आज बाल दिवस पर विशेष: बच्चों को देख बहुत याद आते हैं अपने वो दिन
*वह दिन भी क्या दिन थे*

-हेमचंद्र सकलानी-
वह दिन भी क्या दिन थे
जब उछल कूद शैतानी करते
हम डांट का जश्न मनाया करते थे।
वह दिन भी क्या दिन थे
जब जिद्द में हम हर बात पर रोया करते थे
फिर सब हमें मनाया करते थे।
वो दिन भी क्या दिन थे
जब हाथ से जहाज उड़ाया करते थे और
पानी में नाव चलाया करते थे।
वह दिन भी क्या दिन थे
कट कर आएगी छत पर कभी कोई
पतंग,सोच के आकाश तका करते थे।
वो दिन भी क्या दिन थे
जब रंग बिरंगे कंच्चे खेला करते थे और
जम कर बारिश में भीगा करते थे।
वह दिन भी क्या दिन थे
छुट्टी की बजती घंटी और
शोर मचाते, धक्का मुक्की करते
हम सब जब घर को दौड़ लगाया करते थे।
वह दिन भी क्या दिन थे।
