विज्ञान प्रोद्योगिकी

टीएमयू में इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस SMART-2025 का समापन, देश-विदेश के विशेषज्ञों ने प्रस्तुत किए 98 शोधपत्र

मुरादाबाद, 15 नवंबर। तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ कंप्यूटिंग साइंसेज़ एंड इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (सीसीएसआईटी) में आयोजित दो दिवसीय इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस— सिस्टम मॉडलिंग एंड एडवांसमेंट इन रिसर्च ट्रेंड्स (SMART-2025) का समापन शनिवार को हुआ। देश-दुनिया के 98 विद्वानों ने अपने शोधपत्र प्रस्तुत करते हुए एआई, स्मार्ट इनोवेशन, जीआईएस, स्मार्ट सिटी और टेक्नोलॉजी इंटीग्रेशन पर महत्वपूर्ण विचार रखे।

एक्सप्लेनेबल एआई समय की आवश्यकता— डॉ. सतीश सिंह

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इलाहाबाद के डॉ. सतीश कुमार सिंह ने ‘Explainable AI: Unlocking the Mind of Machine’ विषय पर बोलते हुए कहा कि एआई फिलहाल कई सवालों के घेरे में है, इसलिए इसे और अधिक तर्कसंगत व पारदर्शी बनाने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि एक्सप्लेनेबल एआई एक साथ कई कारकों का विश्लेषण कर सटीक आउटपुट देने में सक्षम होगा। कम्पास टूल को उन्होंने अपराध प्रवृत्ति, स्वास्थ्य कारक और पूर्वानुमान संबंधी विश्लेषण के लिए वरदान बताया। उनका कहना था कि हेल्थकेयर, फाइनेंस और क्रिमिनल जस्टिस जैसे क्रिटिकल क्षेत्रों में एक्सप्लेनेबल एआई की भूमिका और अहम हो जाती है।

कॉन्फ्रेंस के समापन सत्र का शुभारंभ मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। कार्यक्रम में डॉ. सतीश कुमार सिंह, एनएसयूटी दिल्ली की प्रो. प्रेरणा गौड़ गेस्ट ऑफ ऑनर रहीं। टीएमयू के कुलपति प्रो. वी.के. जैन, इंजीनियरिंग फैकल्टी के डीन एवं कॉन्फ्रेंस जनरल चेयर प्रो. आर.के. द्विवेदी समेत अनेक गणमान्य मौजूद रहे।

“I don’t know” सीखने का पहला कदम— अक्षत जैन

टीएमयू के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर श्री अक्षत जैन ने छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि “I don’t know” कहना सीखने की प्रक्रिया का पहला और सबसे महत्वपूर्ण चरण है।
उन्होंने कहा कि झिझक और संकोच सीखने में सबसे बड़ी बाधा हैं। अपनी अज्ञानता स्वीकार करना ईमानदारी और आत्म-जागरूकता का प्रतीक है। उन्होंने युवाओं को जिज्ञासु, विनम्र और लगातार सीखते रहने की प्रेरणा दी। साथ ही टीएमयू की विकास यात्रा तथा अपने परिवार के छह दशक लंबे शैक्षिक योगदान का उल्लेख किया।

भारत इंजीनियरों का देश, फिर भी टेक्नोलॉजी आयातक— प्रो. सचिन महेश्वरी

वीवी, गुरू जंभेश्वर यूनिवर्सिटी के प्रो. सचिन महेश्वरी ने भारत की वैश्विक स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत दुनिया में सबसे अधिक इंजीनियर पैदा करने वाला देश है, फिर भी तकनीक का बड़ा आयातक बना हुआ है।

ऑब्ज़र्वेशन और लर्निंग ही समाधान की कुंजी— प्रो. एस.एन. सिंह

एबीवी-आईआईआईटीएम, ग्वालियर के डायरेक्टर प्रो. एस.एन. सिंह ने कहा कि विद्यार्थियों को अपने आसपास की घटनाओं को सूक्ष्मता से देखकर सीखते रहना चाहिए।
आउट-ऑफ-द-बॉक्स थिंकिंग और क्रिएटिविटी समस्याओं के समाधान की सबसे मजबूत कुंजी हैं। उन्होंने भविष्य के अवसरों के लिए स्वयं को तैयार रखने की सलाह दी।

जीआईएस सूचनाओं का सटीक आधार— डॉ. अरुण के. सराफ

आईआईटी रूड़की के पूर्व प्रोफेसर डॉ. अरुण के. सराफ ने भारत की उपग्रह प्रणालियों की तुलना अमेरिका की प्रणालियों से करते हुए बताया कि जीपीएस आधारित घड़ियां सामान्य घड़ियों से अधिक सटीक समय देती हैं।
उन्होंने ओला-ऊबर जैसी लोकेशन-आधारित सेवाओं व मिसाइल नेविगेशन सिस्टम का उदाहरण देकर बताया कि जीआईएस कैसे सटीक और सार्थक सूचना उपलब्ध कराता है। उन्होंने भू-सूचना प्रौद्योगिकी के भविष्य पर भी विस्तार से प्रकाश डाला।

स्मार्ट सिटी का लक्ष्य— डिलाइटफुल और डिग्निफाइड लाइफ

एनएसयूटी दिल्ली की प्रो. प्रेरणा गौड़ ने कहा कि स्मार्ट सिटी का उद्देश्य नागरिकों को डिलाइटफुल और गरिमामय जीवनशैली देना है। उदाहरण देते हुए उन्होंने अमरावती शहर की स्मार्ट योजना का उल्लेख किया और चिंता जताई कि कोऑर्डिनेशन की कमी के कारण देश अभी तक 100 स्मार्ट सिटी विकसित करने के लक्ष्य को हासिल नहीं कर पाया है।

टीएमयू के कुलपति प्रो. वी.के. जैन ने छात्रों से इस प्रकार के शैक्षणिक आयोजनों में निरंतर भागीदारी की अपील की। आईईईई की ओर से डॉ. वरुण कक्कर और डॉ. के.सी. मिश्रा भी उपस्थित रहे।

पैनल डिस्कशन और शोध प्रस्तुति

कॉन्फ्रेंस में AI, IoT and Beyond: The Next Frontier of Smart Innovation पर डॉ. नीलेंद्र बादल, डॉ. अंकित गुप्ता, डॉ. एम.ए. अंसारी, डॉ. संकल्प गोयल, प्रो. शंभु भारद्वाज सहित कई विशेषज्ञों ने विचार रखे।
कार्यक्रम में डॉ. अशेन्द्र कुमार सक्सेना, डॉ. अलका अग्रवाल, डॉ. ज्योति पुरी, डॉ. पराग अग्रवाल, डॉ. प्रियांक सिंघल, डॉ. नूपाराम चौहान, डॉ. अशोक कुमार आदि भी उपस्थित रहे। प्रस्तुति और संचालन प्रत्यक्षा पुंज, मिसबा तैयब, अभिवंश जैन, गौरवी प्रजापति और जिया सिंह ने किया।

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