नासा के एक दशक के आंकड़े बताते हैं कि नवजात तारों का बचपन कितना उग्र और अस्थिर होता है
A sweeping new study has pulled back the curtain on the chaotic early lives of young stars, revealing that stellar infancy is far more turbulent and variable than previously thought. Over ten years of data from NASA’s Wide-field Infrared Survey Explorer (WISE) and its extended mission NEOWISE, astronomers have now captured one of the largest and most detailed mid-infrared variability catalogs of young stellar objects (YSOs) to date. Young Stellar Objects (YSO) are stars in the earliest stages of their lives where stars stably fuse hydrogen in their cores. This is the stage before the stars enter the main sequence of what is called the Hertzsprung-Russell diagram (a plot showing stars in various stages of evolution based on their temperature and brightness). YSOs form from the collapse of dense molecular clouds, giant cold regions in space rich in gas and dust.

- A PIB FEATURE-
एक बड़े नए शोध ने नवजात तारों के हिंसक और अराजक प्रारंभिक जीवन से पर्दा उठा दिया है। यह अध्ययन बताता है कि तारों का शैशव काल पहले सोचे गए से कहीं अधिक अस्थिर और अप्रत्याशित होता है। नासा के वाइड-फील्ड इन्फ्रारेड सर्वे एक्सप्लोरर (WISE) और उसके विस्तारित मिशन नियोवाइज (NEOWISE) से प्राप्त दस साल से अधिक के मिड-इन्फ्रारेड आंकड़ों का उपयोग करते हुए, खगोलविदों ने अब तक का सबसे बड़ा और सबसे विस्तृत युवा तारकीय वस्तुओं (Young Stellar Objects – YSOs) की चमक-परिवर्तन सूची तैयार की है।
युवा तारकीय वस्तुएँ (YSOs) वे तारे होते हैं जो अपने जीवन के सबसे शुरुआती चरण में होते हैं – जब वे अभी तक अपने केंद्र में हाइड्रोजन का स्थिर संलयन शुरू नहीं कर पाते और हर्ट्ज़स्प्रंग-रसेल आरेख की मुख्य अनुक्रम (मेन सीक्वेंस) में प्रवेश नहीं करते। ये घने आणविक बादलों के गुरुत्वाकर्षण पतन से बनते हैं। इन बादलों का पतन आसपास के सुपरनोवा विस्फोट, तारकीय विकिरण या अंतरतारकीय माध्यम में अशांति जैसे कारणों से शुरू हो सकता है।

आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (ARIES), विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST), भारत सरकार के स्वायत्त संस्थान के नेहा शर्मा और सौरभ शर्मा द्वारा द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल सप्लीमेंट सीरीज़ में प्रकाशित इस शोध में आकाशगंगा के प्रमुख तारा-निर्माण क्षेत्रों में स्थित 22,000 से अधिक YSOs की प्रकाश वक्र (light curves) का विश्लेषण किया गया।
शोध से पता चला कि जब आणविक बादल अपने ही गुरुत्वाकर्षण से सिकुड़ता है, तो उसके केंद्र में एक प्रोटोस्टार बनता है – एक गर्म, सघन कोर जिसके चारों ओर घूर्णन करने वाली गैस-धूल की डिस्क होती है। प्रोटोस्टार की चमक नाभिकीय संलयन से नहीं, बल्कि गुरुत्वाकर्षण पतन और संचय (accretion) से निकलने वाली ऊष्मा से आती है। यह संचय प्रक्रिया बेहद अस्थिर होती है – अचानक तेज़ उछाल और रुकावटें आने से चमक में तेज़ और अप्रत्याशित बदलाव होते हैं। अंत में बढ़ते तारे का विकिरण दबाव बाकी बचे बादल को उड़ा देता है और संचय रुक जाता है, जिससे एक युवा प्री-मेन-सीक्वेंस तारा बचता है।
इन्फ्रारेड अवलोकन इसलिए खास हैं क्योंकि इन्फ्रारेड प्रकाश इन तारों को घेरे हुए मोटे धूल के आवरण को भेद सकता है।
WISE/NEOWISE के 3.4 और 4.6 माइक्रॉन बैंड में दस साल से अधिक के आंकड़ों का विश्लेषण कर टीम ने YSOs की परिवर्तनशीलता को छह मुख्य श्रेणियों में वर्गीकृत किया:
- रैखिक (स्थिर चमकीला या मंद पड़ना)
- वक्र (गैर-रैखिक दीर्घकालिक रुझान)
- आवर्ती (घूर्णन या कक्षीय गति से जुड़े दोहरावदार चक्रिया)
- विस्फोट (अचानक चमक बढ़ना)
- गिरावट (अचानक मंद पड़ना)
- अनियमित (अराजक और अनियंत्रित बदलाव)
लगभग 26% YSOs में स्पष्ट परिवर्तनशीलता पाई गई, जिसमें अनियमित परिवर्तन सबसे आम थे। सबसे युवा क्लास I प्रोटोस्टार (जो अभी भी धूल के गहरे लिफाफे में दबे होते हैं) सबसे अधिक परिवर्तनशील (36%) दिखाते हैं, जबकि अधिक विकसित क्लास III तारों में यह मात्र 22% थी।
रंग परिवर्तन ने और संकेत दिए। ज्यादातर परिवर्तनशील तारे चमक बढ़ने पर लाल होते गए (धूल के गर्म होने या विलुप्ति बढ़ने का संकेत), लेकिन एक उल्लेखनीय हिस्सा – खासकर सबसे युवा तारों में – चमक बढ़ने पर नीला हो गया। यह तीव्र संचय घटनाओं या आंतरिक डिस्क के अस्थायी साफ होने का संकेत हो सकता है।
मुख्य लेखिका नेहा शर्मा ने कहा, “यह सूची अब तक की सबसे पूर्ण मिड-इन्फ्रारेड तारकीय युवावस्था की तस्वीर पेश करती है। इन नवजात तारों के चमकने-झिलमिलाने को देखकर हम जान पा रहे हैं कि तारे कैसे द्रव्यमान इकट्ठा करते हैं, अपनी डिस्क से भोजन करते हैं और अंत में धूल के अपने कोकून से बाहर निकलते हैं।”
सार्वजनिक रूप से उपलब्ध इस सूची में 5,800 से अधिक परिवर्तनशील YSOs शामिल हैं। जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (JWST) और भारत के 3.6 मीटर देवस्थल ऑप्टिकल टेलीस्कोप जैसे नए यंत्र इन लक्ष्यों का और उच्च रिज़ॉल्यूशन में अनुसरण कर रहे हैं, जिससे उम्मीद है कि सूर्य जैसे तारों के जन्म की बारीक से बारीक प्रक्रियाएँ सामने आएंगी।
प्रकाशन लिंक: https://doi.org/10.3847/1538-4365/adc397
