गौचर मेले की पहली सांस्कृतिक संध्या में पम्मी नवल ने खूब बांधा समां

गौचर, 15 नवंबर (गुसाईं)। मेले की पहली सांस्कृतिक संध्या जागर गायिका पम्मी नवल के नाम रही। उन्होंने अपने दमदार जागरों और लोकगीतों से दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया और पूरा पंडाल तालियों से गूंज उठा।
पम्मी नवल ने कार्यक्रम की शुरुआत ‘घुराणी का दिन’ जागर से की। इसके बाद उन्होंने ‘मि कैन लगाई बाडुली’ गीत प्रस्तुत किया। जब उन्होंने ‘अब ह्वैगी देवतों संध्या बाली बार’ जागर गाया तो दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका उत्साह बढ़ाया। कार्यक्रम के दौरान ‘नंदू का दादा कख जायां छा’ गीत भी प्रस्तुत किया गया।

सांस्कृतिक संध्या उस समय चरम पर पहुंच गई जब पम्मी नवल ने भैरव जागर गाया। जागर के बीच मंच पर उपस्थित एक महिला कलाकार पर देवता अवतरित होने की स्थिति बन गई, जिसे वहां मौजूद पंडित ने किसी तरह शांत कराया।
उनकी टीम के मिनारल रतूड़ी ने ‘हे नंदा हे गौरा कैलाशों की देवी’ भक्ति गीत प्रस्तुत किया, जिससे वातावरण भक्तिमय हो गया। इसके बाद ‘मि पहाड़ों को रैवासी तू दिल्ली की रैण वाली’ गीत ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया।
इससे पूर्व जनहित सांस्कृतिक मंच द्वारा भी विविध रंगारंग प्रस्तुतियां दी गईं। स्थानीय शिक्षण संस्थानों के प्रतियोगात्मक सांस्कृतिक कार्यक्रमों को भी दर्शकों ने खूब सराहा।
