भू-कानून में सुधार की मांग, समिति ने मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन
देहरादून, 10 अक्टूबर। मूल निवास भू-कानून संघर्ष समिति ने आज जिलाधिकारी देहरादून के माध्यम से मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड को एक ज्ञापन सौंपकर राज्य के भू-कानून में व्यापक संशोधन की मांग की। समिति ने कहा कि वर्तमान भू-कानून स्थानीय परिस्थितियों, भौगोलिक संरचना और जनसंख्या दबाव के अनुरूप नहीं है, जिससे स्थानीय लोगों की भूमि सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो पा रही है और बाहरी हस्तक्षेप रोकने में कानून अप्रभावी सिद्ध हो रहा है।
समिति के संयोजक लूशुन टोडरिया ने कहा कि नए भू-कानून के बावजूद राज्य की भूमि बड़े पैमाने पर माफियाओं द्वारा कब्जाई जा रही है। उन्होंने कहा कि जब तक नगर निकायों एवं नगर पंचायतों को भू-कानून के दायरे में शामिल नहीं किया जाएगा, तब तक यह कानून प्रभावी नहीं हो सकेगा।
टोडरिया ने कहा कि राज्य के अधिकांश प्रमुख पर्यटन स्थल नगर पालिका या नगर पंचायत क्षेत्रों में आते हैं, जहां बाहरी लोगों के लिए भूमि क्रय-विक्रय पर कोई रोक नहीं है। पर्यटन स्थलों पर बाहरी व्यक्तियों द्वारा भारी मात्रा में भूमि खरीदने से स्थानीय लोगों का पारंपरिक रोजगार छिन रहा है। उन्होंने मांग की कि हरिद्वार सहित संपूर्ण राज्य को भू-कानून के दायरे में लाया जाए, अन्यथा प्रदेशव्यापी आंदोलन पुनः शुरू किया जाएगा।
समिति के सचिव राकेश नेगी ने कहा कि जब तक राज्य सरकार “मूल निवासी” की परिभाषा स्पष्ट नहीं करती, तब तक मजबूत भू-कानून की बात करना व्यर्थ है।
प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष नौटियाल ने कहा कि कृषि भूमि के गैर-कृषि उपयोग पर सख्त शर्तें लागू की जानी चाहिए। साथ ही, पहाड़ी क्षेत्रों में भूमि हस्तांतरण से पहले पर्यावरणीय अनुमति अनिवार्य की जाए। उन्होंने यह भी मांग की कि एक व्यक्ति या कंपनी द्वारा बार-बार भूमि की खरीद-बिक्री पर रोक लगाई जाए।
समिति ने सरकार से आग्रह किया है कि इन सुधारों को शीघ्र लागू किया जाए ताकि राज्य की भूमि, पर्यावरण और स्थानीय निवासियों के हितों की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
ज्ञापन सौंपने वालों में गगन बौड़ाई, पंकज उनियाल, सुमित थपलियाल, प्रांजल राणा सहित समिति के अन्य पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।
