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 इंसानियत मंच ने पत्रकार राहुल कोठियाल और स्वतंत्र मीडिया के प्रति बढ़ते दबाव पर  चिंता जताई

देहरादून,  17 अक्टूबर। उत्तराखंड इंसानियत मंच यह मानता है कि किसी भी लोकतांत्रिक समाज की आत्मा उसके स्वतंत्र, निष्पक्ष और निडर मीडिया में निहित होती है। बीते सप्ताह बारमासा के संपादक एवं वरिष्ठ पत्रकार राहुल कोटियाल द्वारा निर्मित एक वीडियो — जिसमें उत्तराखंड सरकार के विज्ञापन खर्चों पर विश्लेषण प्रस्तुत किया गया था — को कॉपीराइट शिकायत के आधार पर यूट्यूब से हटाया गया, जिससे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर गंभीर प्रश्न उठे हैं।

विवादित वीडियो में ABP News के सात सेकंड के क्लिप का उपयोग किया गया था, जिसमें मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का एक दृश्य शामिल था। मंच का मत है कि कॉपीराइट कानून का उद्देश्य रचनात्मक अधिकारों की रक्षा है, न कि असहमति के स्वरों को दबाने का उपकरण बनना। यदि कॉपीराइट को अभिव्यक्ति को नियंत्रित करने के साधन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, तो यह न केवल पत्रकारिता की स्वायत्तता, बल्कि लोकतांत्रिक संवाद की बुनियाद पर भी प्रहार है।

मंच इस बात पर जोर देता है कि सत्ता के प्रति आलोचनात्मक दृष्टि रखना पत्रकार का कर्तव्य है, अपराध नहीं। जनसंचार माध्यमों के प्रति असहिष्णु रुख, विशेषकर तब जब वे लोकहित से जुड़े विषय उठाते हैं, नागरिक स्वतंत्रताओं के लिए खतरे का संकेत है।

ऐसा पूर्व में त्रिलोचन भट्ट स्वतंत्र पत्रकार जो इंसानियत मंच के साथी हैं, उनके प्रति भी ऐसा ही कुछ किया गया, जो निंदनीय है I

हम राहुल कोटियाल और उनके सहयोगियों के साथ पूर्ण एकजुटता व्यक्त करते हैं, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी तथ्य, पारदर्शिता और जनहित के मूल्यों को प्राथमिकता दी। मंच मांग करता है कि यूट्यूब और संबंधित संस्थाएँ इस प्रकरण की निष्पक्ष और सार्वजनिक समीक्षा करें, ताकि भविष्य में किसी स्वतंत्र पत्रकार को डिजिटल मंचों पर अनुचित दबाव का सामना न करना पड़े।

उत्तराखंड इंसानियत मंच का यह स्पष्ट मत है कि एक जीवंत लोकतंत्र वही है जहाँ सरकार से सवाल करना अपराध नहीं, बल्कि नागरिक दायित्व माना जाता है।

उत्तराखंड इंसानियत मंच

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