Front Pageमौसम

ला नीना का असर: उत्तर भारत में पड़ सकती है दशकों की सबसे कड़ाके की सर्दी

 

नई दिल्ली, 23 सितम्बर। मानसून का सीजन विदाई की ओर है और अब सर्दियों की दस्तक तेज हो चुकी है। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस साल ला नीना की वजह से भारत, खासकर उत्तर भारत में, सामान्य से कहीं अधिक कठोर सर्दी देखने को मिल सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि नवंबर से जनवरी के बीच शीत लहरों का प्रकोप बढ़ेगा, हिमालयी इलाकों में भारी बर्फबारी होगी और दिल्ली-एनसीआर जैसे शहर दशकों की सबसे ठंडी सर्दी झेल सकते हैं।

ला नीना घटना, जिसमें प्रशांत महासागर की सतह का तापमान सामान्य से कम हो जाता है, वैश्विक मौसम पैटर्न को प्रभावित करती है। इसके चलते उत्तरी गोलार्ध में ठंडी हवाएं और गहराई तक फैल जाती हैं। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों का अनुमान है कि इस साल कोल्ड वेव्स सामान्य से 20-30% ज्यादा तीव्र हो सकती हैं।

संभावित प्रभाव

उत्तर भारत: पाला, शीत लहरें और न्यूनतम तापमान 2-4 डिग्री तक गिरने की संभावना।

हिमालयी क्षेत्र: भारी बर्फबारी, जिससे यातायात और जनजीवन प्रभावित हो सकता है।

केंद्रीय भारत: सामान्य से ठंडी सर्दी, बीच-बीच में शीत लहरों का असर।

दक्षिण और पूर्वी भारत: हल्की सर्दी, लेकिन तटीय क्षेत्रों में कोहरे की आशंका।

तैयारी की जरूरत

विशेषज्ञों का कहना है कि यह सर्दी कृषि (गेहूं, सरसों जैसी फसलों), स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे को प्रभावित कर सकती है। गरीब और वृद्ध लोगों में बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। लोगों को गर्म कपड़ों, हीटर और नियमित स्वास्थ्य जांच की तैयारी करने की सलाह दी गई है।

एनओएए, आईएमडी और डब्ल्यूएमओ के मुताबिक, अक्टूबर-दिसंबर 2025 के बीच ला नीना विकसित होने की 71% संभावना है, हालांकि यह कमजोर और अल्पकालिक हो सकती है। आईएमडी नवंबर में विस्तृत सर्दी पूर्वानुमान जारी करेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!