शिक्षा/साहित्य

खुद ही पढ़ लूंगा अपनी कविता पर सुनने की भिक्षा नहीं. ….!

 

-गोविंद प्रसाद बहुगुणा-

कविता पढ़ने और सुनने के दिन चले गये फिर भी आदत से लाचार । खुद ही पढ़ लूंगा पर भिक्षा नहीं मांगूगा कि मुझे सुनो-यह भी कवि का ही स्टेटमेंट है ,मेरा नहीं -GPB

“A Psalm of Life” –
जीवन का स्तोत्र -H.W.Longfellow

मंत्र-स्तोता से युवा हृदय ने क्या कहा? –
मुझे ये शोक के गीत मत सुनाओ
कि- जीवन खाली सपना है
क्योंकि आत्मा मृत के समान
चिर निद्रा में रहती है
जो कुछ भी दृश्यमान है, वह वास्तविकता नहीं है।

अरे भाई जीवन वास्तविक है और
जीवन जीवन्त सच्चाई है
आत्मा के बारे में यह किसी ने
आज तक नहीं कहा।

जीवन केवल आनन्द नहीं है
और न सिर्फ दु:ख
और नहीं यह नियति का अंतिम पड़ाव और रास्ता
जीवन कला की यात्रा लंबी है और
समय निरन्तर गतिमान रहता है।
संसार के इस लंबे -चौड़े युद्ध क्षेत्र में
जीवन एक अस्थाई पड़ाव है,यह मान लो
लेकिन बेजुबान पशुओं की तरह हांके भी मत जाओ
मुसीबत में भी बहादुर योद्धा बनकर रहो ।

भविष्य कितना भी सुहाना हो
उसी पर भरोसा मत करो
लेकिन जो बीत गया, वह वीत गया
उसे तुरंत दफन भी कर दो ।
कर्म करते रहो, कर्म करते रहो
जब तक जीवन वर्तमान है
जब तक दिल अन्दर से धड़क रहा है
और
ऊपर से ईश्वर की छत्रछाया है।

महापुरुषों का जीवन हमें याद दिलाता है
कि हम अपने जीवन को
भव्य और उदात्त बना सकते हैं
और संसार से बिदा होने पर अपने पीछे
जीवन के इस बालुकामय क्षेत्र में अपने पदचिन्ह
यादगार के रूप में छोड़ जाते हैं।
क्योंकि पांवों के ये निशान कभी
उस नाविक को प्रेरित कर सकते हैं
जिसका पोत जीवन समुद्र में तैरते समय टूट जाय
तो ये निशान देखकर वह फिर से तैरने की हिम्मत बटोर सकता है।

इसलिए बन्धुवर उतिष्ट जागृत हो जाओ
कर्म के लिए उद्यत हो जाओ
हर कठिनाई का सामना करने के लिए
दिल को मजबूत कर लो
अनवरत प्रयत्नशील गतिशील बनो
श्रम करना सीखो और प्रतीक्षा करना भी।
(भावानुवाद:GPB)

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