पोखरी मेले में झलकी लोक संस्कृति की छटा ; मेले में आयोजित हुआ सैनिक सम्मेलन

लोकगीतों, नृत्यों और प्रतिभाओं से गूंजा कवि चन्द्रकुंवर बर्तवाल खादी पर्यटन किसान विकास मेला
– राजेश्वरी राणा की रिपोर्ट –
पोखरी, 28 अक्टूबर । कवि चन्द्रकुंवर बर्तवाल खादी पर्यटन किसान विकास मेले में इस वर्ष लोक संस्कृति, लोकगीतों और पारंपरिक नृत्यों की ऐसी झलक देखने को मिली, जिसने क्षेत्रीय जनता को गर्व से भर दिया। सात दिवसीय मेले के तीसरे और चौथे दिन मेला मंच पर महिला मंगल दलों, विद्यालयी छात्र-छात्राओं और लोक कलाकारों ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लिया।
तीसरी सांस्कृतिक संध्या में लोकगीतों की गूंज और ढोल-दमाऊं की थाप पर दर्शक रातभर झूमते रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ सामाजिक कार्यकर्ता बसंत भंडारी और मनोज भंडारी ने फीता काटकर किया। लोक गायिका माया उपाध्याय और लोकगायक भागचंद सावन की टीम ने “शंभू जय बोला जय महाकाल”, “गढ़वाले मां बाघ लगी”, “जय मां नंदा”, “बेड़ू पाको बारोमासा” और “उत्तराखंड देवभूमि तेरी जय जयकार” जैसे लोकप्रिय गीतों से ऐसा समां बांधा कि पूरा पंडाल तालियों से गूंज उठा।
मुख्य अतिथि पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेन्द्र सिंह भंडारी ने कहा कि “इन लोक कलाकारों की बदौलत ही पोखरी मेला प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बना चुका है। यह आयोजन हमारी लोक संस्कृति की जीवंत धरोहर को नई ऊँचाइयाँ प्रदान कर रहा है।” उन्होंने अतिथियों व कलाकारों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।

चौथे दिन मेला मंच पर विद्यालयी छात्रों और महिला मंगल दलों की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को नई ऊष्मा दी। पारंपरिक परिधानों में सजे कलाकारों ने कुमाऊंनी और गढ़वाली लोकगीतों की झड़ी लगाकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। महिला मंगल दल नैल ने “चला स्याली बाजार”, मसोली दल ने “जय बोला जय भोला”, ऐरास दल ने “चल झुमेलो रास उत्तराखंड” और “नंदा राज जात पैँटी कैलाश” जैसे गीतों से सभी का दिल जीत लिया। विरसण सेरा दल की “दो गती बैशाख होलो कोटेश्वर मेला” प्रस्तुति पर तालियों की गड़गड़ाहट गूंजी। श्रीगढ़, पाटी , जखमाला और अन्य ग्राम पंचायतों की महिला मंगल दलों ने भी अपनी उत्कृष्ट प्रस्तुतियों से मेले की रौनक बढ़ाई।
बालिका इंटर कॉलेज, टैगोर इंटर कॉलेज, सरस्वती शिशु मंदिर, आदर्श विद्या मंदिर गुनियाला पोखरी सहित विभिन्न विद्यालयों के छात्रों ने रंगारंग प्रस्तुतियों से मेले में नई ऊर्जा का संचार किया। वहीं लोक जागृति विकास संस्था कर्णप्रयाग ने निर्देशक जितेन्द्र कुमार और भागचंद सावन के नेतृत्व में नाटक और गीतों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और सरकारी योजनाओं के प्रचार का संदेश दिया।

मेले में आयोजित सैनिक सम्मेलन में पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों को सेना की कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। प्रतियोगिताओं में टैगोर इंटर कॉलेज पोखरी ने रगोली और क्विज प्रतियोगिता दोनों में प्रथम स्थान प्राप्त किया।
मुख्य अतिथि राजेन्द्र सिंह भंडारी ने सभी प्रतिभागियों को शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया और कहा, “ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। इस प्रकार के आयोजन हमारी सांस्कृतिक पहचान को सशक्त बनाते हैं।” विशिष्ट अतिथि सुनील पवार ने कहा कि 19 वर्ष पूर्व रखी गई इस मेले की नींव आज जनभागीदारी की मिसाल बन चुकी है।

कार्यक्रम में पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रजनी भंडारी, अधिशासी अधिकारी बीना नेगी, शिक्षक संगठन पदाधिकारी, जागर गायिका डॉ. पम्मी नवल, सामाजिक कार्यकर्ता और क्षेत्र के सैकड़ों लोग उपस्थित रहे। मंच संचालन रेखा पटवाल राणा, उपेंद्र सती, उर्मिला नेगी, टी.पी. सती और भगीरथ भट्ट ने संयुक्त रूप से किया।
