भावुक विदाई के साथ संपन्न हुआ कालिंका देवी का तीन दिवसीय उत्सव

गौचर, 31 अगस्त (गुसाईं)। तीन दिनों तक चली पूजा-अर्चना के बाद रविवार को नगर पालिका क्षेत्र के सात गांवों की आराध्य कालिंका देवी को गाजे-बाजे और श्रद्धा भाव के साथ उनके मूल मंदिर के लिए विदा किया गया। बिदाई का क्षण इतना भावुक था कि उपस्थित श्रद्धालुओं की आंखें छलक उठीं।
गौचर पालिका क्षेत्र के सात गांवों की आराध्य कालिंका देवी का मूल मंदिर भटनगर गांव की सीमा में अलकनंदा नदी के किनारे स्थित है। परंपरा के अनुसार पनाई, बंदरखंड, रावलनगर आदि गांव देवी के मायके पक्ष के माने जाते हैं, जबकि भटनगर गांव ससुराल माना जाता है। शैल गांव के शैली पंडित देवी के गुरु के रूप में प्रतिष्ठित हैं।
हर वर्ष नंदाअष्टमी पर्व पर मायके पक्ष के लोग देवी को पनाई के मंदिर में लाकर क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना के साथ पूजा-अर्चना करते हैं। पहले यह आयोजन एक दिन का होता था और इसमें अष्टबलि की परंपरा रही, लेकिन 70 के दशक के सामाजिक बदलावों के बाद इसकी जगह तीन दिनों तक हवन-पूजन का आयोजन किया जाने लगा।
इस परंपरा के तहत इस वर्ष कालिंका उत्सव डोली को गुरुवार को मायके के मंदिर लाया गया। रविवार को पूर्णाहुति के बाद जब देवी को ससुराल भेजने के लिए मंदिर से बाहर लाया गया, तो जहां एक ओर देवी-देवताओं के अवतरण से माहौल उल्लासमय हो उठा, वहीं उपस्थित महिलाओं की आंखें भावुकता से छलक पड़ीं। अंततः देवी को मनाकर ससुराल के लिए विदा किया गया और इस प्रकार तीन दिवसीय पूजा-अर्चना का विधिवत समापन हुआ।
इस अवसर पर मंदिर समिति के अध्यक्ष जगदीश कनवासी, पूर्व अध्यक्ष उमराव सिंह, व्यापार संघ अध्यक्ष राकेश लिंगवाल, पालिकाध्यक्ष संदीप नेगी, जयकृत बिष्ट, पंडित बंशीधर शैली, गिरीश जोशी, अनशूया जोशी, आशीष जोशी, महेंद्र बिष्ट सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
