आपदा/दुर्घटना

उत्तराखंड में मानव– वन्यजीव संघर्ष तेजी से बढ़ा, इस साल भालू ने 6 जानें ली

 

कमजोर फल, फूल उत्पादन से जानवर मानव बस्तियों की ओर हो रहे हैं प्रवासी

 

देहरादून, 18 नवंबर।  उत्तराखंड में मानव–भालू संघर्ष चिंता का विषय बन गया है। इस वर्ष अब तक छह लोगों की मौत भालू के हमलों में हो चुकी है, जो राज्य गठन के बाद से अब तक का सबसे अधिक आंकड़ा है। वन विभाग के आँकड़ों के अनुसार, एशियाई काले भालुओं (Ursus thibetanus) ने पिछले 25 वर्षों में 2,009 लोगों को घायल किया है—जो कि तेंदुए के हमलों से हुई चोटों (2,126) के लगभग बराबर है।

वन अधिकारियों और वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति मध्य हिमालय में तेजी से बदलते पारिस्थितिक तंत्र का परिणाम है। डीएफओ बद्रीनाथ डिवीजन सर्वेश दुबे के अनुसार, इस साल जंगलों में फल और फूल उत्पादन कम हुआ है, जिसके चलते भालू भोजन की तलाश में मानव बस्तियों की ओर बढ़ रहे हैं।

भालू क्यों हो रहे हैं आक्रामक? विशेषज्ञों के अनुसार:

बरसात से उदियार (भालुओं के प्राकृतिक घोंसले/बिल) को नुकसान पहुँचा हो सकता है।

1,500 से 3,000 मीटर ऊँचाई वाले क्षेत्रों में पाए जाने वाले भालू अब लोगों से अधिक बार टकरा रहे हैं, क्योंकि भूमि उपयोग, फसल पैटर्न और शहरीकरण तेजी से बदल रहा है।

पतझड़ के दौरान, भालू हाइपरफैगिया चरण में होते हैं—इस समय वे सर्दी से पहले शरीर में वसा जमा करने के लिए बेहद आक्रामक होकर भोजन खोजते हैं।

गाँवों में दहशत — लगातार बढ़ रहे हमले

नीचे दिया तालिका भालू हमलों का ताजा रिकॉर्ड दिखाती है

वर्ष      घायल   मृतक

2025     65      6
2024      65      3
2023      53      0
2022.      57     1

विनीत दुबे, वाइल्डलाइफ इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया के वैज्ञानिक ने बताया—
“शहरीकरण, भूमि उपयोग परिवर्तन और फसल प्रणाली में बदलाव, हिमालयी राज्यों में मानव–भालू संघर्ष और बढ़ा रहे हैं।”

मानव गतिविधि और बढ़ता जोखिम

विशेषज्ञों ने यह भी बताया:

  • बारिश के बाद चराई व चारा इकट्ठा करने के लिए लोग जंगलों में अधिक जाते हैं, जिससे मुठभेड़ बढ़ती है।
  • सड़क विस्तार और पर्यटन ने जंगल किनारों पर कचरे के ढेर बढ़ा दिए हैं, जिससे भालू आसानी से भोजन पाने के आदी हो रहे हैं।
  • जहाँ पहले पारंपरिक फसलें होती थीं, वहाँ अब फलदार पौधे लग रहे हैं — यह भी भालुओं को आकर्षित करता है।

वन विशेषज्ञ के अनुसार—
“कचरे और फलों तक आसान पहुँच ने जंगलों के भोजन तंत्र को बदल दिया है। कई इलाके भालुओं का मुख्य भोजन स्थल बन गए हैं।”

  • उत्तरकाशी की स्थिति सबसे गंभीर
  • उत्तरकाशी के भटवाड़ी ब्लॉक में ग्रामीणों ने बताया कि:
  • महिलाएँ अब अकेले खेतों में जाने से डरती हैं।
  • बच्चे भी स्कूल आने-जाने में असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
  • पिछले एक सप्ताह में भालू की गतिविधि और हमलों की कई रिपोर्ट आई है।

जिला पंचायत सदस्य रश्मि रावत के अनुसार—
“माता-पिता बच्चों को स्कूल भेजने से डर रहे हैं। कई बच्चों को शिक्षकों ने घर से लेकर स्कूल लाया और वापस छोड़कर गया ।

तेंदुए के डर से शिक्षक छात्रों को स्कूल लाने-ले जाने लगे

चंपावत जिले के मंगलोई क्षेत्र में तेंदुए के हमले में 45 वर्षीय भुवन राम की 12 नवंबर को मौत के बाद इलाके में दहशत फैल गई। ग्रामीणों को आशंका है कि तेंदुआ आदमखोर हो चुका है।

15 नवंबर से, जूनियर हाई स्कूल मंगलोई और मातियाल प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक छात्रों को घर से स्कूल लाने और वापस छोड़ने लगे, क्योंकि अभिभावक बच्चों को अकेले भेजने से डर रहे हैं।

अध्यापक कैलाश फर्त्याल ने बताया—
“हमने बच्चों को उनके घरों से लाकर स्कूल पहुँचाया और शाम को वापस छोड़ा।”

हालाँकि वन विभाग गश्त बढ़ा रहा है, लेकिन सोमवार तक 32 में से केवल 6 छात्र ही स्कूल पहुँचे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!