यूपीसीएल ने भेजा बिजली दरों में वृद्धि का प्रस्ताव, आयोग करेगा जनसुनवाई के बाद फैसला
देहरादून, 11 दिसंबर। उत्तराखंड पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPCL) ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बिजली दरों में बढ़ोतरी का प्रस्ताव मंगलवार, 10 दिसंबर को उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (UERC) को भेज दिया है। प्रस्ताव में कुल मिलाकर लगभग 16 प्रतिशत वृद्धि का उल्लेख है, हालांकि यूपीसीएल ने इसे तकनीकी समायोजन बताया है।
क्या है पूरा मामला?
यूपीसीएल द्वारा प्रस्तुत याचिका में 2016-17 से 2024-25 तक की अवधि के दौरान हुए राजस्व अंतर और पूंजीगत व्यय को मुख्य आधार बनाया गया है। निगम ने करीब 2,000 करोड़ रुपये के कुल राजस्व अंतर (Revenue Gap) को पूरा करने के लिए यह वृद्धि प्रस्तावित की है।
- पूंजीकरण कार्यों के लिए मांग: 976 करोड़ रुपये
- ट्रू-अप प्रक्रिया में मांग: 1,343 करोड़ रुपये
- बिजली चोरी और तकनीकी नुकसानों के चलते राजस्व अंतर में वृद्धि
- हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर जैसे जिलों में बिजली चोरी को बड़ा कारण बताया गया है।
यूपीसीएल का स्पष्टीकरण
7 दिसंबर को यूपीसीएल ने बयान जारी कर कहा था कि 16% वृद्धि का दावा “भ्रामक” है, क्योंकि यह ट्रू-अप प्रक्रिया से जुड़ा तकनीकी समायोजन है। निगम के अनुसार, वास्तविक प्रस्तावित टैरिफ वृद्धि केवल 2.64% है, जो वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए मांगी गई है।
निगम का कहना है कि बिजली दरें सीधे वह नहीं बढ़ाता, बल्कि यह प्रक्रिया आयोग द्वारा वित्तीय विश्लेषण और जनसुनवाई के बाद तय होती है।
बिजली चोरी रोकने के लिए यूपीसीएल ने विजिलेंस रेड, खराब मीटरों की बदलाई, एंड्रॉयड आधारित बिलिंग जैसे कदम शुरू किए हैं।
आगे क्या?
अब आयोग सभी ऊर्जा निगमों की याचिकाओं की समीक्षा करेगा और राज्यभर में जनसुनवाई आयोजित करेगा। इसके बाद ही अंतिम टैरिफ तय किया जाएगा। नई दरें 1 अप्रैल 2026 से लागू हो सकती हैं।
प्रभाव
यदि वृद्धि को मंजूरी मिलती है तो घरेलू, व्यापारिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ बढ़ सकता है। हालांकि अंतिम फैसला आयोग द्वारा विस्तृत प्रक्रिया के बाद लिया जाएगा।
ध्यान रहे, यह मामला उत्तराखंड (UPCL) से संबंधित है, न कि उत्तर प्रदेश (UPPCL)** से, जहां हाल ही में कोई टैरिफ वृद्धि नहीं हुई है।
