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कोडईकनाल वेधशाला के शताब्दी-लंबे डेटा से सूर्य के भविष्य के संकेत मिले

For over a century, scientists have tried to decipher the Sun’s mysterious rhythms, patterns of sunspots, flares, and magnetic storms that can affect everything from satellite operations to power grids on Earth. One of the key pieces of this solar puzzle lies in the polar magnetic fields of the Sun, which help shape each solar cycle and hold the crucial key for predicting future solar activity. As direct measurements of the polar magnetic fields of the Sun only began in the 1970s, we have very little knowledge about the polar field of the sun for the major part of the last century.

चित्र: 1904-2022 की अवधि में केओएसओ (उत्तरी गोलार्ध के लिए ठोस लाल और दक्षिणी गोलार्ध के लिए धराशायी नीला) और पीएसपीटी-आर (उत्तरी गोलार्ध के लिए ठोस गहरा लाल और दक्षिणी गोलार्ध के लिए धराशायी नेवी) से पुनर्निर्मित ध्रुवीय चुंबकीय क्षेत्रों में समय-समय पर परिवर्तन। तुलना के लिए डब्‍ल्‍यूएसओ (विलकॉक्स सौर वेधशाला) से प्रत्यक्ष ध्रुवीय क्षेत्र मापन 1976-2022 की अवधि के लिए दर्शाए गए हैं, जिनमें धराशायी-बिंदीदार गुलाबी और बिंदीदार बैंगनी रेखाएं क्रमशः उत्तरी और दक्षिणी गोलार्धों का प्रतिनिधित्व करती हैं।

 

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खगोलविदों ने कोडईकनाल सौर वेधशाला (केओएसओ) में 100 साल से अधिक पहले ली गई ऐतिहासिक सौर छवियों का अध्ययन करके सूर्य के अतीत के ध्रुवीय चुंबकीय व्यवहार को फिर से बनाने के लिए एक नया तरीका खोजा है, जो इसके भविष्य के बारे में सुराग प्रदान करता है।

एक सदी से भी अधिक समय से वैज्ञानिक सूर्य की रहस्यमय लय सौर धब्बों के पैटर्न, ज्वालाओं और चुंबकीय तूफानों को समझने की कोशिश कर रहे हैं, जो उपग्रह संचालन से लेकर पृथ्वी पर बिजली ग्रिड तक हर चीज़ को प्रभावित कर सकते हैं। इस सौर पहेली का एक प्रमुख हिस्सा सूर्य के ध्रुवीय चुंबकीय क्षेत्र में निहित है, जो प्रत्येक सौर चक्र को आकार देने में मदद करता है और भविष्य की सौर गतिविधि की भविष्यवाणी करने के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। चूंकि सूर्य के ध्रुवीय चुंबकीय क्षेत्रों का प्रत्यक्ष मापन 1970 के दशक में ही शुरू हुआ था, इसलिए पिछली सदी के अधिकांश समय तक हमें सूर्य के ध्रुवीय क्षेत्र के बारे में बहुत कम जानकारी थी।

भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के अंतर्गत स्वायत्त संस्थान आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (एआरआईईएस) के शोधकर्ताओं ने भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान, साउथवेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट, बोल्डर, अमेरिका, मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट फॉर सोलर सिस्टम रिसर्च, गोटिंगेन, जर्मनी और आईएनएएफ ऑस्सर्वेटोरियो एस्ट्रोनॉमिको डी रोमा, रोम, इटली के सहयोगियों के साथ मिलकर इस पहेली का हल ढूंढ लिया।

दिब्‍य कीर्ति मिश्रा के नेतृत्व वाली टीम ने कोडईकनाल सौर वेधशाला (केओएसओ) में 100 साल से भी अधिक पहले ली गई ऐतिहासिक सौर छवियों का अध्ययन करके सूर्य के पुराने ध्रुवीय चुंबकीय व्यवहार को फिर से बनाने का एक तरीका खोज निकाला है। केओएसओ बैंगलोर स्थित भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (आईआईए) का एक क्षेत्रीय केंद्र है और भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के अंतर्गत एक अन्य स्वायत्त संस्थान भी है ।

 

 

केओएसओ में सौर खगोलविदों ने 1904 की शुरुआत में ही सीए II के  नामक एक विशेष तरंगदैर्ध्य में सूर्य का अवलोकन करना शुरू कर दिया था। यह तरंगदैर्ध्य सूर्य की वर्णमंडलीय गतिविधि को दर्शाता है। सूर्य का वर्णमंडल दृश्य सतह के ठीक ऊपर एक परत है, जहां चुंबकीय गतिविधि के कारण प्लेज और नेटवर्क नामक चमकीले धब्बे बनते हैं और इस प्रकार ये अवलोकन एक सदी से भी अधिक समय से सौर चुंबकत्व का रहस्य समेटे हुए हैं।

केओएसओ संग्रह को एआई/एमएल अनुप्रयोगों के लिए एक बड़े डेटा स्रोत के रूप में देखा जा सकता है, जहां 100 से ज़्यादा वर्षों के अवलोकन अब डिजिटल रूप में छवियों में परिवर्तित हो चुके हैं। इस डेटा को शोध दल ने इटली के रोम-पीएसपीटी के हालिया अवलोकनों के साथ जोड़कर सूर्य के ध्रुवों के पास स्थित छोटे-छोटे चमकीले पिंडों, जिन्हें ध्रुवीय नेटवर्क कहा जाता है, की पहचान करने के लिए उन्नत विशेषता पहचान एल्गोरिदम का उपयोग किया। इससे उन्हें पिछली शताब्दी में सूर्य के ध्रुवीय क्षेत्र का अनुमान लगाने में मदद मिली।

शोधकर्ताओं ने बताया कि ध्रुवीय नेटवर्क एक शक्तिशाली “प्रॉक्सी” है, जो ध्रुवीय क्षेत्र की शक्ति का एक विकल्प है। शोधकर्ताओं ने इस पुनर्निर्माण का उपयोग चल रहे सौर चक्र 25 की शक्ति का अनुमान लगाने के लिए भी किया।

सूर्य के चुंबकीय व्यवहार को समझने से वैज्ञानिकों को सौर तूफानों की भविष्यवाणी करने में मदद मिलती है, जो उपग्रहों को नुकसान पहुंचा सकते हैं, जीपीएस को बाधित कर सकते हैं और यहाँ तक कि बिजली ग्रिड को भी ठप कर सकते हैं। ऐतिहासिक छवियों और एक स्वचालित एल्गोरिदम का उपयोग करते हुए यह नया दृष्टिकोण हमें सौर चुंबकत्व का पहले से कहीं अधिक लंबा और विश्वसनीय दृश्य प्रदान करता है।

पुनर्निर्मित ध्रुवीय क्षेत्र और ध्रुवीय नेटवर्क सूचकांक (पीएनआई) श्रृंखला सहित संपूर्ण डेटासेट, जनता के लिए ‘गिटहॅब और जेनोडो’ पर स्वतंत्र रूप से उपलब्ध है, जिससे दुनियाभर के शोधकर्ताओं को हमारे तारों के रहस्यों की गहराई से खोज करने में मदद मिलेगी।

प्रकाशन लिंक: https://doi.org/10.3847/1538-4357/adb3a8

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