अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांगता दिवस 2025 पर उनकी उपलब्धियों के उत्सव का आयोजन हुआ दून पुस्तकालय में

देहरादून 4 दिसम्बर।अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांग दिवस 2025 का एक कार्यक्रम आज सायं दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र तथा साहस फाउण्डेशन समावेशी संसाधन केन्द्र द्वारा दून पुस्तकालय के सभागार में किया गया. इसमें दिव्यांग व्यक्तियों के कौशल, शक्तियों और उनके अनुभवों को प्रदर्शित करते हुए उनके अनुभव व विचार सुने गये. इस कार्यक्रम का उद्देश्य मूलतः दिव्यांग जनों के नये कौशल सीखने की प्रवृति,खुद की व्यक्तिगत प्रतिभा को समझना और उसे प्रोत्साहित करना रहा है।
साहस फाउण्डेशन समावेशी संसाधन केन्द्र एक मंच के रुप में बच्चों, युवाओं, वयस्कों और विशेष रूप से विकलांग महिलाओं की भागीदारी को प्रोत्साहित करने का प्रयास करता रहा है। स्वतंत्र रूप से यह संस्था अभिव्यक्ति के लिए एक सहायक मंच प्रदान करके इस आयोजन से आत्मविश्वास, दृश्यता और सामुदायिक प्रशंसा का निर्माण करने का प्रयास करता है।

कार्यक्रम में दिव्यांग जनों द्वारा तथा उनके परिवार जनों की ओर से निजी प्रयासों के अनुभव-साझा किये गये । कार्यक्रम में महिलाओं के विषयपर भी चर्चा हुई. कुछ प्रतिभागी गणों ने अपनी रचनात्मक क्षमताओं, व्यावसायिक कौशल, प्रदर्शन कलाओं, गतिशीलता तकनीकों . या दैनिक जीवन में उपयोग किए नवाचारों के प्रदर्शन तरीकों पर भी प्रकाश डाला।
फ़ाउण्डेशन के शाहाब नकवी ने कहा कि यह मंच परिवारों और समुदायों के लिए भी जगह बनाता है, और व्यक्तियों को गतिशीलता, सामाजिक दृष्टिकोण, डिजिटल बहिष्कार या शिक्षा एवं आजीविका तक पहुँच से जुड़ी चुनौतियों से उबरने में सक्षम बनाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को मान्यता देता है। शिक्षकों, नागरिक समाज समूहों और स्थानीय संस्थाओं जैसे हितधारकों को व्यापक समावेशन के व्यावहारिक समाधानों और मार्गों पर विचार के लिए आमंत्रित किया जाता है।
उन्होनें इस उत्सव कार्यक्रम के माध्यम से इसके उद्देश्य विविध कहानियों का दस्तावेजीकरण करना, विकलांगता और लिंग के बारे में सामुदायिक समझ को मज़बूत करना और दीर्घकालिक कार्य एवं विकास को समर्थन देने वाले नेटवर्क का निर्माण करना आदि की जानकारी देते हुए कहा कि यह मंच प्रत्येक प्रतिभागी की यात्रा का सम्मान करता है और इस बात पर बल देता है कि प्रत्येक उपलब्धि, चाहे वह बड़ी हो या छोटी, एक अधिक समावेशी और करुणामय समाज के निर्माण में योगदान देती है।
इस अवसर पर श्री नवीन उपाध्याय ने बांसुरी की मोहक धुन से उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया. डॉ राकेश अग्रवाल और श्रीमती मंजू गुंसाई, अध्यापिका आशा स्कूल ने भी अपने विचार रख कर अपने व्यक्तिगत अनुभव सहज रुप से सुनाये।
कार्यक्रम के अन्त में दिव्यांग जनों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से साहस फाउण्डेशन समावेशी संसाधन केन्द्र की तरफ से प्रतिभागी जनों को प्रोत्साहन-पत्र भी दिये गये.
इस अवसर पर केन्द्र प्रोग्राम एसोसिएट चन्द्रशेखर तिवारी, डॉ.लालता प्रसाद, डॉ. योगेश धस्माना, शीबा, बिजू नेगी, विजय भट्ट, कुलभूषण नैथानी, नवीन उपाध्याय, डॉ राकेश अग्रवाल, पिंकी कुमारी, अम्मार नक़वी, सुन्दर सिंह बिष्ट सहित देहरादून व समीपवर्ती गांव क्षेत्रों से दिव्यांग जन और उनके पारिवारिक जन, समाज सेवी सहित कई लोग शामिल रहे.
