उत्तराखंड के रजत जयंती आयोजनों से आंदोलनकारियों को दूर रखे जाने पर नाराजगी
7 नवंबर से आंदोलन की चेतावनी
-हरेंद्र बिष्ट की रिपोर्ट-
थराली, 30 अक्टूबर । चिन्हित राज्य आंदोलनकारी समिति/राज्य निर्माण सेनानी रजिस्टर्ड उत्तराखंड–दिल्ली ने उत्तराखंड राज्य गठन की 25वीं वर्षगांठ को रजत जयंती के रूप में मनाए जाने की राज्य सरकार की घोषणा का स्वागत किया है, लेकिन समिति ने रजत जयंती के आयोजनों से चिन्हित आंदोलनकारियों को दूर रखे जाने पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। समिति ने चेतावनी दी है कि यदि आंदोलनकारियों की लंबित मांगों का समाधान नवंबर के पहले सप्ताह तक नहीं किया गया, तो 7 नवंबर से अस्थायी राजधानी देहरादून में आंदोलन शुरू किया जाएगा।
समिति के केंद्रीय अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह रावत ने एक बयान में कहा कि राज्य की रजत जयंती मनाना सराहनीय कदम है, लेकिन 1 से 11 नवंबर तक प्रस्तावित कार्यक्रमों में चिन्हित राज्य आंदोलनकारियों को शामिल न करना अत्यंत दुखद है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य का गठन बड़ी कुर्बानियों, घोर उत्पीड़न, युवाओं, मातृशक्ति और प्रबुद्ध नागरिकों के लंबे संघर्ष के बाद संभव हो पाया था। लेकिन आज, 25 वर्ष बीत जाने के बावजूद, राज्य निर्माण सेनानी और आम नागरिक अब भी मूलभूत सुविधाओं, अधिकारों और सांस्कृतिक संरक्षण के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
रावत ने कहा कि आंदोलनकारी और उनके आश्रित सरकारों की उपेक्षा और झूठे आश्वासनों से खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। अब तक किसी भी सरकार ने राज्य निर्माण सेनानियों के सम्मान में कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। उन्होंने कहा कि समिति की प्रमुख मांगों में राज्य निर्माण सेनानियों को संवैधानिक दर्जा देना, सम्मानजनक पेंशन, 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण का स्थायी प्रावधान, एक आश्रित को समूह ग एवं घ में सीधी नियुक्ति, तथा छूटे हुए आंदोलनकारियों का पुनः चिन्हिकरण जैसी मांगे शामिल हैं, जिन्हें सरकार जानबूझकर लटकाए हुए है।
रावत ने बताया कि 12 अक्टूबर को बागेश्वर में आयोजित समिति के 27वें राज्य स्तरीय सम्मेलन में इन सभी मुद्दों पर चर्चा की गई थी और राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद के उपाध्यक्ष सुभाष बड़थ्वाल के माध्यम से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को मांगपत्र भेजा गया था। लेकिन अब तक सरकार की ओर से किसी भी समस्या पर कार्यवाही का संदेश तक नहीं मिला है। इससे आंदोलनकारियों में गहरा असंतोष व्याप्त है।
उन्होंने कहा कि समिति ने पहले ही निर्णय लिया है कि यदि नवंबर के पहले सप्ताह तक सरकार ठोस निर्णय नहीं लेती है, तो 7 नवंबर से देहरादून में बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी।
रावत ने आगामी आंदोलन की रूपरेखा बताते हुए कहा कि राज्य के सभी जिलों के साथ-साथ दिल्ली प्रदेश इकाई से भी चिन्हित आंदोलनकारी कम से कम 10-10 सदस्यों के दलों में देहरादून पहुंचेंगे। सभी आंदोलनकारी अपने परिचय पत्रों और बैनरों के साथ सुबह 10 बजे उत्तराखंड राज्य अतिथि गृह (एनेक्सी), राजभवन के निकट एकत्र होंगे और सरकार के सामने अपनी मांगों को लेकर हुंकार भरेंगे।
