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नीति आयोग ने हिमालयी क्षेत्रों में सालभर नल जल आपूर्ति पर किया विचार-विमर्श

 

नई दिल्ली, 11 अक्टूबर। नीति आयोग ने शुक्रवार को हिमालय के ऊँचे और कठिन भौगोलिक इलाकों में सभी मौसमों में नल के पानी की सतत आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण विचार-विमर्श सत्र आयोजित किया। इस अवसर पर आयोग ने ‘हिमालयी क्षेत्रों में बारहमासी नल जल आपूर्ति’ पर आधारित एक विशेष संग्रह (कंपेंडियम) भी जारी किया।

इस सत्र में जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, लद्दाख और हिमाचल प्रदेश जैसे हिमालयी राज्यों के प्रतिनिधियों, आईआईटी मंडी के शिक्षाविदों तथा जल क्षेत्र में कार्यरत विभिन्न गैर-सरकारी और सामुदायिक संगठनों के विशेषज्ञों ने भाग लिया।

बैठक में जल सुरक्षा और आजीविका सुधार के लिए क्षेत्रीय स्तर पर उपलब्ध आंकड़ों और अनुभवों को साझा किया गया। प्रतिभागियों ने इस बात पर सहमति जताई कि जल और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में समुदाय की सक्रिय भागीदारी बेहद आवश्यक है। इससे स्थानीय लोगों में परिसंपत्तियों के प्रति स्वामित्व की भावना विकसित होगी और दीर्घकालिक जल सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।

चर्चा के दौरान विशेषज्ञों ने हिमालयी क्षेत्रों में जल आपूर्ति से जुड़ी मुख्य चुनौतियों—जैसे कठिन भौगोलिक परिस्थितियाँ, कठोर मौसम, सीमित तकनीकी संसाधन, डेटा संग्रह व विश्लेषण की कमी—पर विस्तार से विचार किया। इन समस्याओं के समाधान के लिए उन्होंने कई सुझाव दिए, जिनमें टिकाऊ कृषि मॉडल विकसित करना, कृषि वानिकी (एग्रो-फॉरेस्ट्री) को बढ़ावा देना, प्राकृतिक स्रोतों (स्प्रिंग्स) का पुनर्जीवन, ड्रिप आधारित जल आपूर्ति प्रणालियों का प्रयोग और स्थानीय स्तर पर उपयुक्त इंजीनियरिंग सामग्रियों का उपयोग शामिल है।

सत्र में यह भी रेखांकित किया गया कि स्थानीय समुदायों की क्षमता निर्माण (कैपेसिटी बिल्डिंग) और उनके कौशल की औपचारिक मान्यता जल प्रबंधन परियोजनाओं की सफलता की कुंजी है। इससे न केवल समुदाय की भागीदारी बनी रहती है, बल्कि बेहतर आजीविका और रोजगार के अवसर भी सृजित होते हैं।

जारी किए गए संग्रह में हिमालयी राज्यों के विभिन्न केस स्टडी, नवाचार और क्षेत्रीय अनुभव शामिल किए गए हैं। यह संग्रह इस बात का साक्ष्य प्रस्तुत करता है कि तकनीकी नवाचार, सामुदायिक सहयोग और नीति-स्तरीय एकीकरण के माध्यम से सबसे चुनौतीपूर्ण पर्वतीय इलाकों में भी सालभर पेयजल आपूर्ति को स्थायी और विश्वसनीय बनाया जा सकता है।

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