भारतीय सेना ने कुमाऊं क्षेत्र में टेंट आधारित होमस्टे का उद्घाटन किया, पर्यटन और सामुदायिक विकास को मिलेगा बढ़ावा

In a significant step towards promoting sustainable tourism and enhancing rural livelihoods,
The Indian Army, under Operation Sadbhavana, inaugurated a tent-based homestay in theThe
scenic border village of Garbyang today. The project aligns with the Government of India’s
Vibrant Villages Programme is aimed at bolstering tourism and fostering community
development in remote areas of the Kumaon region.

देहरादून, 6 अक्टूबर।. भारतीय सेना ने ऑपरेशन सद्भावना के तहत कुमाऊं क्षेत्र के सुरम्य सीमावर्ती गांव गर्ब्यांग में टेंट आधारित होमस्टे का उद्घाटन किया। यह पहल भारत सरकार के वाइब्रेंट विलेजेज़ प्रोग्राम का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य दूरस्थ क्षेत्रों में सतत पर्यटन को बढ़ावा देना और स्थानीय समुदायों का सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण करना है।
उद्घाटन समारोह में लेफ्टिनेंट जनरल डी. जी. मिश्रा, एवीएसएम, जनरल ऑफिसर कमांडिंग, उत्तर भारत एरिया ने इस परियोजना का शुभारंभ किया। यह होमस्टे पर्यटकों को कुमाऊं की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का अनुभव प्रदान करेगा और ग्रामीणों के लिए आजीविका के नए अवसर सृजित करेगा।
गर्ब्यांग, जिसे ‘शिवनगरी गुंजी का द्वार’ भी कहा जाता है, आध्यात्मिक और रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। यह आदि कैलाश और ओम पर्वत–कालापानी जैसे तीर्थ स्थलों का प्रवेश द्वार है, जो देशभर से श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करता है।
ग्रामीणों ने इस पहल का उत्साहपूर्वक स्वागत किया और इसे आजीविका के नए अवसर प्रदान करने वाली योजना बताया। यह होमस्टे पर्यटकों को अनूठा अनुभव देने के साथ-साथ स्थानीय लोगों और आगंतुकों के बीच संबंधों को मजबूत करेगा।
लेफ्टिनेंट जनरल मिश्रा ने कहा, “ऑपरेशन सद्भावना के तहत हम सीमावर्ती क्षेत्रों में सतत विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह परियोजना पर्यटन को बढ़ावा देगी, ग्रामीण विकास को प्रोत्साहित करेगी, रोजगार सृजन करेगी और रिवर्स माइग्रेशन को प्रेरित करेगी।”
भारतीय सेना कुमाऊं के सीमावर्ती क्षेत्रों में कई विकासात्मक परियोजनाएं संचालित कर रही है, जिनमें गांवों का विद्युतीकरण, हाइब्रिड सोलर प्लांट की स्थापना, निःशुल्क चिकित्सा शिविर, और पॉली हाउस का निर्माण शामिल हैं। ये प्रयास सीमावर्ती क्षेत्रों को आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
यह जन-केंद्रित पहल सीमावर्ती गांवों को जीवंत, सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाने में भारतीय सेना के निरंतर योगदान को दर्शाती है।
