चंद्रशिला पट्टी के गांवों में जंगली जानवरों का आतंक, प्रधान किमोठी ने डीएम और डीएफओ को सौंपा ज्ञापन
पोखरी, 4 अक्टूबर (राणा)। विकासखंड पोखरी के अंतर्गत चंद्रशिला पट्टी और हापला घाटी के कई गांव इन दिनों जंगली जानवरों के आतंक से जूझ रहे हैं। क्षेत्र की ग्राम पंचायत किमोठा के प्रधान बाल ब्रह्मचारी हरिकृष्ण किमोठी ने इस गंभीर समस्या को लेकर जिलाधिकारी चमोली और केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग गोपेश्वर के प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) को ज्ञापन सौंपा है।
ज्ञापन में बताया गया है कि किमोठा, डुगर, बगथल, कांडई, रडुवा, जौरासी, तोणजी, मसोली, गुणम, पाटी जखमाला, नैल और नौली सहित कई ग्राम सभाएं बंदरों, लंगूरों, सूअरों और भालुओं के आतंक से प्रभावित हैं। दिनदहाड़े बंदरों और लंगूरों के झुंड खेतों और घरों में घुसकर फसलों के साथ-साथ खाद्य सामग्री को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं। इससे ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों में भय का माहौल है।
वहीं रात के समय सूअर और भालू खेतों में घुसकर सब्जियों और बची-खुची फसलों को नष्ट कर रहे हैं। प्रधान हरिकृष्ण किमोठी ने कहा कि यदि स्थिति ऐसी ही बनी रही, तो ग्रामीणों का खेती-बाड़ी से मोहभंग हो जाएगा और वे आजीविका की तलाश में मैदानों की ओर पलायन करने को विवश होंगे। यह विडंबना है कि एक ओर सरकार पलायन रोकने के प्रयासों की बात करती है, वहीं दूसरी ओर वन्यजीवों का बढ़ता आतंक ग्रामीणों को गांव छोड़ने पर मजबूर कर रहा है।
उन्होंने मांग की है कि प्रभावित क्षेत्रों में वन विभाग की विशेष टीमें तैनात की जाएं, फसल क्षति का उचित मुआवजा दिया जाए, और वन्यजीव नियंत्रण के लिए ठोस रणनीति बनाई जाए। किमोठी ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो ग्रामीण वन विभाग और प्रशासन के खिलाफ धरना-प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और वन विभाग की होगी।
