मदमहेश्वर की उत्सव डोली शीतकालीन गद्दीस्थल उखीमठ पहुंची, भक्तों ने किया भव्य स्वागत

उखीमठ/रुद्रप्रयाग, 22 नवंबर (कपरूवाण)। द्वितीय केदार मदमहेश्वर जी की उत्सव डोली अपने देव निशानों के साथ शुक्रवार अपराह्न शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर, उखीमठ पहुंची। 18 नवंबर को कपाट बंद होने के बाद डोली गौंडार, रांसी और गिरिया होते हुए आज उखीमठ पहुंची। मंदिर परिसर को फूलों से सजाया गया था तथा श्रद्धालुओं की ओर से भंडारे का भी आयोजन किया गया। इसी के साथ 20 नवंबर से तीन दिवसीय मदमहेश्वर मेला भी प्रारंभ हो चुका है।
डोली के आगमन पर रावल भीमाशंकर लिंग ने मंगलचौंरी और ब्राह्मणखोली में पूजा-अर्चना संपन्न की तथा सोने का छत्र अर्पित किया। डोली के उखीमठ प्रवेश पर श्रद्धालुओं, पुजारियों और स्थानीय जनता ने फूल वर्षा कर स्वागत किया। सेना के बैंड और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की मंगल धुनों के बीच डोली का भव्य स्वागत किया गया। ओंकारेश्वर मंदिर परिसर में पहुंचने के बाद डोली की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई तथा श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। इसके साथ ही शीतकालीन पूजाएं औपचारिक रूप से आरंभ हो गईं।
डोली के आगमन पर क्षेत्र में उत्साह का वातावरण रहा और भक्तों ने ‘जय मदमहेश्वर’ तथा ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष किए।
इस अवसर पर बीकेटीसी उपाध्यक्ष विजय कप्रवाण, मेला अध्यक्ष व नगर पंचायत अध्यक्ष कुब्जा धर्म्वाण, जनप्रतिनिधियों, पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों और ग्रामीणों ने डोली की अगवानी की।
बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने मदमहेश्वर जी की उत्सव डोली के उखीमठ पहुंचने पर श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि मदमहेश्वर की कृपा से क्षेत्र में सुख-समृद्धि बनी रहे। उन्होंने यह भी कहा कि ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ में केदारनाथ धाम और मदमहेश्वर जी की शीतकालीन पूजाएं उत्साहपूर्वक आयोजित की जाएंगी।
बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी विजय थपलियाल ने भी डोली के शीतकालीन प्रवास पर पहुंचने पर प्रसन्नता व्यक्त की।
डोली यात्रा के उखीमठ पहुंचने पर हजारों स्थानीय श्रद्धालुओं और तीर्थयात्रियों ने मार्ग में तथा मंदिर परिसर में दर्शन किए।
इस अवसर पर चंडी प्रसाद भट्ट, बीकेटीसी उपाध्यक्ष विजय कप्रवाण, भाजपा जिलाध्यक्ष भारत भूषण भट्ट, बीकेटीसी सदस्य श्रीनिवास पोस्ती, प्रह्लाद पुष्पवान, देवी प्रसाद देवली, डॉ. विनीत पोस्ती, नीलम पुरी, राजेंद्र प्रसाद डिमरी, धर्माचार्य ओंकार शुक्ला, प्रभारी अधिकारी यदुवीर पुष्पवान, मंदिर प्रभारी किशन त्रिवेदी, वेदपाठी यशोधर मैठाणी, वेदपाठी विश्वमोहन जमलोकी, पुजारी शिवलिंग, पुजारी शिवशंकर लिंग, पुजारी टी. गंगाधर लिंग, प्रेम सिंह रावत, दीपक पंवार, ललित त्रिवेदी, कुलदीप धर्म्वाण आदि मौजूद रहे।
