क्षेत्रीय समाचार

प्रधानमंत्री आवास योजना का सच : झुंडाई गांव का वृद्ध दंपत्ति जर्जर खंडहर में जिंदगी काटने को मजबूर

 

 

रिखणीखाल से प्रभूपाल-

देश में हर गरीब को पक्का मकान देने का सपना दिखाने वाली प्रधानमंत्री आवास योजना की हकीकत पहाड़ के एक गांव में उजागर हो रही है। रिखणीखाल प्रखंड के ग्राम झुंडाई (तोक सकन्याडी) के 82 वर्षीय ठाकुर सिंह रावत और उनकी वृद्धा पत्नी खंडहरनुमा मकान में जिंदगी काटने को विवश हैं। योजना का लाभ इन्हें अब तक नहीं मिला और कब मिलेगा, इसका जवाब किसी अधिकारी के पास नहीं है।

ठाकुर सिंह रावत का जर्जर मकान कभी भी ढह सकता है। बरसात में छत से पानी टपकता है और दीवारें टूट रही हैं। मजबूरी में वे प्लास्टिक की पन्नी डालकर रातें काटते हैं। चारों तरफ से खंडहर में बदल चुके घर की हालत यह है कि भीतर घास तक उग आई है। बिजली की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है, दंपत्ति अंधेरे में ही रहते हैं।

उनकी पत्नी लंबे समय से बीमार हैं, हाथ की हड्डी टूटी हुई है, लेकिन इलाज के लिए पैसे नहीं हैं और न ही कोई सहारा। उनका पुत्र दिल्ली-पंजाब में मजदूरी करता है, लेकिन न फोन करता है और न आर्थिक मदद। वृद्ध दंपत्ति थोड़ी-बहुत खेती और पशुपालन के सहारे किसी तरह गुजारा कर रहे हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिनके पास छत नहीं है, जिनका मकान कभी भी ढह सकता है, उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ क्यों नहीं मिला? ठाकुर सिंह का कहना है कि उन्हें पहले की पशुबाड़ा योजना का भुगतान भी नहीं मिला। अब वे किस भरोसे उम्मीद लगाएं?

स्थानीय लोगों का कहना है कि ठाकुर सिंह ने हाल ही में पीएम आवास योजना के लिए आवेदन जरूर किया है, लेकिन यह पैसा कब तक पहुंचेगा, यह जिला प्रशासन की उदासीनता पर ही निर्भर है।

प्रशासन और जनप्रतिनिधि मौन

इस मामले पर अब तक न तो जिला प्रशासन की कोई ठोस पहल सामने आई है और न ही क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों ने वृद्ध दंपत्ति की सुध ली है। सवाल उठता है कि योजनाओं का लाभ पाने के लिए क्या गरीबों को सिर्फ कागजी खानापूरी और अंतहीन इंतजार का ही सामना करना होगा? पंचायत स्तर से लेकर जिला स्तर तक की चुप्पी इस बात का सबूत है कि जमीनी हकीकत और सरकारी दावों के बीच गहरी खाई मौजूद है।

सरकार हर मंच से गरीबों को घर देने के दावे करती है, लेकिन धरातल पर सच्चाई यह है कि 82 वर्षीय वृद्ध और उसकी बीमार पत्नी टूटे-फूटे घर के बाहर पन्नी तानकर रात गुजारने को मजबूर हैं। सवाल यह है कि आखिर कब तक गरीबों की जिंदगियां योजनाओं और फाइलों में उलझी रहेंगी?

अपनी मजबूरी में ठाकुर सिंह ने अब सार्वजनिक रूप से आर्थिक सहयोग की अपील की है। उनका खाता उत्तराखंड ग्रामीण बैंक, रथुवाढाब शाखा में है, खाता संख्या 4227027584 और IFSC कोड SBINORRUTGB है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!