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लंगूरों का आतंक: खेत-खलिहान उजड़े, महिलाएं-बच्चे भयभीत, वन विभाग खामोश

 

राजेश्वरी राणा की रिपोर्ट

पोखरी, 5 अक्टूबर। पोखरी विकासखंड के कई गांव इन दिनों लंगूरों के बढ़ते आतंक से जूझ रहे हैं। खदेड़ पट्टी, काण्डई चंद्रशिला, रडुवा, जौरासी, किमोठा, डुंगर और तोणजी जैसे गांवों में लंगूरों के झुंड फसलों को चौपट करने के साथ ही ग्रामीणों पर हमला कर रहे हैं। खेतों में गेहूं, मक्का और सब्जियों की फसलें बर्बाद हो चुकी हैं, जिससे ग्रामीणों की आजीविका पर संकट मंडरा रहा है।

ग्रामीणों ने बताया कि लंगूर अब इंसानों से भी नहीं डरते। विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों पर हमले बढ़े हैं, जिससे महिलाएं खेतों में जाने से डर रही हैं और बच्चे स्कूल जाने से कतराने लगे हैं।

काण्डई चंद्रशिला के ग्राम प्रधान भगत भंडारी, किमोठा के प्रधान बाल ब्रह्मचारी हरकृष्ण किमोठी, गजेंद्र नेगी और मुकेश नेगी सहित कई ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग के अधिकारियों को कई बार मौखिक और लिखित रूप से इस समस्या की जानकारी दी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि स्थिति पर तुरंत नियंत्रण नहीं पाया गया, तो किसी बड़ी अनहोनी की जिम्मेदारी वन विभाग और संबंधित अधिकारियों की होगी।

ग्रामीणों ने मांग की है कि—

  • प्रभावित गांवों में वन विभाग की गश्ती टीमें तुरंत तैनात की जाएं।
  • लंगूरों को आबादी क्षेत्र से दूर करने के लिए ठोस कार्ययोजना बनाई जाए।
  • बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा के लिए जागरूकता अभियान चलाया जाए।

लोगों का कहना है कि पहले यह समस्या कुछ गांवों तक सीमित थी, लेकिन अब पूरे क्षेत्र में फैल चुकी है। वन विभाग की लापरवाही के कारण ग्रामीणों के सामने अब आजीविका और सुरक्षा दोनों का संकट खड़ा हो गया है।

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