दूषित कफ सिरप से बच्चों की मौतें: उत्तराखंड में मेडिकल स्टोर्स पर छापेमारी, 6 राज्यों में CDSCO की जांच तेज
-By – Usha Rawat
देहरादून/नई दिल्ली, 5 अक्टूबर । मध्य प्रदेश और राजस्थान में जहरीले कफ सिरप से कम से कम 13 बच्चों की मौत के बाद उत्तराखंड सरकार ने सतर्कता बरतते हुए शनिवार को पूरे राज्य में मेडिकल स्टोर्स, थोक दवा विक्रेताओं और अस्पतालों पर छापेमारी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग और खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FDA) की संयुक्त टीमें सक्रिय हो गई हैं।
केंद्र सरकार की एडवाइजरी के तहत केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने भी 6 राज्यों में दवा निर्माण इकाइयों पर जोखिम-आधारित निरीक्षण (Risk-based inspection) आरंभ किया है, जिनमें उत्तराखंड भी शामिल है। हालांकि फिलहाल उत्तराखंड में किसी भी मौत की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन एहतियात के तौर पर राज्य में दवा बाजार की निगरानी बेहद सख्त कर दी गई है।
घटना का बैकग्राउंड: DEG से बच्चों की किडनी फेलियर
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में 3 सितंबर से शुरू हुए इस संकट ने अब राष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। यहां 10 से 11 बच्चों (उम्र 1 से 5 वर्ष) की मौत किडनी फेलियर से हो चुकी है, जबकि राजस्थान के सांगानेर और सीकर में भी 2-3 बच्चे प्रभावित हुए हैं।
जांच में पाया गया कि कफ सिरप में डाइएथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) नामक जहरीला रासायनिक तत्व मौजूद था, जो औद्योगिक सॉल्वेंट है और औषधीय उपयोग में प्रतिबंधित है। DEG सस्ता होने के कारण कई बार इसे प्रोपाइलीन ग्लाइकॉल की जगह मिलावट के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यह बच्चों की किडनी को तेजी से नुकसान पहुंचाता है। लक्षणों में उल्टी, सुस्ती, और कोमा शामिल हैं।
मुख्य संदिग्ध सिरप
Coldrif Syrup (कोल्ड्रिफ सिरप) — निर्माता: Sresan Pharma, तमिलनाडु; बैच SR-13 में 48.6% DEG पाया गया
Nextro DS Syrup (नेक्स्ट्रो DS) — समान प्रकार से संदिग्ध
Dextromethorphan Hydrobromide Syrup — निर्माता: Kesans Pharma, राजस्थान
तमिलनाडु FDA की रिपोर्ट के अनुसार, ये सिरप “Not of Standard Quality (NSQ)” घोषित किए गए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी 2022-23 में उज्बेकिस्तान और गाम्बिया में दर्ज हुई मौतों के बाद भारतीय सिरप पर विशेष चेतावनी जारी की थी।
उत्तराखंड में सख्ती: छापेमारी और बैन का दौर
मध्य प्रदेश-राजस्थान की घटनाओं के बाद उत्तराखंड सरकार ने शनिवार सुबह से ही सख्त अभियान शुरू किया। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रेनू खंडूड़ी ने देहरादून के कई इलाकों में मेडिकल स्टोर्स का औचक निरीक्षण किया, जबकि अन्य जिलों में भी विभागीय टीमें सक्रिय रहीं।
हल्द्वानी (जिला नैनीताल) में ड्रग इंस्पेक्टर ने प्रतिबंधित कफ सिरप के सैंपल जब्त किए गये।
राज्य सरकार ने डेक्सट्रोमेथॉर्फन युक्त सिरप्स तथा क्लोरफेनिरामाइन मेलिएट और फेनाइलेफ्राइन हाइड्रोक्लोराइड के कॉम्बिनेशन पर तत्काल प्रतिबंध लगाया है। चार वर्ष से कम उम्र के बच्चों को ऐसे सिरप बिल्कुल न देने के निर्देश जारी किए गए हैं।
नई गाइडलाइंस:
- बच्चों के लिए कफ सिरप अब केवल चिकित्सक के पर्चे पर ही बेचे जा सकेंगे।
- दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सिरप पूरी तरह निषिद्ध।
- सभी मेडिकल स्टोर्स को संदिग्ध सिरप को तत्काल “फ्रीज” करने और सैंपल जांच के लिए भेजने के आदेश।
कार्रवाई का दायरा:
देहरादून, नैनीताल, हरिद्वार सहित सभी जिलों में मेडिकल स्टोर्स, थोक विक्रेताओं और अस्पतालों पर छापे जारी हैं। संदिग्ध स्टॉक जब्त कर लैब टेस्टिंग के लिए भेजा जा रहा है।
स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा, “मुख्यमंत्री के निर्देश पर राज्य में जीरो टॉलरेंस पॉलिसी लागू है। कोई भी प्रतिबंधित दवा बाजार में नहीं आने दी जाएगी।”
राष्ट्रीय स्तर पर CDSCO की जांच: 6 राज्य फोकस में
CDSCO ने मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड, तमिलनाडु, केरल और उत्तर प्रदेश में दवा निर्माण इकाइयों पर जोखिम आधारित निरीक्षण शुरू किया है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) की टीमों को सैंपल जांच के लिए तैनात किया है।
मध्य प्रदेश में मृतकों के परिवारों को 4 लाख रुपये की सहायता राशि दी जा रही है। उद्योग मंत्री ने संसद में कहा, “यह मामला बेहद गंभीर है, और सरकार दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करेगी।”
राज्यवार स्थिति (अक्टूबर 2025 तक)
राज्य मौतें मुख्य कार्रवाई प्रभावित सिरप
मध्य प्रदेश 10–11 पूर्ण बैन, छापेमारी, सहायता राशि Coldrif, Nextro DS
राजस्थान 2–3 ड्रग कंट्रोलर सस्पेंड, बैन Dextromethorphan Syrup
उत्तराखंड 0 (फिलहाल) मेडिकल स्टोर्स पर छापे, प्रिस्क्रिप्शन अनिवार्य Dextromethorphan युक्त सिरप्स
तमिलनाडु 0 फैक्ट्री सील, बैन Coldrif
केरल 0 बैन, सैंपलिंग Coldrif
विशेषज्ञों की चेतावनी और जनजागरूकता अभियान
पेडियाट्रिशियन डॉ. अनुराग अग्रवाल ने चेतावनी दी, “DEG से किडनी डैमेज स्थायी होता है। माता-पिता बिना चिकित्सीय सलाह के बच्चों को सिरप न दें।”
सरकार ने हेल्पलाइन 1800-11-2233 शुरू की है, जहां संदिग्ध दवाओं की शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
यह पूरा मामला भारतीय दवा उद्योग के क्वालिटी कंट्रोल सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े करता है। 2022 के गाम्बिया कांड (66 मौतें) के बाद भी सुधार की गति धीमी है।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि जनता नवीनतम अपडेट के लिए मंत्रालय की वेबसाइट और राज्य FDA की नोटिफिकेशन पर नज़र रखें।
