शिक्षा/साहित्य

दीपावली पर गढ़वाली कवियों ने बहाई रसधार

रुद्रप्रयाग की कलश संस्था ने किया यादगार आयोजन

दिनेश शास्त्री-
देहरादून, 21 अक्टूबर। राजधानी देहरादून में दीपावली पर्व पर गढ़वाली भाषा आंदोलन की ध्वजवाहक संस्था “कलश” की साहित्यिक गोष्ठी कई अर्थों में यादगार रही। वैसे तो कलश संस्था को स्थापना की दृष्टि से रुद्रप्रयाग का माना जाता रहा है किंतु गढ़वाल के हर कोने में अपनी कीर्ति से लोकभाषा के प्रचार-प्रसार, उन्नयन और संवर्द्धन के लिहाज से अपनी उपस्थिति दर्ज की है।

दीपावली के मौके पर कलश का यह आयोजन गढ़वाली में रचे जा रहे साहित्य का प्रतिबिम्ब तो था ही, रचनाधर्मिता का उत्सव भी था। कलश के संस्थापक ओम प्रकाश सेमवाल के संयोजन और गिरीश सुन्दरियाल के संचालन में हुई साहित्यिक गोष्ठी में कवियों ने अपनी रचनाओं की रसधार बना कर दीपावली के उल्लास को द्विगुणित कर दिया। गोष्ठी की अध्यक्षता गढ़वाली के सशक्त हस्ताक्षर, रंगकर्मी और अभिनेता मदन मोहन डुकलान ने की।

साहित्यिक गोष्ठी में कवियों ने संयोग, वियोग, विरह – वेदना के साथ प्रेम, करुणा के विषयों पर रचित साहित्य को प्रस्तुत किया ही, समसामयिक विषयों को भी न सिर्फ छुआ, बल्कि सोचने के लिए विवश भी किया। उत्तराखंड के लोकमानस की उत्सवधर्मिता पर भी अनेक कवियों ने रचनाएं प्रस्तुत की तो सामाजिक विसंगतियों और विद्रूपताओं पर भी चुटीले प्रहार हुए।

गोष्ठी में मोहन वशिष्ठ, मधुर वादिनी तिवारी, ओम बधाणी, नन्दन राणा, डॉ. उमा भट्ट, बलीराम कंसवाल, जगदम्बा प्रसाद चमोला, अरविन्द प्रकृतिप्रेमी, शान्ति प्रकाश जिज्ञासु, अर्चना गौड़, सिद्धी डोभाल, हरीश बडोनी, योगेन्द्र सकलानी वीरेंद्र पंवार, महेंद्र ध्यानी, आदि अनेक कवियों ने शानदार काव्य पाठ करते हुए भरोसा दिलाया कि गढ़वाली साहित्य सृजन की यह धारा लोकभाषा को उच्चतम शिखर पर प्रतिष्ठापित अवश्य करेगी। इस मौके पर जगदीश पुरोहित, आनन्द मणि सेमवाल, दिनेश शास्त्री, रमाकांत बेंजवाल गिरीश बडोनी सहित अनेक साहित्यप्रेमी मौजूद थे।

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