जोशीमठ का भविष्य: पर्यटन पुनर्जीवन की चुनौती और उम्मीदें

– जोशीमठ से प्रकाश कपरुवाण –
सीमांत धार्मिक एवं पर्यटन नगरी जोशीमठ के पर्यटन व्यवसाय को एक बार फिर पटरी पर लाना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। जनवरी 2023 की भू-धंसाव आपदा के बाद से यहाँ की पर्यटन गतिविधियों की रफ्तार लगातार गिरती जा रही है। हर गुजरते वर्ष के साथ जोशीमठ की आर्थिक और धार्मिक जीवंतता कमजोर होती जा रही है। ऐसे में अब यह सवाल गंभीर रूप से उठने लगा है कि जोशीमठ के पर्यटन व्यवसाय को कैसे पुनर्जीवित किया जाए।
ज्योतिर्मठ केवल एक सीमांत नगर नहीं, बल्कि धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों का केंद्र है। यह श्री बद्रीनाथ धाम, श्री हेमकुंड साहिब (लोकपाल), विश्व प्रसिद्ध हिमक्रीड़ा स्थल औली, क्वांरी पास-गोरसौं बुग्याल, भविष्य बद्री, फूलों की घाटी, नीती-माणा और उर्गम घाटी का मुख्य पड़ाव भी है।
भू-धंसाव आपदा से पहले जोशीमठ धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ हिमक्रीड़ा, ट्रेकिंग और साहसिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र था। यहाँ के सैकड़ों युवा और व्यवसायी पर्यटन के जरिये न केवल स्वरोजगार पा रहे थे, बल्कि दूसरों को भी रोजगार से जोड़ रहे थे। लेकिन आपदा के विश्वव्यापी प्रचार ने जोशीमठ की छवि को गहरी क्षति पहुँचाई है।
आज स्थिति यह है कि तीर्थयात्री और पर्यटक जोशीमठ में ठहरने से कतराने लगे हैं। बाजारों की रौनक गायब है और स्थानीय व्यवसायियों की आय पर गहरा असर पड़ा है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि जब निर्माणाधीन हेलंग बाईपास मार्ग शुरू हो जाएगा, तब जोशीमठ नगर पूरी तरह मुख्य यातायात मार्ग से अलग-थलग पड़ सकता है। इसका असर यहाँ के धार्मिक और पर्यटन व्यवसाय पर विनाशकारी हो सकता है।
ऐसे में आवश्यक है कि हेलंग बाईपास शुरू होने से पहले जोशीमठ के पुनरोद्धार की ठोस योजना तैयार की जाए। इसके लिए पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सभी राजनीतिक दलों को मिलकर गहन मंथन करना चाहिए।
ज्योतिर्मठ का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व — आद्य शंकराचार्य की तपस्थली, भगवान श्री नृसिंह के दर्शन की परंपरा, औली का हिमक्रीड़ा केंद्र, फूलों की घाटी और गोरसौं बुग्याल जैसे आकर्षण — इन सभी को देश-दुनिया में पुनः प्रचारित करने की आवश्यकता है।
इसके लिए कुछ ठोस कदम उठाए जा सकते हैं, जैसे—
जोशीमठ-औली रोपवे का पुनर्निर्माण और विस्तार,
उड़ान योजना के तहत जोशीमठ को हवाई संपर्क से जोड़ना,
नगर और औली मार्ग पर पार्किंग स्थलों का निर्माण,
स्थानीय पर्यटन सुविधाओं का आधुनिकीकरण और प्रचार-प्रसार।
जोशीमठ के भविष्य को लेकर अब सभी की नजरें स्थानीय नेतृत्व और नीतिनिर्माताओं पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि पर्यटन और तीर्थाटन से जुड़े युवाओं के सपनों को फिर से पंख देने के लिए क्या ठोस प्रयास किए जाते हैं।
