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उत्तराखंड रजत जयंती समारोह में शहीदों और पूर्व सैनकों को उचित सम्मान न देने का आरोप

 

देहरादून, 8 नवंबर। उत्तराखण्ड की रजत जयंती समारोह से ठीक एक दिन पहले राज्य सरकार द्वारा सैनिकों और शहीदों के परिजनों के प्रति किए गए व्यवहार पर उत्तराखण्ड कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने गहरा खेद व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि यह कदम उस प्रदेश की भावना को आहत करता है, जहां प्रत्येक घर से एक व्यक्ति देश सेवा में योगदान देता है।

दसौनी ने बताया कि समारोह के आमंत्रण पत्र में अतिथियों की 14 श्रेणियाँ निर्धारित की गई हैं, जिनमें “पूर्व सैनिकों” और “शहीदों के परिजनों” को नीचे से दूसरी यानी 13वीं श्रेणी में स्थान दिया गया है, जबकि “व्यवसायियों” को उनसे ऊपर रखा गया है। उन्होंने कहा कि यह सूची राज्य सरकार की प्राथमिकताओं और सोच को दर्शाती है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड जैसे सैनिक प्रधान प्रदेश में, जहाँ माताएँ अपने पुत्रों को देश सेवा के लिए गर्व के साथ विदा करती हैं, वहां सैनिकों और उनके परिवारों को सम्मान की सर्वोच्च पंक्ति में स्थान मिलना चाहिए था।

दसौनी ने कहा कि मुख्यमंत्री स्वयं को “सैनिक पुत्र” कहने में गर्व महसूस करते हैं, इसलिए यह और भी आवश्यक है कि उनके शासन में सैनिकों का मान-सम्मान सर्वोपरि रहे। उन्होंने आग्रह किया कि सरकार और संबंधित अधिकारियों को इस विषय पर शहीद परिवारों और पूर्व सैनिकों से सार्वजनिक रूप से खेद व्यक्त करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि सम्मान केवल शब्दों में नहीं, बल्कि व्यवहार में झलकना चाहिए। सैनिकों और शहीद परिजनों को राज्य समारोहों में सर्वोच्च सम्मान मिलना, उत्तराखण्ड की परंपरा और गौरव के अनुरूप है।

दसौनी ने कहा कि राज्य के वास्तविक सैनिक परिवार हमेशा देश और प्रदेश की मर्यादा के साथ खड़े रहे हैं और उनका स्वाभिमान किसी भी पद या स्थिति से बड़ा है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि सरकार इस विषय को गंभीरता से लेगी और भविष्य में ऐसे प्रसंगों से परहेज़ करेगी।

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