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चार धाम यात्रा 2025 समापन की ओर : बद्रीनाथ धाम 25 नवंबर को बंद होंगे, अन्य धाम दिवाली के बाद

 

उषा रावत द्वारा –
देहरादून, 3 अक्टूबर। उत्तराखंड के पवित्र चार धाम—बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री—की यात्रा अब समापन की ओर है। कठोर हिमालयी सर्दियों और बर्फबारी की आशंका को देखते हुए इन धामों के कपाट हर वर्ष की भांति शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाते हैं। विजयादशमी के अवसर पर बुधवार को बद्रीनाथ धाम के कपाट बंद होने की तिथि घोषित कर दी गई। इसके अनुसार 25 नवंबर 2025 को बद्रीनाथ के कपाट बंद होंगे, जबकि गंगोत्री, यमुनोत्री और केदारनाथ धाम दिवाली के आसपास निर्धारित मुहूर्त में बंद होंगे।

बद्रीनाथ धाम : 25 नवंबर को कपाट बंद

भगवान विष्णु के आदि अनंत स्वरूप बद्रीनाथ धाम के कपाट पंचांग अनुसार तय मुहूर्त में 25 नवंबर को दोपहर में बंद किए जाएंगे। बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने बताया कि 21 नवंबर से पंच पूजाएं आरंभ होंगी और 25 नवंबर को विशेष अनुष्ठान के बाद कपाट बंद होंगे। कपाट बंद होने के बाद भगवान बदरीविशाल की विग्रह मूर्ति पांडुकेश्वर धाम ले जाकर शीतकालीन पूजाएं होंगी। बद्रीनाथ अकेला धाम है जिसके बंद होने की तिथि निकाली जाती है। जबकि अन्य धामों की बंद होने की तिथिया सदियों  से पहले से तय हैं।

इस वर्ष चार धाम यात्रा में रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। केवल बद्रीनाथ में ही लाखों भक्तों ने दर्शन किए।

केदारनाथ, यमुनोत्री और गंगोत्री : दिवाली के बाद बंद होने की परम्परा

यमुनोत्री धाम : माता यमुना का उद्गम स्थल यमुनोत्री धाम के कपाट 23 अक्टूबर (दिवाली के तीसरे दिन) को दोपहर में बंद होंगे। यही प्राचीन काल से चली आ रही तय परम्परा है। बद्रीनाथ की तरह इन धामों  के कपाट बंद करने के लिए तिथि नहीं निकाली जाती।

केदारनाथ धाम : भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में शामिल केदारनाथ धाम के कपाट भी 23 अक्टूबर को ही विशेष पूजा के बाद दोपहर 2:30 बजे बंद होंगे। इसके बाद शिवलिंग की उत्सव मूर्ति ऊखीमठ स्थित शीतकालीन गद्दीस्थल लायी जाएगी।

गंगोत्री धाम : गंगोत्री के कपाट 24 अक्टूबर को अन्नकूट पूजा के दिन बंद होंगे। कपाट बंद होने के बाद गंगा मूर्ति मुखी गांव ले जायी जाएगी।

इसके अतिरिक्त द्वितीय केदार मद्महेश्वर धाम के कपाट 18 नवंबर और तृतीय केदार तुंगनाथ धाम के कपाट 6 नवंबर को बंद किए जाएंगे।

चार धाम यात्रा का महत्व

अप्रैल-मई में कपाट खुलने के साथ शुरू होने वाली चार धाम यात्रा हर वर्ष अक्टूबर-नवंबर तक चलती है। यह यात्रा आस्था, मोक्ष और हिमालय की दिव्यता से जुड़ने का अवसर मानी जाती है। कपाट बंद होने की रस्में अत्यंत भावुक वातावरण में होती हैं, जिनमें विदाई आरती और भजन-कीर्तन प्रमुख रहते हैं।

बीकेटीसी और राज्य सरकार ने यात्रियों से अपील की है कि वे निर्धारित तिथियों से पहले यात्रा पूरी कर लें। मौसम विभाग ने अक्टूबर अंत तक ऊँचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी की चेतावनी दी है।

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