उपनल कर्मियों की हड़ताल पर एस्मा लगाने का कांग्रेस ने किया विरोध
देहरादून, 20 नवंबर। उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने राज्य सरकार द्वारा उपनल कर्मचारियों पर एस्मा (उत्तराखंड आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम) और नो वर्क नो पे लागू किए जाने की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि यह कदम सरकार की नीतिगत विफलता और कर्मचारियों के प्रति असंवेदनशील रवैये को उजागर करता है।
गोदियाल ने कहा कि उपनल कर्मचारी वर्षों से प्रदेश की स्वास्थ्य, सुरक्षा, प्रशासनिक और तकनीकी सेवाओं को संभालते आए हैं—वह भी बिना स्थायीकरण, बिना सुरक्षा और बिना पर्याप्त वेतन के।
“आज जब ये कर्मचारी अपने वैध अधिकारों और सेवा शर्तों के निर्धारण की मांग कर रहे हैं, तो सरकार ने संवाद के बजाय दमन का रास्ता चुन लिया है,” उन्होंने कहा।
गोदियाल ने सरकार पर लगाए ये आरोप
1. एस्मा लगाकर कर्मचारियों को अपराधी जैसा व्यवहार दिया गया है, जबकि वास्तविक अपराध वर्षों से उनकी उपेक्षा है।
2. सरकार का यह कदम दर्शाता है कि वह संवाद और समाधान से बच रही है।
3. उपनल व्यवस्था में मौजूद अनियमितताओं, कमीशन प्रथा और संविदा-निर्भर तंत्र पर सरकार जवाब देने से बच रही है।
4. जिस प्रदेश में डॉक्टरों, नर्सों, तकनीकी स्टाफ, ड्राइवरों व फील्ड वर्कर्स की गंभीर कमी है, वहां एस्मा लागू करना सरकार की घबराहट को दर्शाता है।
गोदियाल ने सरकार से पूछे सीधे सवाल
- क्या उपनल कर्मचारी मशीन हैं, जिन्हें अधिकार मांगने पर दंडित किया जाएगा?
- क्या संवाद और कर्मचारियों के हितों पर बात करना सरकार की प्राथमिकता में नहीं है?
- क्या सरकार उपनल प्रणाली की खामियों को छिपाने के लिए एस्मा को ढाल बना रही है?
कांग्रेस की मांगें :
गोदियाल ने कहा कि कांग्रेस पार्टी की स्पष्ट मांग है कि—
- उपनल कर्मचारियों पर लागू एस्मा तुरंत वापस लिया जाए।
- कर्मचारियों के प्रतिनिधियों के साथ तत्काल संवाद शुरू किया जाए।
- उपनल व्यवस्था की व्यापक समीक्षा कर पारदर्शिता, स्थायित्व और सम्मान आधारित रोजगार प्रणाली लागू की जाए।
अंत में उन्होंने कहा कि उत्तराखंड कांग्रेस उपनल कर्मचारियों के न्यायपूर्ण संघर्ष के साथ मजबूती से खड़ी है और सरकार के इस अलोकतांत्रिक निर्णय का पुरजोर विरोध करती है।
