विरोध किया और कहा कि राज्य सरकार को पशु बलि को प्रोत्साहित करने के स्थान पर उसे हतोत्साहित करना चाहिए तथा लोगों को ऐसी अंधविश्वासी अनुष्ठानिक वध के विरुद्ध शिक्षित करना चाहिए।
