उत्तराखंड UKSSSC पेपर लीक मामला: केंद्र ने CBI जांच को मंजूरी दी, देहरादून यूनिट ने शुरू की जांच प्रक्रिया
By -Usha Rawat-
देहरादून, 28 अक्टूबर ।उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) की स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा में हुए पेपर लीक घोटाले की जांच अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) करेगी। केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने राज्य सरकार की सिफारिश पर CBI जांच को औपचारिक मंजूरी दे दी है। मंजूरी मिलते ही CBI की देहरादून इकाई ने सोमवार को केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी। यह फैसला उन लाखों युवाओं के लिए राहत की खबर है, जो लंबे समय से परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहे थे।
क्या हुआ था 21 सितंबर को?
UKSSSC ने 21 सितंबर 2025 को 416 पदों के लिए ग्रेजुएट लेवल परीक्षा आयोजित की थी, जिसमें सहायक लेखाकार, कनिष्ठ सहायक और सांख्यिकी सहायक जैसे पद शामिल थे। परीक्षा हरिद्वार के आदर्श बाल सदन इंटर कॉलेज, बहादुरपुर जाट केंद्र पर भी हुई। इसी केंद्र से परीक्षा के दौरान तीन पन्नों का प्रश्नपत्र लीक होकर सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। उम्मीदवारों ने आरोप लगाया कि इससे परीक्षा की शुचिता भंग हुई है।
प्रारंभिक जांच में पाया गया कि परीक्षा केंद्र में मोबाइल जैमर नहीं थे, और CCTV कैमरों की व्यवस्था भी अपर्याप्त थी, जिससे सुरक्षा में भारी चूक हुई। न्यायिक जांच पैनल की अंतरिम रिपोर्ट ने हरिद्वार केंद्र से पेपर लीक की पुष्टि की।
विरोध प्रदर्शन और सरकार की प्रतिक्रिया
पेपर लीक की खबर फैलते ही 21 सितंबर की रात से देहरादून के परेड ग्राउंड में युवाओं का धरना शुरू हो गया। धीरे-धीरे विरोध हरिद्वार, टिहरी, पौड़ी और अन्य जिलों तक फैल गया। छात्र संगठनों ने CBI जांच, परीक्षा रद्द करने और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की।
लगातार एक हफ्ते चले धरने के दौरान कई जगह पुलिस और छात्रों के बीच टकराव भी हुआ। विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस, ने भी राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन किए।
29 सितंबर को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं धरनास्थल पर पहुंचे और युवाओं से बातचीत की। उन्होंने CBI जांच की सिफारिश और परीक्षा रद्द करने की घोषणा करते हुए कहा — “युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।” इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने आंदोलन समाप्त कर दिया।
SIT जांच और गिरफ्तारियां
मुख्यमंत्री के निर्देश पर एक विशेष जांच दल (SIT) गठित की गई, जिसने त्वरित कार्रवाई करते हुए कई खुलासे किए।
मुख्य आरोपी खालिद मलिक, निवासी लक्सर (हरिद्वार), को गिरफ्तार किया गया।
जांच में पाया गया कि उसने परीक्षा केंद्र की दो बार रेकी की थी।
- उसकी बहन साबिया को हिरासत में लिया गया, जबकि तीसरी आरोपी हिना से पूछताछ जारी है।
SIT के अनुसार परीक्षा के दिन आरोपी ने मोबाइल फोन से प्रश्नपत्र की तस्वीरें लीं और उन्हें बाहर भेजा। SIT की रिपोर्ट के बाद राज्य सरकार ने केंद्र को CBI जांच की औपचारिक सिफारिश भेजी।
परीक्षा रद्द और नई जांच प्रक्रिया
SIT और न्यायिक पैनल की रिपोर्ट के आधार पर मुख्यमंत्री ने 11 अक्टूबर को परीक्षा रद्द करने की घोषणा की। यह निर्णय पेपर लीक की पुष्टि के बाद लिया गया। अब नई परीक्षा की तारीखें जल्द घोषित होने की संभावना है।
CBI जांच की शुरुआत
राज्य सरकार की सिफारिश पर केंद्र सरकार ने 27 अक्टूबर को CBI जांच को मंजूरी दी।
CBI की देहरादून इकाई ने आपराधिक साजिश (धारा 120B IPC), आईटी एक्ट और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PCA) के तहत केस दर्ज किया है। एजेंसी ने SIT से केस डायरी, CCTV फुटेज, गवाहों के बयान और दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए हैं। साथ ही परीक्षा मुद्रण प्रक्रिया, पेपर वितरण श्रृंखला और आयोग की सुरक्षा प्रणाली का फॉरेंसिक ऑडिट कराया जा रहा है।
एडीजी (कानून व्यवस्था) डॉ. वी. मुरुगेशन ने बताया कि “CBI को सभी आवश्यक दस्तावेज सौंप दिए गए हैं, राज्य पुलिस पूरी तरह सहयोग कर रही है।” मंगलवार को CBI टीम ने SIT अधिकारियों से मुलाकात कर जांच की दिशा तय की।
युवाओं और विपक्ष की प्रतिक्रिया
CBI जांच की मंजूरी के बाद छात्र संगठनों ने इसे “जनदबाव की जीत” बताया, लेकिन साथ ही दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग दोहराई।
वहीं, विपक्ष ने सरकार पर जांच में देरी का आरोप लगाते हुए कहा कि यह कदम दबाव में उठाया गया है।
यह मामला उत्तराखंड में भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब सभी की निगाहें CBI की जांच पर टिकी हैं — जिससे उम्मीद की जा रही है कि दोषियों को सजा मिलेगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सकेगी।
नई परीक्षा तिथि और प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी UKSSSC जल्द जारी करने की संभावना है।
