पर्यावरणब्लॉग

जिम कॉर्बेट, मशहूर शिकारी से पर्यावरण संरक्षणवादी

 

 

-डा0 योगेश धस्माना-
एडवर्ड जेम्स जिम कॉर्बेट ब्रिटिश मूल के प्रसिद्ध शिकारी का जन्म 25 जुलाई 1875, को नैनीताल में हुआ था।पिता उनके यहां पोस्टऑफिस में कार्यरत थे।
पहाड़ और पहाड़ वासियों से उसका गहरा नाता रहा था। आदमखोर बाघों को मारने में उनकी दक्षता ने उन्हें जहां एक मशहूर शिकारी बनाया,वहीं,उनके प्रकृति प्रेम ने उन्हें पर्यावरण संरक्षणवाद बना दिया था। इसी सोच के चलते उन्होंने देश के पहले नेशनल पार्क के रूप में नैनीताल ओर गढ़वाल जनपदों की सीमा पर बहने वाली रामगंगा नदी के तट पर इस पार्क की स्थापना की। कुल 521 वर्ग किमी में फैला और798वर्ग किमी के बफर जोन में पसरे इस अभ्यारण की स्थापना 1936 में तत्कालीन सयुक्त प्रांत के गवर्नर मेलकम हेली के नाम से की गई थी। रामगंगा के दोनों सिरों में फैला यह पार्क पौड़ी जनपद के दूधातोली क्षेत्र से निकलने वाली राम गंगा ओर कालागढ़ डाम के निकाने वाले पानी से इसमें एक झील का निर्माण भी करता है। इतना सब कुछ होने के बाद भी सरकारी अभिलेखों में इस पार्क को नैनीताल में दिखाया जाता रहा हे।
अभी तक रामनगर से ही प्रवेश द्वार दिखाने के चलते कोटद्वार कालागढ़ क्षेत्र ओर दुगड़ा से सेंधीखाल, मेंड़ावन कांडा,लोहचौड़ , ढेला, झिराना हो कर रामनगर की दूरी मात्र 92 किमी हे। किंतु वर्तमान सरकार ने इस पूरे क्षेत्र को अभ्यारण के चलते आम जनता के लिए प्रतिबंधित किया है।जबकि कुमाऊं क्षेत्र से गढ़वाल क्षेत्र के ढेला और झिराना तक रास्ता पर्यटकों के लिए खुला है।
राज्य बनने के बाद की प्रथम भाजपा सरकार के मंत्री मोहन सिंह गांव वासी ने इस मार्ग पर जी एम ओ यू को जनहित में सवारी गाड़ी का परमिट देते हुए, इसका रोड टैक्स भी माफ किया था।
नित्यानंद स्वामी सरकार के हटते ही यह सुविधा समाप्त कर दी गईं। इस अन्यायपूर्ण नीति की जनता भर्त्सना करती हे।
स्वाधीनता के बाद इस पार्क नाम बदलकर 1957 में केंद्र सरकार ने जिम कॉर्बेट पार्क किया।किंतु फिर 2021 में सरकार के एक तालिबानी आदेश से अब इस पार्क का नाम रामगंगा नेशनल पार्क कर दिया गया है।
आजादी के बाद से ही इस पार्क में घूमने आने वाले देशी विदेशी मेहमानों को सरकार के प्रोटोकॉल धारक अतिथियों के सम्मान में दिए जाने वाले कार्यक्रमों में नैनीताल ओर पौड़ी के जिलाधिकारी इनकी आगवानी करते हैं,पर पर्यटन ओर गूगल में इस पार्क को नैनीताल जनपद में ही दिखाया जाना अनुचित ओर एक आंचल विशेष की उपेक्षा को दर्शाता है।
गढ़वाल सांसद जिसके संसदीय क्षेत्र में रामनगर विधानसभा भी आती हैं,इनसे गढ़वाल वासी पुरजोर मांग करते हे कि इस भूल को सुधरा जाए।साथ ही,गढ़वाल कोटद्वार से कालागढ़ होते हुए सड़क मार्ग से जनता को रामनगर तक वन विभाग ओर बफर जोन से बाहर कर मार्ग में बसे गांव के लोगों को सुविधा प्रदान करे।
इस पोस्ट के माध्यम से गढ़वाल कुमाऊं के सांसदों से भी अपेक्षा है कि लोक सभा में इस मुद्दे को गंभीरता से उठाकर समस्या का तुरंत समाधान करे।
अभी बस प्रकृति प्रेमी जिम कॉर्बेट का फोटो के साथ ही प्रथम विश्व युद्ध में भाग लेने वाले जिम की सैनिक वर्दी का फोटो पाठकों के लिए भेज रहा हूँ।अपनी प्रतिक्रिया से भी अवगत कराएं।

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