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विकसित भारत के सपने को मूर्त रूप देने को कॉर्पाेरेट और एकेडमिक सहयोग जरूरी

तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के सीटीएलडी की ओर से इन्नोवेट, इंटीग्रेट, इंस्पायरः रेडिफाइंग इंडस्ट्री-अकेडमिया कोलाबोरेशन फॉर विकसित भारत 2047 पर ऑनलाइन राष्ट्रीय संगोष्ठी

 

मुरादाबाद, 30 नवंबर। तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के सेंटर फॉर टीचिंग, लर्निंग एंड डवलपमेंट- सीटीएलडी की ओर से इन्नोवेट, इंटीग्रेट, इंस्पायरः रेडिफाइंग इंडस्ट्री- अकेडमिया कोलाबोरेशन फॉर विकसित भारत 2047 पर ऑनलाइन राष्ट्रीय संगोष्ठी में उद्योग और शिक्षा संस्थानों के बीच सहयोग, कौशल संवर्धन, अनुसंधान साझेदारी, और भविष्य की रोजगार आवश्यकताओं पर सार्थक विचार-विमर्श हुआ। बतौर मुख्य वक्ता सीके बिड़ला हॉस्पिटल, नई दिल्ली के जनरल मैनेजर- एचआर श्री पंकज तिवारी ने कॉर्पाेरेट-एकेडमिक सहयोग की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा, आज के युग में अनुकूलनशीलता और मानवीय कौशल उद्योग में सफलता के मूल स्तंभ हैं। टीएमयू की डीन एकेडमिक्स प्रो. मंजुला जैन ने उद्घाटन संबोधन में कहा, टीचर्स, इंडस्ट्री और स्टुडेंट्स इन तीनों के बीच समन्वय से ही विकसित भारत 2047 का सपना साकार हो सकता है। हमें शिक्षा को उद्योग की भाषा में और उद्योग को शिक्षा की संवेदना में ढालना होगा। अंत में हुए प्रश्नोत्तर सत्र में प्रतिभागियों ने स्किल डेवलपमेंट, इंटर्नशिप अवसरों और उद्योग आधारित पाठ्यक्रमों पर प्रश्न पूछे। सीटीएलडी के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. दिलीप दत्त वार्ष्णेय ने वोट ऑफ थैंक्स दिया। संचालन सीटीएलडी की कन्वीनर डॉ. जैस्मिन स्टीफन ने किया।

मनहरी ग्रुप के चेयरमैन श्री हरेंद्र कुमार गर्ग बोले, नवाचार और सहयोग ही भारत को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अग्रणी बना सकते हैं। कॉजेंट इन्फोटेक के मार्केटिंग एंड इन्नोवेशन डायरेक्टर श्री अनंत अग्रवाल ने कहा, छात्रों को वास्तविक उद्योग परियोजनाओं में शामिल करना ही सच्चा कौशल विकास है। उन्होंने कहा, भविष्य उन्हीं संस्थानों का होगा जो तकनीक को शिक्षण के साथ प्रभावी रूप से एकीकृत करेंगे। लिटवर्क हैदराबाद के डायरेक्टर श्री विनय सिंह ने कहा, 21वीं सदी का ग्रेजुएट केवल डिग्री नहीं, बल्कि कौशल और दृष्टिकोण के आधार पर पहचाना जाएगा। सीटीएलडी के निदेशक प्रो. पंकज कुमार सिंह ने उद्योग और शिक्षा के बीच सार्थक संवाद और व्यावहारिक सहयोग के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, 21वीं सदी में शिक्षा तभी सार्थक होगी, जब वह उद्योग की वास्तविक आवश्यकताओं से जुड़ी हो। टीएमयू का उद्देश्य है कि हमारे छात्र केवल रोजगार प्राप्त करने वाले नहीं, बल्कि नवाचार करने वाले बनें।

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