उत्तराखंड इंसानियत मंच ने सरकार पर लगाया मानवाधिकार हनन का आरोप
देहरादून, 10 दिसंबर। उत्तराखंड इंसानियत मंच ने केन्द्र और राज्य सरकार पर लोगों के मानवाधिकारों और संवैधानिक अधिकारों के हनन का आरोप लगाया है। मंच ने कहा है कि नागरिकों को स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे मूलभूत अधिकारों से भी वंचित रखने का प्रयास किया जा रहा है। अतिक्रमण के नाम पर लोगों को बेघर किया जा रहा है और नागरिकों के हक में बोलने वालों को जेलों में भेजा जा रहा है।
विश्व मानवाधिकार दिवस पर जारी एक प्रेस नोट में उत्तराखंड इंसानियत मंच ने सरकार सेे मांग की है कि वह मानवाधिकारों की सर्वाभौमिक घोषणा (यूडीएचआर) में निहित अपने संकल्पों का मान रखे और तत्काल सुधारात्मक कदम उठाए। सबसे पहले, सरकार को सोनम वांगचुक तथा अन्य राजनीतिक बंदियों को रिहा करना चाहिए, जिन्हें जनता के हक में बोलने के कारण जेल में रखा गया है। इसके अतिरिक्त, यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि निर्वाचन आयोग पूरी तरह स्वतंत्र रूप से काम करे, और सत्ता पक्ष का उपकरण न बने। साथ ही, सरकारी स्कूलों को बंद करने और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को बदहाली की स्थिति में छोड़ने के बजाय, राज्य को सभी नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएँ निःशुल्क एवं समान रूप से उपलब्ध करानी चाहिए।
प्रेस नोट में कहा गया है कि 77 वर्ष पहले संयुक्त राष्ट्र महासभा ने मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा को अपनाया था। इस घोषणा की प्रस्तावना में विचार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, तथा भय और अभाव से मुक्ति को विश्व के लोगों की सर्वाेच्च आकांक्षाएँ बताया गया है। इसके 30 अनुच्छेद प्रत्येक मानव के बुनियादी और अविच्छिन्न अधिकारों का वर्णन करते हैं।
भारत ने इस ऐतिहासिक घोषणा के निर्माण में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया था। हंसा जिवराज मेहता, जो संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग में भारत की प्रतिनिधि थीं, उन्होंने अनुच्छेद 1 की भाषा सभी आदमी स्वतंत्र और समान पैदा होते हैं से बदलकर सभी मनुष्य स्वतंत्र और समान पैदा होते हैं, कराने में निर्णायक भूमिका निभाई। लक्ष्मी एन. मेनन, जो भारत के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रही थीं, ने घोषणा में लिंग की परवाह किए बिना समानता के स्पष्ट उल्लेख के लिए दृढ़ता से पक्ष रखा।
इन गौरवपूर्ण योगदानों के बावजूद, आज देश का सत्तारूढ़ तंत्र मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा (यूडीएचआर) के मूल सिद्धांतों के प्रति उपेक्षा और असम्मान प्रदर्शित करता है। प्रतिदिन ऐसे कदम उठाए जा रहे हैं जो घोषणा के कई अनुच्छेदों का खुला उल्लंघन हैं- जैसे विचार एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शिक्षा का अधिकार, उचित जीवन स्तर का अधिकार, निष्पक्ष निर्वाचन प्रतिनिधित्व, मनमानी गिरफ़्तारी से संरक्षण, तथा दोष सिद्ध होने तक निर्दाेष माने जाने का अधिकार।
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