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दूरस्थ एक लाल ग्रह पर पृथ्वी जैसी वायुमंडल की आशाजनक झलक

लेखक: रॉबिन जॉर्ज एंड्र्यूज़

पृथ्वी से लगभग 40 प्रकाश-वर्ष दूर एक ठंडे लाल तारे, ट्रैपिस्ट-1 के चारों ओर सात पथरीले ग्रह चक्कर लगा रहे हैं। इनमें से कुछ पर जीवन के अनुकूल परिस्थितियाँ हो सकती हैं। इसी संभावना को देखते हुए खगोलशास्त्रियों ने जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप को इन सातों ग्रहों की ओर मोड़ा। लेकिन अब तक उन्हें निराशा ही हाथ लगी है—कई ग्रह खुले पथरीले टुकड़ों की तरह दिखे हैं, जिन पर अंतरिक्ष का कठोर शून्य सीधे असर डाल रहा है।

लेकिन गहन अध्ययन के बाद, ट्रैपिस्ट-1e नामक ग्रह पर वैज्ञानिक अब तक नाइट्रोजन-समृद्ध वायुमंडल की संभावना को खारिज नहीं कर पाए हैं। हमारे सौरमंडल में शनि का उपग्रह टाइटन और स्वयं पृथ्वी भी नाइट्रोजन-प्रधान वायुमंडल वाले पिंड हैं। और जिस तरह पृथ्वी अपने सूर्य से उपयुक्त दूरी पर स्थित है, उसी तरह ट्रैपिस्ट-1e भी अपने तारे से इतनी दूरी पर है कि वहाँ गर्माहट और जीवन के अनुकूल जलवायु संभव हो सकती है।

कॉर्नेल यूनिवर्सिटी की बहिर्ग्रह शोधकर्ता निकोल लुईस कहती हैं—
“अगर इन ग्रहों में से किसी पर सतह पर तरल जल की संभावना हो सकती है, तो शायद वही ग्रह है।”

स्पष्ट रहे कि वेब टेलीस्कोप ने अब तक किसी वायुमंडल का सीधा पता नहीं लगाया है और न ही वैज्ञानिक जानते हैं कि ट्रैपिस्ट-1e की सतह कैसी है। लेकिन उपलब्ध आँकड़ों के आधार पर “वायुमंडल की संभावना अभी भी बनी हुई है,” कहते हैं नेस्टर एस्पिनोज़ा, स्पेस टेलीस्कोप साइंस इंस्टिट्यूट, बाल्टीमोर के खगोल भौतिकीविद्।2017 में इन सात ग्रहों की खोज की घोषणा के बाद से खगोलशास्त्री मोहित हैं। सभी पथरीले दिखते हैं। सवाल यह है—क्या इनमें से कोई हमारे नीले ग्रह जैसा हो सकता है?

तारा ट्रैपिस्ट-1 हमारे सूर्य जैसा नहीं है। यह अच्छी और बुरी—दोनों खबर है। सातों ग्रह तारे के बहुत नज़दीक परिक्रमा करते हैं। लेकिन चूँकि यह छोटा, ठंडा और मद्धम लाल बौना तारा है, इसकी रहने योग्य पट्टी (habitable zone) भी इसके क़रीब ही है।
समस्या यह है कि यह तारा बेहद सक्रिय और हिंसक है, जो अक्सर घातक लपटें छोड़ता है और ग्रहों का वायुमंडल छीन सकता है।

शोधकर्ताओं ने जब सबसे भीतर के ग्रह ट्रैपिस्ट-1b और 1c का अध्ययन किया, तो कोई वायुमंडल नहीं मिला। पिछले महीने, वैज्ञानिकों ने बताया कि ट्रैपिस्ट-1d पर भी पृथ्वी जैसे वायुमंडलीय अणु—जैसे जल, मीथेन या कार्बन डाइऑक्साइड—मौजूद नहीं हैं।

अब बारी आई ट्रैपिस्ट-1e की। 2023 में वैज्ञानिकों ने वेब टेलीस्कोप को इस ग्रह की ओर मोड़ा। यदि वहाँ वायुमंडल होता तो तारे की किरणें उसमें से गुजरकर दूरबीन तक पहुँचते समय गैसों के संकेत छोड़ जातीं।
इन आँकड़ों को सुलझाना कठिन था। “यह एक पूरी तरह अलग ग्रह है, जो हमारे सूर्य से बेहद भिन्न तारे की परिक्रमा कर रहा है,” डॉ. एस्पिनोज़ा कहते हैं।

डॉ. लुईस बताती हैं, “यह तारा बहुत परेशान करने वाला है।” इसकी लपटें और गतिविधियाँ ट्रैपिस्ट-1e के वातावरण को दूषित करती रहती हैं। फिर भी, डेटा छाँटने के बाद वैज्ञानिकों ने कई संभावनाएँ खारिज कर दी हैं।

इस ग्रह पर हाइड्रोजन-प्रधान वायुमंडल नहीं है। इसके आसमान कार्बन डाइऑक्साइड से भी भरपूर नहीं लगते—यानी यह न तो मंगल जैसा (हल्के CO₂ का ठंडा मरुस्थल) है और न ही शुक्र जैसा (गाढ़े CO₂ से ढका तपता जहरीला ग्रह)।

वेब टेलीस्कोप को प्राप्त तारों की रोशनी में हल्के उतार-चढ़ाव हैं, जो नाइट्रोजन की ओर इशारा कर सकते हैं। लेकिन अब तक केवल कुछ ही बार अवलोकन हुआ है और तारे से उत्पन्न शोर (contamination) अभी भी बाधा है। नतीजतन, अभी तक वैज्ञानिकों के पास ठोस सबूत नहीं हैं—लेकिन वे यह भी नहीं कह सकते कि नाइट्रोजन-प्रधान वायुमंडल वहाँ बिल्कुल नहीं है।

वेब टेलीस्कोप से ट्रैपिस्ट-1e का अध्ययन जारी है। अंततः वैज्ञानिक जान पाएँगे कि इस ग्रह पर किस प्रकार का वायुमंडल है—अगर कोई है तो।

नासा एक्सोप्लैनेट साइंस इंस्टिट्यूट की मुख्य वैज्ञानिक जैसी क्रिश्चियनसन कहती हैं, “ट्रैपिस्ट-1 जैसे लाल बौने तारे ब्रह्मांड में आम हैं। इसलिए यह जानना बेहद ज़रूरी है कि क्या उनके चारों ओर घूमने वाले पथरीले ग्रह वायुमंडल बचा पाते हैं और क्या वे जीवन के लिए उपयुक्त हो सकते हैं।”

अब तक ट्रैपिस्ट-1 प्रणाली में सुरक्षात्मक वायुमंडल नहीं मिला है। और यदि ट्रैपिस्ट-1e पर भी वायुमंडल नहीं मिला, तो “इसका मतलब हो सकता है कि ट्रैपिस्ट-1 जैसे ठंडे तारे जीवन के लिए अनुकूल वातावरण नहीं देते,” कहती हैं हेइडी हैमल, एसोसिएशन ऑफ यूनिवर्सिटीज फॉर रिसर्च इन एस्ट्रोनॉमी की खगोलशास्त्री।

फिर भी, अभी संभावना है कि ट्रैपिस्ट-1e अपने गुस्सैल तारे से बचाव के लिए किसी वायुमंडलीय ढाल से सुरक्षित है।
“उम्मीद की एक किरण बाकी है,” डॉ. क्रिश्चियनसन कहती हैं। “यह बेहद रोमांचक है।”

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