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जानवरों से मनुष्यों में फैली बीमारियाँ खेती के आरंभ के साथ बढ़ीं

-चेतन कुमार-

अब वैज्ञानिकों को यह समझ आ गया है कि कब और कैसे जानवरों तथा पक्षियों से रोगजनक (pathogens) मनुष्यों में प्रवेश करने लगे।

1,300 से अधिक प्राचीन मानव अवशेषों के डीएनए का अध्ययन करके — जिनकी आयु 37,000 वर्ष पूर्व से लेकर हाल के इतिहास तक फैली है — वैज्ञानिकों ने यह पता लगाया है कि बैक्टीरिया, वायरस और परजीवी कैसे मनुष्यों में फैलते गए, और कैसे मानव गतिविधियों में हुए बदलावों ने बीमारियों के प्रति हमारी संवेदनशीलता को प्रभावित किया।

यह शोध कोपेनहेगन विश्वविद्यालय के लुंडबेक फाउंडेशन जियोजेनेटिक्स सेंटर के विशेषज्ञों के नेतृत्व में किया गया था, जिसमें यूरोप और ऑस्ट्रेलिया के वैज्ञानिकों की एक अंतरराष्ट्रीय टीम भी शामिल थी। इनके निष्कर्ष इसी वर्ष Nature पत्रिका में प्रकाशित हुए।

अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग करते हुए वैज्ञानिकों ने प्राचीन आनुवंशिक पदार्थ (genetic material) की जाँच की और 492 व्यक्तियों से डीएनए को अलग किया, जिसमें 214 ज्ञात मानव रोगजनक शामिल थे। इनमें से कुछ रोगजनक जैसे Yersinia pestis (जो प्लेग का कारण बनता है), Borrelia recurrentis (रिलैप्सिंग फीवर) और Mycobacterium leprae (कोढ़) पहले से ही प्राचीन मूल के रूप में जाने जाते थे। लेकिन इस अध्ययन ने इन बीमारियों की ज्ञात समय-सीमा और भौगोलिक विस्तार को और व्यापक बनाया तथा कई ऐसे प्राचीन रोगजनकों की पहचान की जो पहले कभी ज्ञात नहीं थे।

शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि जो बीमारियाँ जानवरों से मनुष्यों में फैलती हैं (जिन्हें ज़ूनोसिस कहा जाता है) वे शिकारी-संग्राहक (hunter-gatherer) काल में लगभग अनुपस्थित थीं, लेकिन लगभग 6,500 वर्ष पहले इनके प्रकट होने के प्रमाण मिले — यह वही समय था जब खेती और पशुपालन का आरंभ हुआ।

जैसे-जैसे मनुष्य बड़े समुदायों में बसने लगा और जानवरों को पालतू बनाने लगा, वैसे-वैसे नए रोगाणुओं के संपर्क में आने की संभावना नाटकीय रूप से बढ़ गई। अध्ययन में यह भी पाया गया कि बीमारियों का प्रसार मानव प्रवास (migration) से भी प्रभावित हुआ। उदाहरण के लिए, लगभग 5,000 वर्ष पूर्व यूरेशिया में घूमने वाले स्टेपी (steppe) पशुपालक संभवतः रोगजनकों को अपने साथ ले जाते थे।

आनुवंशिक प्रमाण यह संकेत देते हैं कि इस प्रकार के मानव प्रवास ने ऐसी महामारियाँ उत्पन्न की होंगी जिनसे स्थानीय जनसंख्या कमजोर हुई और नई बस्तियाँ प्रभावित हुईं।

शोधकर्ताओं ने विश्लेषण किया कि समय के साथ कुछ विशिष्ट रोगजनकों की उपस्थिति दर में कैसे बदलाव आया। उदाहरण के लिए, Yersinia pestis (प्लेग) लगभग 5,700 वर्ष पूर्व दिखाई दिया, फिर कुछ समय के लिए गायब हुआ और बाद में फिर से तेज़ी से फैला — यह पैटर्न ज्ञात महामारियों के अनुरूप है। इसके विपरीत, Borrelia recurrentis (रिलैप्सिंग फीवर) समय-समय पर उभरता रहा और लगभग 2,800 वर्ष पहले स्थायी रूप से मौजूद रहने लगा।

वैज्ञानिकों को प्राचीन मलेरिया संक्रमणों के भी प्रमाण मिले, साथ ही 10,000 वर्ष पुराने हेपेटाइटिस बी के कुछ मामले भी मिले। दिलचस्प बात यह है कि जहाँ कई बीमारियाँ एक साथ मौजूद थीं — जैसे मलेरिया, प्लेग और कोढ़ — वहाँ मानव बस्तियों में संक्रमण की स्थिति और जटिल हो गई थी।

हजारों साल पुरानी हैं ऐसी बीमारियां
ज़ूनोटिक बीमारियाँ (जानवरों से मनुष्यों में फैलने वाली) लगभग 6,500 वर्ष पूर्व तब उत्पन्न हुईं जब मानव ने खेती और पशुपालन शुरू किया। जैसे-जैसे समाज बड़े समूहों में संगठित हुआ और प्रवासन बढ़ा, वैसे-वैसे नई महामारियों के फैलने की संभावना भी बढ़ गई।

 

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