पर्यावरण

पटाखों से दून की हवा हुई ‘जहरीली’; दिवाली की रात 24 घंटे में पांच गुना बढ़ा प्रदूषण स्तर

–By-Usha Rawat

देहरादून, 22 अक्टूबर। इस शहर की आबोहवा दिवाली की रात अचानक बिगड़ गई। पटाखों की गूंज और धुएं के बीच राजधानी का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) महज 24 घंटे में पांच गुना तक बढ़ गया। जहां एक सप्ताह पहले दून का न्यूनतम एक्यूआई 56 था, वहीं 31 अक्तूबर की रात यह बढ़कर 288 तक पहुंच गया। इससे शहर की हवा ‘खराब श्रेणी’ में दर्ज की गई।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, दीपावली की रात से अगले दिन सुबह तक वायु गुणवत्ता लगातार बिगड़ती गई। रात 10 बजे जहां एक्यूआई 182 था, वहीं सुबह 8 बजे यह बढ़कर 276 तक पहुंच गया। सबसे ज्यादा वायु प्रदूषण दून विश्वविद्यालय क्षेत्र में दर्ज किया गया, जहां एक्यूआई 276 मापा गया।

हालांकि, राहत की बात यह रही कि पिछले साल की तुलना में इस बार हवा कुछ बेहतर रही। वर्ष 2023 में दीपावली पर क्लॉक टॉवर का एक्यूआई 333 और नेहरू कॉलोनी का 349 तक पहुंच गया था, जबकि इस बार ये स्तर 300 के भीतर ही रहे। क्षेत्रीय अधिकारी अमित पोखरियाल ने बताया कि आमजन में बढ़ती जागरूकता और कम आतिशबाजी ने प्रदूषण स्तर को कुछ हद तक नियंत्रित रखा।

एक्यूआई स्तर और खतरे की सीमा
वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) शून्य से 50 तक होने पर हवा को स्वास्थ्य के लिए ठीक माना जाता है। 51 से 100 तक ‘संतोषजनक’, 101 से 200 ‘मध्यम’, 201 से 300 ‘खराब’, 301 से 400 ‘बहुत खराब’ और 401 से 500 के बीच ‘गंभीर’ श्रेणी में गिना जाता है। दून का वर्तमान स्तर 288 ‘खराब’ श्रेणी में आता है, जो खास तौर पर बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा रोगियों के लिए हानिकारक है।

हवा में घुला ज़हर – पीएम 2.5 और पीएम 10
दून में दिवाली के बाद हवा में सूक्ष्म कणों (पार्टिकुलेट मैटर) की मात्रा खतरनाक रूप से बढ़ गई। पीएम 10 और पीएम 2.5 दोनों ही ‘खराब श्रेणी’ में दर्ज किए गए।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, हवा में पीएम 2.5 की मात्रा 60 और पीएम 10 की मात्रा 100 तक सुरक्षित मानी जाती है। लेकिन इस बार ये स्तर क्रमशः 116.5 और 254.3 तक पहुंच गए। गैसोलीन, डीजल और लकड़ी के दहन से निकलने वाले सूक्ष्म कण फेफड़ों के भीतर गहराई तक पहुंचकर श्वसन तंत्र को प्रभावित करते हैं।

स्वास्थ्य पर बढ़ा खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार, प्रदूषित हवा का सबसे अधिक असर फेफड़ों पर पड़ता है। लंबे समय तक ऐसी हवा में सांस लेने से अस्थमा, एलर्जी, चकत्ते, आंखों में जलन और त्वचा रोग जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। दिवाली के बाद इन रोगों से पीड़ित मरीजों की संख्या में इजाफा देखा जा रहा है।

पिछले साल की तुलना में सुधार, पर खतरा बरकरार

स्थान 2024 में एक्यूआई 2023 में एक्यूआई

घंटाघर              288                   333
नेहरू कॉलोनी     243                    349
ऋषिकेश            173                   263
टिहरी                 93                     300

इसी प्रकार पीएम 10 और पीएम 2.5 के स्तरों में भी सुधार देखा गया है, लेकिन हवा अब भी सांस लेने लायक ‘सुरक्षित’ नहीं है।

अब पहले जैसी नहीं रही दूँ की हवा
हालांकि इस बार दिवाली पर देहरादून में प्रदूषण पिछले साल से कम दर्ज किया गया, लेकिन 24 घंटे में पांच गुना वृद्धि यह साफ संकेत है कि शहर की हवा अब पहले जैसी नहीं रही। पर्व की खुशी के साथ जिम्मेदारी भी जरूरी है—क्योंकि हर पटाखा हमारी सांसों में ज़हर घोल रहा है।

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