विज्ञान प्रोद्योगिकी

ब्लॉकचेन और एआईः साइबर सुरक्षा में विश्वसनीयता का नया युग

 

मुरादाबाद, 23  अक्टूबर । तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में “ब्लॉकचेन एंड एआई फ़ॉर नेक्स्ट-जेनरेशन साइबर सिक्योरिटीः ट्रस्ट एंड ऑथेंटिकेशन” विषय पर पांच दिवसीय ऑनलाइन फैकल्टी डवलपमेंट प्रोग्राम (एफडीपी) आयोजित किया गया।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि ब्लॉकचेन तकनीक डेटा की अखंडता, संचार की सुरक्षा और डिजिटल प्रमाणीकरण को नई विश्वसनीयता प्रदान करती है। ग्राफिकल पासवर्ड जैसी उभरती तकनीकें भविष्य में अधिक सुरक्षित विकल्प बनेंगी। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), मशीन लर्निंग और डीप लर्निंग निर्णय प्रक्रिया को अधिक सटीक और प्रभावी बनाती हैं। विशेषज्ञों ने ऊर्जा, जल, परिवहन, स्वास्थ्य और शासन तंत्रों की सुरक्षा में एआई और ज़ीरो ट्रस्ट मॉडल के समन्वित उपयोग पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि एआई खतरों की पहचान, असामान्य गतिविधियों की निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली को सशक्त बनाती है। इस ऑनलाइन एफडीपी में देश-विदेश से 100 प्रतिभागियों ने भाग लिया और सभी को प्रमाणपत्र प्रदान किए गए।

गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, कश्मीर के डॉ. औकिब हमीद लोन ने ब्लॉकचेन आधारित साइबर सुरक्षा और डिजिटल फॉरेंसिक पर व्याख्यान देते हुए ब्लॉकचेन की मूल अवधारणाओं, सर्वसम्मति तंत्र और क्रिप्टोग्राफी की तकनीकों को विस्तार से समझाया। कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के डीन प्रो. राकेश कुमार द्विवेदी ने कहा कि ब्लॉकचेन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी उभरती तकनीकें भविष्य की सुरक्षा प्रणालियों की नींव हैं। इन पर आधारित शिक्षण और अनुसंधान गतिविधियां ही भारत को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाएंगी।

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के प्रो. मोहम्मद सरोश उमर ने उपयोगकर्ता प्रमाणीकरण: चुनौतियां और सर्वोत्तम अभ्यास विषय पर व्याख्यान देते हुए मजबूत पासवर्ड नीति, दो-स्तरीय प्रमाणीकरण और फ़िशिंग से बचाव की जागरूकता पर बल दिया। वहीं वेलटेक रंगराजन डॉ. सगुंथला अनुसंधान एवं विकास संस्थान, चेन्नई के डॉ. ए. प्रसांत ने स्मार्ट अनुप्रयोगों के लिए एआई और ब्लॉकचेन के उद्भव पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य, रोबोटिक्स और समुद्री उद्योगों में इनका संयोजन भविष्य के स्मार्ट और सुरक्षित तंत्रों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

जारामोगी ओगिंगा ओडिंगा विश्वविद्यालय, केन्या के डॉ. विन्सेंट ओमोलो न्यांगारेसी ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता और ज़ीरो ट्रस्ट मॉडल के माध्यम से महत्वपूर्ण अवसंरचनाओं की सुरक्षा पर विचार साझा किए। उन्होंने भविष्य के शोध क्षेत्रों में व्याख्येय एआई, फेडरेटेड लर्निंग और ज़ीरो डे अटैक पहचान जैसी अवधारणाओं को संभावनाओं से भरा बताया।

आईटीएस मोहन नगर, गाज़ियाबाद के प्रो. सुनील कुमार पांडे ने ब्लॉकचेन के मूल सिद्धांत और साइबर सुरक्षा में इसके प्रयोग पर ज्ञानवर्धक व्याख्यान दिया। उन्होंने क्रिप्टोग्राफी और हैशिंग के सिद्धांतों को सरल शब्दों में समझाते हुए बताया कि SHA-256 एल्गोरिद्म डेटा की अखंडता और अपरिवर्तनीयता सुनिश्चित करता है। उन्होंने सुरक्षित लॉगिंग, पहचान प्रबंधन, टोकनकरण, प्रक्रिया अखंडता और डेटा संरक्षण जैसे व्यावहारिक अनुप्रयोगों पर भी विस्तार से चर्चा की।

अंत में एफडीपी कोऑर्डिनेटर डॉ. प्रीति रानी ने धन्यवाद ज्ञापन दिया। इस अवसर पर सीसीएसआईटी विभागाध्यक्ष प्रो. शंभु भारद्वाज, एडिशनल एचओडी डॉ. रूपल गुप्ता, डॉ. प्रियांक सिंघल, डॉ. नूपा राम चौहान, डॉ. रंजना शर्मा, डॉ. नमित गुप्ता, मिस रूहेला नाज़ और श्री गौरव राजपूत उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन छात्रों प्रत्यक्षा पुंज, सन्यम जैन, नवज्योत जे., वृंदा अग्रवाल और अंजलि ने किया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!